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कपर्दि विनायक व्रत – कपर्दि विनायक व्रत कैसे करते है और व्रत कथा

श्रावण मास की शुक्ला चतुर्थी से लगाकर भादों की शुक्ला चतुर्थी तक जो मनुष्य एक बार भोजन कर के एक मास पर्यन्त कपर्दि गणेश या कपर्दि विनायक का व्रत करता है, उसके सब काम सिद्ध होते है। कपर्दि विनायक व्रत की...

सिद्धिविनायक व्रत कथा – सिद्धिविनायक का व्रत कैसे करते है तथा व्रत का महत्व

गणेशजी के सम्पूर्ण व्रतों में सिद्धिविनायक व्रत प्रधान है। सिद्धिविनायक व्रत भाद्र-शुक्ला चतुर्थी को किया जाता है। पूजन के आरम्भ में संकल्प करने के बाद गणेशजी की स्थापना, प्रतिष्ठा और ध्यान करना चाहिये। ध्यान के पश्चात आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ, मधुपर्क,...

गाज बीज माता की कथा – गाज बीज माता का व्रत कैसे करते है और पूजा विधि

भाद्र शुक्ला द्वितीया को अधिकांश गृहस्थो के घर बापू की पूजा होती है। यह बापू की पूजा असल में कुल-देवता की पूजा है। इस पूजा में कच्ची रसोई बनाकर बापू देव को भोग लगाया जाता है। फिर सब उसी प्रसाद को...

हरछठ का व्रत कैसे करते है – हरछठ में क्या खाया जाता है – हलषष्ठी व्रत कथा हिंदी

भारत भर में हरछठ जिसे हलषष्ठी भी कहते है, कही कही इसे ललई छठ भी कहते है। हरछठ का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलराम जी...

कजरी की नवमी कब और कैसे मनाते है – कजरी पूर्णिमा का व्रत और कथा

कजरी की नवमी का त्योहार हिन्दूमात्र में एक प्रसिद्ध त्योहार है। श्रावण सुदी पूर्णिमा को कजरी पूर्णिमा कहते है। इसी को श्रावणी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन श्रावणी कर्म होता है और रक्षाबंधन भी होता है। किन्तु बुन्देलखण्ड की श्रावणी...

नाग पंचमी कब मनायी जाती है – नाग पंचमी की पूजा विधि व्रत और कथा

श्रावण शुक्ला पंचमी को नाग-पूजा होती है। इसीलिये इस तिथि को नाग पंचमी कहते हैं। भारत में यह बडे हर्षोल्लास के साथ मनायी जाती है। इस दिन व्रत रखा जाता है।       नाग पंचमी की पूजा कैसे करे –...

रक्षाबंधन क्यों मनाते है – रक्षाबंधन पूजा विधि और रक्षा-बंधन की कथा

रक्षाबंधन:– श्रावण की पूर्णिमा के दिन दो त्योहार इकट्ठे हुआ करते है।श्रावणी और रक्षाबंधन। अनेक धर्म-ग्रंथों का मत है कि श्रावणी को ब्रह्मचारी ओर द्विजों को चाहिये कि ग्राम के समीप अच्छे तालाब या नदी के किनारे पर जाकर, उपाध्याय (गुरु)...

गंगा दशहरा का महत्व – क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा की कथा

ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को गंगा दशहरा कहते हैं। गंगा दशहरा के व्रत का विधान स्कन्द-पुराण और गंगावतरण की कथा वाल्मीकि रामायण में लिखी है। ज्येष्ठ शुक्ला दशमी सम्वतसर का सुख है। इसमें स्नान और विशेष करके दान करना चाहिये। सर्वप्रथम तो गंगा...

वट सावित्री व्रत की कथा – वट सावित्री की पूजा कैसे करते है – सवित्री सत्यवान की कहानी

ज्येष्ठ बदी तेरस को प्रातःकाल स्वच्छ दातून से दन्तधोवन कर उसी दिन दोपहर के बाद नदी या तालाब के विमल जल में तिल और आंवले के कल्क से केशों को शुद्ध करके स्नान करे ओर जल से वट के मूल का...

आसमाई व्रत कथा – आसमाई की पूजा विधि – आस माता की कहानी व आस माता का व्रत कब

वैशाख, आषाढ़ और माघ, इन्हीं तीनों महीनों की किसी तिथि में रविवार के दिन आसमाई की पूजा होती है। जो किसी कार्य की सिद्धि के लिये आसमाई की पूजा बोलता है और उसका कार्य सिद्ध होता है, वही यह पूजा करता...

हनुमान जयंती का महत्व – हनुमान जयंती का व्रत कैसे करते है और इतिहास

चैत्र पूर्णिमा श्री रामभक्त हनुमान का जन्म दिवस हैं। इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। कुछ लोग यह जन्म दिवस कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को मानते है। किन्तु अधिकतर चैत्र पूर्णिमा के ही पक्ष में हैं। हम भी यही मानते हैं। हनुमान,...

रामनवमी का महत्व – श्रीराम का जन्मदिन चैत्र रामनवमी कैसे मनाते हैं

रामनवमी भगवान राम का जन्म दिन है। यह तिथि चैत्र मास की शुक्ला नवमी को पड़ती है। चैत्र पद से चांद्र चैत्र समझना चाहिए। इसी दिन राम चन्द्र जी का जन्म हुआ था। अतः यह तिथि रामनवमी कहलाती है। रामनवमी का व्रत...

अरुंधती व्रत रखने से पराये मर्द या परायी स्त्री से नाजायज संबंध रखने के पाप से मुक्ति मिलती है

चैत्र शुक्ला प्रतिपदा को अरुंधती व्रत रखा जाता है। इस व्रत को रखने से पराये मर्द या परायी स्त्री से नाजायज संबंध रखने के पाप से मुक्ति मिलती है। अरुंधती कौन थी? अरुंधती किसकी पत्नी थी? देवी अरुन्धती कर्दम मुनि की...

बैसाखी का पर्व किस दिन मनाया जाता है – बैसाखी का त्योहार क्यों मनाया जाता है

बैसाखी सिक्ख धर्म का बहुत ही प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दिन गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की नींव डाली थी। गुरु गोविंद सिंह सिक्‍ख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु थे इसलिए उन्हें “दशमेश” भी कहा जाता है।...

बकरीद क्यों मनाया जाता है – ईदुलजुहा का इतिहास की जानकारी इन हिन्दी

बकरीद या ईद-उल-अजहा ( ईदुलजुहा) ईदुलफितर के दो महीने दस दिन बाद आती है। यह ईद चूंकि महीने की दस तारीख को मनायी जाती है, इसलिए इसका निर्णय दस दिन पूर्व ही चांद देख कर होता है। यह भी कभी गर्मी...