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गुरुद्वारा मुक्तसर साहिब

गुरुद्वारा मुक्तसर साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी – गुरुद्वारा श्री मुक्तसर साहिब का इतिहास

मुक्तसर जिला फरीदकोट के सब डिवीजन का मुख्यालय है तथा एक खुशहाल कस्बा है। यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थान भी है। इसके निकट ही मांझे से आये गुरु गोबिंद सिंह जी के 40 श्रृद्धालु सिक्खों ने जिन्हें "चालीस मुक्ते" कहा जाता है, नवाब वजीर खां की फौज से युद्ध करते हुए शहीदी प्राप्त की थी। इन चालीस मुक्तों की शहीदी ने ही मुगल सेना का…

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गुरुद्वारा हट्ट साहिब

गुरुद्वारा हट्ट साहिब सुल्तानपुर लोधी कपूरथला पंजाब – गुरुद्वारा हट्ट साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी

गुरुद्वारा हट्ट साहिब, पंजाब के जिला कपूरथला में सुल्तानपुर लोधी एक प्रसिद्ध कस्बा है। यहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के 14 वर्ष गुजारे थे। गुरु नानक देव जी के बहनोई श्री जैराम जी ने गुरु नानकदेव जी को नवाब दौलत खां लोधी के पास कर्मचारी रखवा दिया था। नवाब लोधी गुरु जी के धार्मिक आचरण तथा विवेक…

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गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी

गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी कपूरथला – गुरुद्वारा बेर साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी

गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी नामक कस्बे में स्थित है। सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला जिले का एक प्रमुख नगर है। तथा भारत के पंजाब राज्य में स्थित है। यह स्थान अपने ऐतिहासिक सिख महत्व के कारण भक्तों में काफी प्रसिद्ध है बड़ी संख्या में भक्तगण यहां दर्शन के लिए आते है। गुरुद्वारा बेर साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी - गुरुद्वारा बेर साहिब का…

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गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब चमकौर

गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी – गुरुद्वारा श्री कतलगढ़ साहिब चमकौर

गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब श्री चमकौर साहिब में स्थापित है। यह गुरुद्वारा ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। इस स्थान पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दो सुपुत्र साहिबजादा अजीतसिंह, साहिबजादा जुझार सिंह को मुगलों ने लड़ाई में शहीद कर दिया था। गुरुदारे का मुख्य दरबार साहिब काफी बड़ा बना है। बीच में पालकी साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान है। चारों तरफ परिक्रमा मार्ग…

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गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी – गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब का इतिहास

गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब, यह गुरुद्वारा रूपनगर जिले के किरतपुर में स्थित है। यह सतलुज नदी के तट पर बनाया गया है और रेलवे लाईन के पार स्थित है और यह वह स्थान है जहां कई सिख अपने मृतकों की राख को नदी में विसर्जित करने के लिए ले जाते हैं। गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी - पातालपुरी साहिब का इतिहास …

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बाबा बकाला साहिब गुरुद्वारा नौवीं पातशाही

बाबा बकाला साहिब का इतिहास – गुरुद्वारा नौवीं पातशाही की जानकारी

बाबा बकाला साहिब अमृतसर जिले का प्रमुख स्थान है। छठें पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का विवाह इसी नगर में भाई हरिचन्द्र की सुपुत्री बीबी नानकी जी के साथ हुआ था। गुरु तेगबहादुर साहिब जी गुरु गद्दी पर विराजमान होने से पहले काफी समय अपने ननिहाल नगर बकाले माता नानकी जी तथा अपनी धर्मपत्नी माता गुजरी जी के साथ यहां रहें। आप ने…

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नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकुला

नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला हरियाणा चंडीगढ़

नाड़ा साहिब गुरूद्वारा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से 5किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। नाड़ा साहिब गुरूद्वारा हरियाणा प्रदेश के पंचकूला जिले में झझर नदी के तट पर स्थापित है। गुरु गोविंद सिंह ने भंगाणी की तरफ जाते समय यहां पर कुछ दिनों तक विश्राम किया था। नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला नाड़ा साहिब गुरूद्वारे की स्थापना पटियाला के राजा द्वारा सन् 1746 में…

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गुरूद्वारा नानक झिरा साहिब के सुंदर दृश्य

नानक झिरा बीदर साहिब – गुरूद्वारा नानक झिरा साहिब का इतिहास

गुरूद्वारा नानक झिरा साहिब कर्नाटक राज्य के बीदर जिले में स्थित है। यह सिक्खों का पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थान है। यह उस पठार के किनारे से थोडी दूरी पर है, जहां बीदर स्थित है। गुरूद्वारा की रोड़ से नीचे उतरने पर मैदान के व्यापक दृश्य दिखते है। प्रति वर्ष लगभग 4-5 लाख यात्री और पर्यटक गुरूद्वारा नानक झिरा साहिब के दर्शन करने आते…

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गुरूद्वारा गुरू तेग बहादुर धुबरी साहिब के सुंदर दृश्य

धुबरी साहिब असम – श्री गुरू तेग बहादुर गुरूद्वारा धुबरी असम

गुरूद्वारा श्री तेगबहादुर साहिब या धुबरी साहिब भारत के असम राज्य के धुबरी जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित हैं। सिक्खों के प्रथम गुरू श्री गुरू नानक देव जी की याद में धुबरी में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बनाया गया था। सन् 1505 में सिक्ख धर्म के संस्थापक श्री गुरू नानक देव जी आसाम से धनपुर होते हुए, महापुरुष श्रीमन्ता शंकर देवा के…

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मुक्तसर साहिब के सुंदर दृश्य

मुक्तसर साहिब का गुरूद्वारा, हिस्ट्री ऑफ मुक्तसर साहिब

मुक्तसर फरीदकोट जिले के सब डिवीजन का मुख्यालय है। तथा एक खुशहाल कस्बा है। यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थान भी है। इसके निकट ही मांझे से आये गुरू गोबिंद सिंह जी के 40 श्रद्धालु सिक्खो ने जिन्हें चालीस मुक्ते कहा जाता है, नवाब वजीर खां की फौजों से जंग करते हुए शहीदी प्राप्त की थी। इसी पवित्र स्थान को मुक्तसर साहिब कहते है। हिस्ट्री ऑफ…

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