कुम्भज ऋषि कौन थे – कुम्भज ऋषि आश्रम जालौन

कुम्भज ऋषि

उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन की कालपी तहसील के अन्तर्गत उरई से उत्तर – पूर्व की ओर 32 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम कुरहना बसा हुआ है। इस ग्राम के विषय में यह जनश्रुति है कि कुम्भज ऋषि का आश्रम यहीं पर था।     कुम्भज ऋषि का इतिहास   महाभारत में कुम्भज ऋषि का वर्णन […]

श्री हंस जी महाराज की जीवनी – श्री हंस जी महाराज के गुरु कौन थे

श्री हंस जी महाराज

श्री हंस जी महाराज का जन्म 8 नवंबर, 1900 को पौढ़ी गढ़वाल जिले के तलाई परगने के गाढ़-की-सीढ़ियां गांव में हुआ था। उनके पिता रणजीत सिंह ने उनका नाम हंसा राम सिंह रखा। वे एक संपन्‍न किसान थे। हंसा राम सिंह की मां कालिन्दी देवी एक दयालु और धर्मशील महिला थीं। वे भगवान शिव और […]

संत बूटा सिंह जी और निरंकारी मिशन, गुरु और शिक्षा

संत बूटा सिंह जी

हिन्दू धर्म में परमात्मा के विषय में दो धारणाएं प्रचलित रही हैं- पहली तो यह कि परमात्मा निर्गुण निराकार ब्रह्म है अर्थात वह नाम, रूप और गुण रहित सर्वोच्च चेतना है तथा दूसरी यह है कि परमात्मा सगुण साकार ब्रह्म है। भारत के महानतम दृष्टाओं, संतों और गुरुओं में से एक गुरुनानक देव निराकार ब्रह्म […]

स्वामी प्रभुपाद – श्री भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी

स्वामी प्रभुपाद

हम सब लोगों ने यह अनुभव प्राप्त किया है कि श्री चैतन्य महाप्रभु की शिष्य परंपरा में आध्यात्मिक गुरु किस प्रकार प्रकट होते हैं। हमारे गुरु ने हमें यह कहकर धोखा नहीं दिया कि मैं ईश्वर हूं, मैं भगवान हूं।” इसके विपरीत उन्होंने यह सिद्ध किया कि वे प्रभु के सेवक हैं और हमें यह […]

महर्षि महेश योगी का जीवन परिचय और भावातीत ध्यान

महर्षि महेश योगी जी

मैं एक ऐसी पद्धति लेकर हिमालय से उतरा, जो मनुष्य के मन और हृदय को उन, ऊंचाइयों तक ले जा सकती है, जहां वास्तविक ज्ञान और वास्तविक मानवीय प्रकृति को पूरी तरह आत्मसात किया जा सकता है। मैं अपनी इस पद्धति को ध्यान कहता हूं, परंतु वास्तव में यह भीतर की खोज का मार्ग है। […]

ओशो (रजनीश) आध्यात्मिक पुनर्निर्माण का मसीहा

ओशो

मैं देख रहा हूं कि मनुष्य पूर्णतया दिशा-भ्रष्ट हो गया है, वह एक ऐसी नौका की तरह है, जो मझदार में भटक गयी है। वह यह भूल गया है कि उसे कहां जाना है और वह क्या होना चाहता है। इसके साथ ही मैं समुचे विश्व में एक आध्यात्मिक पुनः र्निर्माण का दर्शन भी कर […]

स्वामी मुक्तानंद जी महाराज – स्वामी मुक्तानंद सिद्ध योग गुरु

स्वामी मुक्तानंद

ईश्वर की प्राप्ति गुरु के बिना असंभव है। ज्ञान के प्रकाश से आलोकित गुरु परब्रह्म का अवतार होता है। ऐसे गुरु की दिव्य कृपा प्राप्त करने की चेष्टा करनी चाहिए। जब तक गुरु-कृपा से कुंडलिनी शक्ति जागृत नहीं होती तब तक हमारे हृदय में प्रकाश नहीं हो सकता, दिव्य-ज्ञान प्रदान करने वाला अंतर्चक्षु नहीं खुल […]

श्री महाप्रभु जी – श्री दीपनारायण महाप्रभु जी और योग वेदांत समाज

श्री दीपनारायण महाप्रभु जी

भारत में राजस्थान की मिट्टी ने केवल वीर योद्धा और महान सम्राट ही उत्पन्न नहीं किये, उसने साधुओं, संतों, सिद्धों और गुरुओं को भी जन्म दिया। ऐसे ही एक महान दिव्य पुरुष श्री दीपनारायण जी थे, जिनको उनके शिष्य महाप्रभु जी कहकर संबोधित करते थे।   श्री महाप्रभु जी का जन्म स्थान, शिक्षा और माता पिता   […]

मेहेर बाबा इन हिन्दी – मेहेर बाबा का जीवन परिचय कहानी

मेहेर बाबा

में सनातन पुरुष हूं। मैं जब यह कहता हूं कि मैं भगवान हूं, तब इसका यह अर्थ नहीं है कि मैंने इस बारे में सोचकर तय किया है कि मैं भगवान हूं। मुझे ज्ञात ही है कि मैं भगवान हूं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए यह कहना कि मैं ईश्वर […]

साईं बाबा का जीवन परिचय – साईं बाबा का जन्म कहां हुआ था

साईं बाबा

श्री साईं बाबा की गणना बीसवीं शताब्दी में भारत के अग्रणी गरुओं रहस्यवादी संतों और देव-परुषों में की जाती है। उनके अनुयायी उन्हें ईश्वर का अवतार, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और सर्वव्यापी मानते हैं। वे अपने जीवन काल में ही गाथा-पुरूष बन गये थे तथा आज भी समुचे विश्व में उनके अनुयायियों और उपासकों की संख्या में […]

संत ज्ञानेश्वर का जीवन परिचय – संत ज्ञानेश्वर महाराज की बायोग्राफी इन हिन्दी

संत ज्ञानेश्वर जी महाराज

दुष्टों की कुटिलता जाकर उनकी सत्कर्मों में प्रीति उत्पन्न हो और समस्त जीवों में परस्पर मित्र भाव वृद्धिंगत हो। अखिल विश्व का पाप रूपी अंधकार नष्ट होकर स्वधर्म – सूर्य का उदय हो, उसका प्रकाश हो और प्राणीमात्र की सदिच्छाएं पूर्ण हो। इस भूतल पर अखिल विश्व मंगलो की वर्षा करने वाले भगवद् भक्तों के […]

संत नामदेव महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत

संत नामदेव प्रतिमा

मानव में जब चेतना नहीं रहती तो परिक्रमा करती हुई कोई आवाज जागती है। धरा जब जगमगाने लगती है, तो दिव्य ज्योति सम्भूत कोई न कोई शक्ति प्रकट होती है। परिस्थितियां जब प्रतिकूल हो जाती है, तो किसी न किसी अनूकूल शक्ति के दर्शन होते है। भौतिकता जब भटक उठती है, तो अध्यात्मिकता जन्म लेती […]