Category: भारत के प्रमुख त्यौहार

नाग पंचमी कब मनायी जाती है – नाग पंचमी की पूजा विधि व्रत और कथा

श्रावण शुक्ला पंचमी को नाग-पूजा होती है। इसीलिये इस तिथि को नाग पंचमी कहते हैं। भारत में यह बडे हर्षोल्लास के साथ मनायी जाती है। इस दिन व्रत रखा जाता है।       नाग पंचमी की पूजा कैसे करे –...

रक्षाबंधन क्यों मनाते है – रक्षाबंधन पूजा विधि और रक्षा-बंधन की कथा

रक्षाबंधन:– श्रावण की पूर्णिमा के दिन दो त्योहार इकट्ठे हुआ करते है।श्रावणी और रक्षाबंधन। अनेक धर्म-ग्रंथों का मत है कि श्रावणी को ब्रह्मचारी ओर द्विजों को चाहिये कि ग्राम के समीप अच्छे तालाब या नदी के किनारे पर जाकर, उपाध्याय (गुरु)...

गंगा दशहरा का महत्व – क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा की कथा

ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को गंगा दशहरा कहते हैं। गंगा दशहरा के व्रत का विधान स्कन्द-पुराण और गंगावतरण की कथा वाल्मीकि रामायण में लिखी है। ज्येष्ठ शुक्ला दशमी सम्वतसर का सुख है। इसमें स्नान और विशेष करके दान करना चाहिये। सर्वप्रथम तो गंगा...

वट सावित्री व्रत की कथा – वट सावित्री की पूजा कैसे करते है – सवित्री सत्यवान की कहानी

ज्येष्ठ बदी तेरस को प्रातःकाल स्वच्छ दातून से दन्तधोवन कर उसी दिन दोपहर के बाद नदी या तालाब के विमल जल में तिल और आंवले के कल्क से केशों को शुद्ध करके स्नान करे ओर जल से वट के मूल का...

आसमाई व्रत कथा – आसमाई की पूजा विधि – आस माता की कहानी व आस माता का व्रत कब

वैशाख, आषाढ़ और माघ, इन्हीं तीनों महीनों की किसी तिथि में रविवार के दिन आसमाई की पूजा होती है। जो किसी कार्य की सिद्धि के लिये आसमाई की पूजा बोलता है और उसका कार्य सिद्ध होता है, वही यह पूजा करता...

हनुमान जयंती का महत्व – हनुमान जयंती का व्रत कैसे करते है और इतिहास

चैत्र पूर्णिमा श्री रामभक्त हनुमान का जन्म दिवस हैं। इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। कुछ लोग यह जन्म दिवस कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को मानते है। किन्तु अधिकतर चैत्र पूर्णिमा के ही पक्ष में हैं। हम भी यही मानते हैं। हनुमान,...

रामनवमी का महत्व – श्रीराम का जन्मदिन चैत्र रामनवमी कैसे मनाते हैं

रामनवमी भगवान राम का जन्म दिन है। यह तिथि चैत्र मास की शुक्ला नवमी को पड़ती है। चैत्र पद से चांद्र चैत्र समझना चाहिए। इसी दिन राम चन्द्र जी का जन्म हुआ था। अतः यह तिथि रामनवमी कहलाती है। रामनवमी का व्रत...

अरुंधती व्रत रखने से पराये मर्द या परायी स्त्री से नाजायज संबंध रखने के पाप से मुक्ति मिलती है

चैत्र शुक्ला प्रतिपदा को अरुंधती व्रत रखा जाता है। इस व्रत को रखने से पराये मर्द या परायी स्त्री से नाजायज संबंध रखने के पाप से मुक्ति मिलती है। अरुंधती कौन थी? अरुंधती किसकी पत्नी थी? देवी अरुन्धती कर्दम मुनि की...

बैसाखी का पर्व किस दिन मनाया जाता है – बैसाखी का त्योहार क्यों मनाया जाता है

बैसाखी सिक्ख धर्म का बहुत ही प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दिन गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की नींव डाली थी। गुरु गोविंद सिंह सिक्‍ख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु थे इसलिए उन्हें “दशमेश” भी कहा जाता है।...

बकरीद क्यों मनाया जाता है – ईदुलजुहा का इतिहास की जानकारी इन हिन्दी

बकरीद या ईद-उल-अजहा ( ईदुलजुहा) ईदुलफितर के दो महीने दस दिन बाद आती है। यह ईद चूंकि महीने की दस तारीख को मनायी जाती है, इसलिए इसका निर्णय दस दिन पूर्व ही चांद देख कर होता है। यह भी कभी गर्मी...

ईद उल फितर क्यों मनाया जाता है – ईद किस महिने के अंत में मनाई जाती है

ईद-उल-फितर या मीठी ईद मुसलमानों का सबसे बड़ा पर्व है। असल में यह रमजान के महीने के समाप्त होने की खुशी में मनाया जाता है। मुस्लिम महीने चांद के कैलेंडर से चलते हैं, इस कारण से मुस्लिम त्योहार अलग-अलग मौसमों में आते...

ईद मिलादुन्नबी कब मनाया जाता है – बारह वफात क्यों मनाते है और कैसे मनाते है

ईद मिलादुन्नबी मुस्लिम समुदाय का प्रसिद्ध और मुख्य त्यौहार है। भारत के साथ साथ यह पूरे विश्व के मुस्लिम समुदाय में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस्लाम के संदेशवाहक हजरत मुहम्मद का जन्म रबी अववल की 2 तारीख को 571 ई....

फूलवालों की सैर त्यौहार कब मनाया जाता है – फूलवालों की सैर का इतिहास हिन्दी में

अगर भारत की मिली जुली गंगा-जमुना सभ्यता, हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे के आपसी मेलजोल को किसी त्योहार के रूप में देखना हो तो दिल्ली के मेले “फूलवालों की सैर” का नाम बिना संकोच के लिया जा सकता है। भारत के अधिकतर पर्व धर्म से...

नौरोज़ त्यौहार का मेला – नवरोज त्योहार किस धर्म का है तथा मेला

नौरोज़ फारसी में नए दिन अर्थात्‌ नए साल की शुरुआत को कहते हैं। ईरान, मध्य-एशिया, कश्मीर, गुजरात और महाराष्ट्र के उन क्षेत्रों में जहां पारसी धर्म के अनुयायी रहते हैं, यह त्यौहार मार्च को मनाया जाता है। इस नौरोज़ त्यौहार या...

हजरत निजामुद्दीन दरगाह – हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह का उर्स

भारत शुरू ही से सूफी, संतों, ऋषियों और दरवेशों का देश रहा है। इन साधु संतों ने धर्म के कट्टरपन से हट कर मानवता और भाईचारे और हर संप्रदाय को एक दूसरे के साथ अमन से जिंदा रहने का प्रचार किया।...