Category: भारत के प्रमुख त्यौहार

दुर्वासा धाम मेला आजमगढ़ उत्तर प्रदेश

आजमगढ़  बहुत पुराना नगर नही है, किंतु तमसा के तट पर स्थित होने के कारण सांस्कूतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। काशी के संत-महात्मा यहां आते रहे है। यह भूमि तपस्या के लिए उपयोगी रही है। तमसा गोमती की तरह गहरी...

छेरता पर्व कौन मनाते हैं तथा छेरता नृत्य कैसे करते है

आदिवासियों जनजाति का एक अन्य पर्व है छेरता, जिसे कह्ठी-कही शैला भी कहा जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड के अलावा बिहार और मध्य प्रदेश मे भी यह पूर्ण हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह विशेष रूप से युवकों का...

डोमकच नृत्य समारोह क्यों मनाया जाता है

पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार , छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के आदिवासी जनजाति समुदाय में दशहरा, दीवाली, होली आदि अवसरों पर घसिया तथा अन्य जनजातियो द्वारा डोमकच नृत्य या डमकच नृत्य समारोह का आयोजन किया जाता है। इन समारोह मे स्त्री-पुरुष, बालक,...

जइया पूजा आदिवासी जनजाति का प्रसिद्ध पर्व

जइया पूजा यह आदिवासी जनजाति पर्व है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड का प्रमुख त्यौहार है। करमा के बाद जनजातीय पर्वो में जइया पूजा का बहुत बाहुल्य है। नवरात्र के अवसर पर जइया पूजा की तैयारी एक माह पहले...

करमा पूजा कैसे की जाती है – करमा पर्व का इतिहास

करमा पूजा आदिवासियों का विश्व प्रसिद्ध त्यौहार है। जहा भी आदिवासी है, करमा पूजा अवश्य करते है। यह पर्व भादपद की एकादशी, अनन्त चतुर्दशी के अवसर पर अनिवार्य रूप से मनाया जाता है।जो एक अनुष्ठान के रूप में चौबीस घण्टे तक...

बछ बारस पूजन कैसे करते है – बछ बारस व्रत कथा इन हिन्दी

कार्तिक कृष्णा द्वादशी को गोधूलि-बेला मे, जब गाये चर- कर जंगल से वापस आती हैं, उस समय उन गायों और बछडों की पूजा की जाती है। और दिन भर व्रत किया जाता है जिसे बछ बारस का व्रत या बछवॉछ व्रत कहते...

अहोई आठे व्रत कथा – अहोई अष्टमी का व्रत कैसे करते है

कार्तिक कृष्णा-अष्टमी या अहोई अष्टमी को जिन स्त्रियों के पुत्र होता है वह अहोई आठे व्रत करती है। सारे दिन का व्रत रखकर सब प्रकार की कच्ची रसोई विधि-पूर्वक बनाई जाती है। सन्ध्या को दीवार में आठ कोष्टक की एक पुतली...

जीवित्पुत्रिका व्रत कथा और महत्व – जीवित्पुत्रिका व्रत क्यों रखा जाता है

अश्विन शुक्ला अष्टमी को जीवित्पुत्रिका व्रत होता है। इस व्रत को जीतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत वही स्त्रियाँ करती है, जो पुत्रवती है, क्योंकि इसका फल यह बतलायां गया है कि जीवित्पुत्रिका व्रत का करने...

संतान सप्तमी व्रत कथा पूजा विधि इन हिन्दी – संतान सप्तमी व्रत मे क्या खाया जाता है

भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को संतान सप्तमी व्रत किया जाता है। इसे मुक्ता-भरण व्रत भी कहते है। यह व्रत सध्यान्ह तक होता है। मध्यान्ह को चौक पूरकर शिव-पार्वती की स्थापना करे और— हे देव! जन्म जन्मान्तर के पाप से मोक्ष पाने तथा...

हरतालिका तीज व्रत कथा – हरतालिका तीज का व्रत कैसे करते है तथा व्रत क्यो करते है

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तीज हस्ति नक्षत्र-युक्त होती है। उस दिन व्रत करने से सम्पूर्ण फलों की प्राप्ति होती है। इस व्रत को हरतालिका तीज व्रत कहते है। हरतालिका तीज व्रत के बारे में कहा जाता है कि एक...

कपर्दि विनायक व्रत – कपर्दि विनायक व्रत कैसे करते है और व्रत कथा

श्रावण मास की शुक्ला चतुर्थी से लगाकर भादों की शुक्ला चतुर्थी तक जो मनुष्य एक बार भोजन कर के एक मास पर्यन्त कपर्दि गणेश या कपर्दि विनायक का व्रत करता है, उसके सब काम सिद्ध होते है। कपर्दि विनायक व्रत की...

सिद्धिविनायक व्रत कथा – सिद्धिविनायक का व्रत कैसे करते है तथा व्रत का महत्व

गणेशजी के सम्पूर्ण व्रतों में सिद्धिविनायक व्रत प्रधान है। सिद्धिविनायक व्रत भाद्र-शुक्ला चतुर्थी को किया जाता है। पूजन के आरम्भ में संकल्प करने के बाद गणेशजी की स्थापना, प्रतिष्ठा और ध्यान करना चाहिये। ध्यान के पश्चात आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ, मधुपर्क,...

गाज बीज माता की कथा – गाज बीज माता का व्रत कैसे करते है और पूजा विधि

भाद्र शुक्ला द्वितीया को अधिकांश गृहस्थो के घर बापू की पूजा होती है। यह बापू की पूजा असल में कुल-देवता की पूजा है। इस पूजा में कच्ची रसोई बनाकर बापू देव को भोग लगाया जाता है। फिर सब उसी प्रसाद को...

हरछठ का व्रत कैसे करते है – हरछठ में क्या खाया जाता है – हलषष्ठी व्रत कथा हिंदी

भारत भर में हरछठ जिसे हलषष्ठी भी कहते है, कही कही इसे ललई छठ भी कहते है। हरछठ का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलराम जी...

कजरी की नवमी कब और कैसे मनाते है – कजरी पूर्णिमा का व्रत और कथा

कजरी की नवमी का त्योहार हिन्दूमात्र में एक प्रसिद्ध त्योहार है। श्रावण सुदी पूर्णिमा को कजरी पूर्णिमा कहते है। इसी को श्रावणी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन श्रावणी कर्म होता है और रक्षाबंधन भी होता है। किन्तु बुन्देलखण्ड की श्रावणी...