Category: भारत के पर्यटन स्थल

कालकाजी मंदिर दिल्ली का इतिहास तथा कालकाजी मंदिर खुलने का समय

कालकाजी मंदिर दिल्ली के सबसे व्यस्त हिंदू मंदिरों में से एक है, श्री कालकाजी मंदिर देवी काली को समर्पित है, जो माँ आदि शक्ति का दूसरा रूप है। इस मंदिर को जयंती पीठ या मनोकामना सिद्ध पीठ के रूप में भी...

सकराय माता मंदिर या शाकंभरी माता मंदिर सीकर राजस्थान हिस्ट्री इन हिंदी

राजस्थान के सीकर जिले में सीकर के पास सकराय माता जी का स्थान राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। मालकेत नामक पर्वतमाला यहां आकर मंडलाकार हो गई है। जिसके बीच बडे बडे आम के पेडों की शीतल छाया है...

देवगढ़ का इतिहास – दशावतार मंदिर, जैन मंदिर, किला कि जानकारी हिन्दी में

देवगढ़ उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में बेतवा नदी के किनारे स्थित है। यह ललितपुर से दक्षिण पश्चिम में 31 किलोमीटर की दूरी पर है। वहां तक पक्की सड़क जाती है। प्रतिदिन बसे जाती है। ललितपुर से देवगढ़ जाने का मार्ग इस...

लोहागर्ल धाम राजस्थान – लोहागर्ल तीर्थ जहाँ भीम की विजयमयी गदा पानी बन गई

है शौनक जी! श्री लोहागर्ल की गंगा और बदरिकाश्रम की गंगा में मुझे कोई भेद प्रतीत नहीं होता है। यह सर्वथा सत्य वचन है। यह जिस तीर्थराज की स्तुति है वह राजस्थान राज्य का प्रसिद्ध लोकतीर्थ लोहागर्ल है। यह भारत की...

गलताजी मंदिर का इतिहास – हिस्ट्री ऑफ गलताजी धाम जयपुर

नगर के कोलाहल से दूर पहाडियों के आंचल में स्थित प्रकृति के आकर्षक परिवेश से सुसज्जित राजस्थान के जयपुर नगर के पूर्व में मैदानी धरातल से 350 फीट ऊपर तथा मुख्य नगर से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर एक रमणीक तीर्थ...

लोद्रवा जैन मंदिर का इतिहास – हिस्ट्री ऑफ लोद्रवा जैन टेंपल

भारतीय मरूस्थल भूमि में स्थित राजस्थान का प्रमुख जिले जैसलमेर की प्राचीन राजधानी लोद्रवा अपनी कला, संस्कृति और जैन मंदिर के लिए पुरातात्विक विशेषज्ञों, पर्यटकों, और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। जैसलमेर से पश्चिमोत्तर दिशा में...

ओसियां का इतिहास – सच्चियाय माता मंदिर ओसियां

राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले जोधपुर में एक प्राचीन नगर है ओसियां। जोधपुर से ओसियां की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। यह स्थान सडक और रेल मार्ग दोनों से जुडा है। ओसियां अपने प्राचीन मंदिरों और स्मारकों के लिए विश्व भर में...

रानी सती मंदिर झुंझुनूं राजस्थान – रानी सती दादी मंदिर हिस्ट्री इन हिन्दी

सती तीर्थो में राजस्थान का झुंझुनूं कस्बा सर्वाधिक विख्यात है। यहां स्थित रानी सती मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां सती नारायणी के कुल में अब तक 12 सतियां हो चुकी है। सती नारायणी ही रानी सती के रूप में पूजी जाती...

गौतमेश्वर महादेव मंदिर अरनोद राजस्थान – गौतमेश्वर मंदिर का इतिहास

राजस्थान राज्य के दक्षिणी भूखंड में आरावली पर्वतमालाओं के बीच प्रतापगढ़ जिले की अरनोद तहसील से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर प्रकृति की गोद में रमणीय स्थल पर गौतमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इस मंदिर में मीणा जाति के इष्टदेव और...

केशवरायपाटन का मंदिर – केशवरायपाटन मंदिर का इतिहास

केशवरायपाटन अनादि निधन सनातन जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर भगवान मुनीसुव्रत नाथ जी के प्रसिद्ध जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र और भागवान केशवराय जी महाराज, तथा भगवान विष्णु के मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है जो राजस्थान के बूंदी जिले में चम्बल नदी के...

नाकोड़ा जी का इतिहास – नाकोड़ा जी भैरव चालीसा

नाकोड़ा जी तीर्थ जोधपुर से बाड़मेर जाने वाले रेल मार्ग के बलोतरा जंक्शन से कोई 10 किलोमीटर पश्चिम में लगभग 1500 फीट ऊंची पहाड़ियों से घिरी हुईं पवित्र घाटी के नाके पर स्थित है। इसके लगभग 7-8 किलोमीटर उत्तर में वैष्णवों...

रामदेवरा का इतिहास – रामदेवरा समाधि मंदिर दर्शन, व मेला

राजस्थान की पश्चिमी धरा का पावन धाम रूणिचा धाम अथवा रामदेवरा मंदिर राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक तीर्थ है। यह राजस्थान के जैसलमेर जिले के अंतर्गत पोखरण नामक गांव से लगभग 13 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है। यह स्थान जोधपुर...

हर्षनाथ मंदिर सीकर राजस्थान – जीणमाता मंदिर सीकर राजस्थान

भारत के राजस्थान राज्य के सीकर से दक्षिण पूर्व की ओर लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर हर्ष नामक एक छोटा सा गांव बसा हुआ हैं। इसके पास ही हर्ष नामक एक पर्वत है। यहां भगवान शिव को समर्पित हर्षनाथ मंदिर...

एकलिंगजी टेम्पल उदयपुर – एकलिंगजी टेम्पल हिस्ट्री इन हिन्दी

राजस्थान के शिव मंदिरों में एकलिंगजी टेम्पल एक महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय मंदिर है। एकलिंगजी टेम्पल उदयपुर से लगभग 21 किलोमीटर दूर उदयपुर-नाथद्वारा-ब्यावर के राजमार्ग पर स्थित है। जहाँ के लिए बस सेवा नियमित रूप से उपलब्ध है। यह राजस्थान के प्रमुख...

ऋषभदेव मंदिर उदयपुर – केसरियाजी ऋषभदेव मंदिर राजस्थान

राजस्थान के दक्षिण भाग में उदयपुर से लगभग 64 किलोमीटर दूर उपत्यकाओं से घिरा हुआ तथा कोयल नामक छोटी सी नदी के तट पर स्थित धुलेव नामक कस्बा है। यही पर मानव सभ्यता के पुराकर्ता आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का विशाल...