सोमनाथ मंदिर का इतिहास somnath tample history in hindi

भारत के गुजरात राज्य में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत का एक महत्वपूर्ण  मंदिर है । यह मंदिर गुजरात के सोमनाथ जिले के वेरावल समुद्री तट पर बना हुआ है । इस मंदिर की गिनती 12 ज्योतिलिंगों में प्रथम ज्योतिलिंग के स्थान पर होती है । इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वंय चन्द्र देव ने किया था । इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है । प्राचीन कथाओं के अनुसार चन्द्र देव ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी । चन्द्र देव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चन्द्र देव के कष्टों का निवारण किया। अत: चन्द्र देव अथार्त सोम चन्द्र ने कष्टों को दूर करने वाले प्रभु शिव की स्थापना यहाँ करवायी । कहा जाता है कि इसी से इसका नाम सोमनाथ पड गया।

लोककथाओं के अनुसार यही पर श्रीकृष्ण ने देह त्याग किया था । मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे । तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पदचिन्ह को हिरण की आंख जानकर धोखे में तीर मारा था । तब ही श्रीकृष्ण ने देह त्यागकर यही से वैकुंठ गमन किया। इस स्थान पर बडा ही सुंदर श्रीकृष्ण मंदिर बना हुआ है ।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन

 सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कई बार तोड़ा और बनाया गया है । वर्तमान में भारत की स्तंत्रता के पश्चात लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इसका निर्माण कराया और पहली दिसम्बर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
यहाँ सुबह और शाम अलग अलग रूपों में सोमनाथ के भाव भक्ति और श्रद्धापूर्वक दर्शन होते है । मंदिर प्रागंण में रात साढे सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाईट शो चलता है । जिसमें सोमनाथ मंदिर का इतिहास बड़ा ही सुंदर सचित्र वर्णन किया जाता है । समुद्री तट पर होने के कारण श्रद्धालु व पर्यटक यहाँ ऊंट व घोड़ों की सवारी करते है तथा लहरों के बीच स्नान करने का मजा भी लेते है । सोमनाथ मंदिर के अलावा यहाँ और भी बहुत मंदिर है यहाँ 10 किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 42मंदिर स्थित है  इसे मंदिरों की नगरी कहा जायें तो गलत नहीं होगा।

 

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