सुरियावां का मेला – भोरी महजूदा का कजरहवा मेला

सुरियावां उत्तर प्रदेश राज्य के भदोही जिले में एक नगर है। यहां भोरी महजूदा में हल षष्ठी व्रत के अवसर पर सावन में कजरी के बाद वाले गुरुवार को यह मेला लगता है। आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व घिनहू शर्मा नामक व्यक्ति अपने घर हमहा-हडिया से अपनी ससुराल भोरी आया। गांव की कुमारियों ने उसे कजरी गाकर सुनाने को कहा।उसने असमर्थता व्यक्त की, लेकिन युवतियों ने विनोदवश उसकी चारपाई पलट दी और स्वयं उस पर बैठ गयी। चारपाई का एक पावा उसकी गर्दन पर पड जाने के कारण उसका प्राणात हो गया। बाद मे जब युवतियों को इसकी जानकारी हुईं तो वे आवाक रह गयी। बाद में वही उसकी समाधि बनवा दी गयी। तभी से कजरी के अवसर पर इस क्षेत्र की सभी स्त्रियाँ अपने मायके “भोरी” आकर इस समाधि के पास कजरी गाती है। कहते है जो स्त्रियां नहीं आती उनका अनिष्ट हो जाता है। यहां हरेवा और चमेली नामक युवतियों की भी पूजा की जाती है, क्योकि घिनहू की समाधि पर उन्हीं ने पहली कजरी गायी थी।

 

सुरियावां का मेला
सुरियावां का मेला

 

यहां युवतियों मे कजरी-दंगल होता है जिससे मारपीट, लहू-लुहान तक हो जाता है। बीच-बचाव करके उन्हें अलग किया जाता है। एक गीत की पक्तिया है-

भोरिया के माई, महजूदवा के माई,
एक चलनी पिसान देइदे, नहीं तोर भतार मर जाई।।

 

 

सुरियावां का मेला

 

इस अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है। जो सुरियावां का मेला या भोरी महजूदा का कजरहवा मेला के नाम से जाना जाता है। सुरियावां के मेले में अनेक प्रकार की खरीदारी की दुकानें लगती है। इन दुकानों में बच्चों के खेल खिलौने, महिलाओं के सिंगार की वस्तुएं, काष्ठ शिल्प कला कके अनेक आइटम, चीनी के बर्तन, लोहे के अनेक प्रकार के उपकरण की जमकर खरीदारी होती है। खाने पीने के शौकीन लोगों के लिए सुरियावां के मेले में अनेक प्रकार के व्यंजन, चाट, कचौरी, जलेबी, टिक्की, पानी के बतासे (गोलगप्पे) आइसक्रीम, हलवा पराठा आदि स्वादिष्ट व्यंजनों की भरमार रहती है। मनोरंजन के लिए यहां छोटे बड़े झूले, सर्कस भूत बंगला, मौत का कुआं, निशाने बाजी, आदि अनेक प्रकार के मनोरंजन साधन होते है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, साफ सफाई, पानी आदि की व्यवस्था रहती है।

 

 

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