सुनील गावस्कर की जीवनी – सुनील गावस्कर प्रोफाइल इन हिन्दी

सुनील गावस्कर क्रिकेट के इतिहास में विश्व के महानतम बल्लेबाजों में से एक है। इनके पिता का नाम मनोहर गावस्कर और माता का नाम मीनल गावस्कर है। सुनील गावस्कर का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुम्बई में हुआ था। गावस्कर ऐसी शख्सियत है जो पहले बल्ले से रनों का अम्बार लगाने के कारण और बाद में पत्रकार के रूप में और उसके बाद क्रिकेट कमेंट्री के क्षेत्र में चर्चा में रहे। एक प्रारम्भिक बल्लेबाज के रूप में हर समय और हर देश में जहां गावस्कर ने उच्च स्तर की छाप छोडी वहीं भारत के सम्मान और गरिमा में भी वृद्धि की। पहली ही टेस्ट श्रृंखला में सिर्फ चार मैचों में उनके 774 रन के प्रदर्शन ने सारी दुनिया को आकर्षित किया। 6 मार्च 1971 मे उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना टेस्ट कैरियर शुरू किया और उसके 16 साल बाद 7 मार्च 1987 को अपने दस हजार रन भी पूरे कर लिए। क्रिकेट जगत को प्रतिभाशाली प्रारंभिक बल्लेबाज के आने का पता चल गया। गावस्कर के लिए 7 मार्च 1987 का दिन जितना अलौकिक, अद्वितीय और कीर्तिमान बना उतना कोई और अन्य नहीं। उनके लाखों प्रशंसकों और खुद गावस्कर के लिए यह दिन एक ऐतिहासिक दिन रहा।

सुनील गावस्कर का जीवन परिचय, बायोग्राफी इन हिन्दी

22 साल के इस लड़के ने वह कारनामा किया जो पहले नहीं हुआ था। वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों को उनके ही मैदानों पर उल्टा आक्रमण झेलना पड़ा था। गावस्कर के बल्ले से निकले चार शतक, तीन अर्द्धशतको की पारियों में जादू सा था। साधारण समझी जाने वाली भारतीय टीम ने क्रिकेट की बेहतरीन टीम वेस्टइंडीज को हथियार डालने पर विवश कर दिया। सुनील गावस्कर ने शतक के बाद शतक लगाकर इतनी तेजी से रन बनाए कि उन्होंने अपने सभी समकालीन बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया। तथा महान बल्लेबाज कहलाने का अधिकार प्राप्त कर लिया। गावस्कर के बारे में सिर्फ यही लिखना ठीक नहीं होगा। लिटिल मास्टर ने कितने रिकॉर्ड बनाएं, बल्कि यह भी लिखना होगा कि उन्होंने अपने ही कितने रिकॉर्ड तोडें। 28 दिसंबर 1983 को गावस्कर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मद्रास में अपना टेस्ट जीवन का 30 वा शतक लगाकर महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तोडा था। 1987 में टेस्ट मैचों में 10000 रन बनाकर गावस्कर ने एक और विजय प्राप्त की। और दस हजार रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बन गए।

गावस्कर ने अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से भारत की बिखरती पारी को अनेक बार संभाला है। पांच फुट साढ़े तीन इंच लम्बे गावस्कर क्रिकेट के इतिहास के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज है। गावस्कर महानतम इसलिए है कि उन्होंने 125 टेस्ट मैचों की 214 पारियों में 10122 रन दुनिया की सबसे खूंखार गेंदबाजी के खिलाफ बनाए। और पाकिस्तान के खिलाफ बंगलूरू टेस्ट में खेली गई 323 मिनटों की अपनी एक पारी के कारण सलामी बल्लेबाजों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते है।

सुनील गावस्कर
सुनील गावस्कर


भारतीय क्रिकेट में गावस्कर के आगमन के समय क्रिकेट की दुनिया में भारत सुपर पावर नहीं था। सफलता मुश्किल से मिलती थी और विदेशों में तो दुर्लभ थी। इस सबके साथ तेज गेंदबाजी खेलने की हिम्मत स्वयं गावस्कर ने की। और इसके लिए आवश्यक धैर्य, एकाग्रता, समर्पण में प्रचुर मात्रा में था। उन्होंने सत्तर अस्सी के दशक के उच्चकोटि के तेज गेंदबाजों स्नोविलिस, लिलि, सरफराज नवाज, इमरान खान, थामसन, हाग, होल्डिंग, एंडी राबर्ट्स, मार्शल, गारनर का सफलतापूर्वक सामना करने की शक्ति व क्षमता लिटिल मास्टर को दी थी। इसके अतिरिक्त गावस्कर, हॉब्स, रिचर्ड, सोबर्स, कन्हाई, वीक्स ब्रेडमैन, हेमंड और हटन की तरह भाग्यशाली नहीं थे। लेकिन गावस्कर की स्थिति निराशाजनक भी नहीं थी। क्योंकि उस समय गुंडप्पा, विश्वनाथ, वेंगसरकर, मोहिंदर अमरनाथ जैसे खिलाड़ी भी उनके साथ थे जो उनके क्रिकेट जीवन में विद्यमान थे।


युवावस्था में वे हुक व पुल शॉट लगाते थे पर बाद में टीम की आवश्यकता को देखते हुए अपने स्ट्रोक्स पर अंकुश लगा दिया। वेस्टइंडीज में गावस्कर पर कैलिप्सो गाने लिखे गए और साबर्स से विवियन रिचर्ड्स तक तमाम वेस्टइंडीज के खिलाडियों ने उन्हें दुनिया का महान बल्लेबाज माना। 1983 में मेहमान वेस्टइंडीज की श्रृंखला के दौरान गावस्कर ने बल्ले से भरपूर उत्तर दिया। दिल्ली के कोटला मैदान पर मार्शल होल्डिंग व डेनियल से युक्त तेज वेस्टइंडीजी आक्रमण के सामने उन्होंने सिर्फ 37 गेंदों पर अर्द्धशतक और 94 गेंदों पर 15 चौके व दो छक्कों की मदद से शतक पूरा कर दिखाया और ब्रैडमैन के 29 शतकों की बराबरी की।


क्रिकेट खिलाड़ी होने के अलावा सुनील गावस्कर एक अच्छे पत्रकार और समीक्षक भी रहे। कुछ अवसरों पर गावस्कर की आक्रामकताएं सीमा पार कर गई। सक्रिय टेस्ट खिलाड़ी होते हुए उन्होंने तत्कालीन क्रिकेट बोर्ड अध्यक्ष पी. एन. रूंगटा को मात्र क्रिकेट प्रशासक कह दिया था। कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि गावस्कर ने भारत के लिए अधिक मैच नहीं जीते लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा। उनके शतकों के फलस्वरूप मेलबर्न आस्ट्रेलिया, ऑकलैंड न्यूजीलैंड, चेन्नई और दो बार मुम्बई में भारत विजयी हुआ। प्रतिष्ठित मेरिली बोन क्रिकेट क्लब (एम.बी.सी.सी.) की जीवन पर्यंत सदस्यता को गावस्कर जैसे व्यक्तित्व का धनी व्यक्ति ही ठुकरा सकता है। इन सब के बावजूद गावस्कर डेढ़ दशक तक टीम के आधार स्तंभ रहे। गावस्कर का वेस्टइंडीज से पूरे कैरियर में खास रिश्ता रहा। एक वहीं थे जो वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों को बेअसर कर सकते थे। वेस्टइंडीज के विरुद्ध वे 6 बार नाबाद रहे। गावस्कर के लिए क्रिकेट मैच सिर्फ मैच नहीं धर्म युद्ध था। मैदान पर वे अभूतपूर्व आत्मनियंत्रण की मिसाल होते थे। गावस्कर के अद्भुत अनुशासन और नियंत्रण ने भारतीय क्रिकेट की बल्लेबाजी को नए आयाम दिए। आज भी वह विकटों के बीच से सबसे तेज दौडऩे वाले खिलाडियों मे से एक है। वे अंतिम क्षण तक गेंद के मूवमेंट पर नजर रखकर फिल्डिंग के गैपों का ख्याल रखते थे। सम्भवतः नए खिलाडिय़ों के लिए गावस्कर का स्टांस एक सबक है। स्वाभिमान और देश प्रेम होने के साथ साथ वे खेल में अपनी गलतियां महसूस करते थे और खेद भी प्रकट करते थे।

खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां



• वे विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक है।
• उन्होंने अनेक क्रिकेट रिकॉर्ड बनाएं।
• उन्होंने सर्वाधिक 34 शतक लगाए थे।
• सुनील गावस्कर पहले खिलाड़ी है जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दस से आधिक रन बनाएं।
• वे एकमात्र ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने तीन बार दोनों पारियों में शतक लगाएं।
• टेस्ट इतिहास में वे एकमात्र ऐसे बल्लेबाज है, जिन्होंने एक कैलेण्डर वर्ष में एख हजार रन बनाए। यह करिश्मा उन्होंने चार बार कर दिखाया।
• बारह महीनों में सर्वाधिक रन बनाने का श्रेय भी गावस्कर को है। उन्होंने 17 अक्टूबर 2978 से 13 अक्टूबर 1979 के बीच के बीच 1984 रन बनाकर रिकॉर्ड बना डाला।
• उन्हें लिटिल मास्टर के नाम से जाना जाता है।
• उन्होंने 125 टेस्ट मैच खेले जिसमें 51.12 की औसत से 10122 बनाएं, जिसमे 34 शतक, 45 अर्द्धशतक शामिल है।
• उन्होंने 108 एक दिवसीय अतंर्राष्ट्रीय मैच खेले जिनमें 3092 रन बनाएं। वन डे मैचों मे गावस्कर ने 27 अर्द्धशतक और एक शतक लगाया।
• उन्होंने सर्वाधिक शतक वेस्टइंडीज के विरुद्ध लगाए।
• उन्होंने कुल 125 टेस्ट मैच खेले तथा सर्वाधिक स्कोर 236 का रिकॉर्ड बनाया।
• उन्होंने चार बार दोहरा शतक लगाया। वेस्टइंडीज के खिलाफ 220 रन, इंग्लैंड के खिलाफ 221 रन, वेस्टइंडीज के खिलाफ 204 व 236 रन बनाएं जो उस वक्त का रिकॉर्ड है।
• उन्होंने 90 से अधिक रन भी 5 बार बनाएं, जब वह शतक बनाने से चूक गए, पाकिस्तान के विरूद्ध 97,91,96 वेस्टइंडीज के विरूद्ध 90, आस्ट्रेलिया के विरूद्ध 90 रन बनाएं।
• उनके रनों का कुल औसत 51.12 है।
• गावस्कर ने तीन बार दोनों पारियों में शतक जमाएं। वेस्टइंडीज के खिलाफ 142 व 220 रन, पाकिस्तान के खिलाफ 111 व 137 रन, वेस्टइंडीज के खिलाफ 107 व 182 रन, यह करिश्मा करने वाले वे एकमात्र खिलाड़ी है।
• एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में एक शतक व 274 अर्द्धशतक लगाकर उन्होंने 3092 रन बनाएं।
• उन्होंने प्रतिष्ठित मेरिली बोन क्रिकेट क्लब की जीवन पर्यंत सदस्यता को अस्वीकार कर दिया था।
• वेस्टइंडीज के विरूद्ध वे छः बार नाबाद रहे।

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