वियतनाम का युद्ध – वियतनाम युद्ध के कारण और परिणाम

वियतनाम का युद्ध

भारत के दक्षिण-पूर्व में एक छोटा-सा देश है वियतनाम सोशलिस्ट रिपब्लिक। 69 वर्षों तक फ्रांसीसी उपनिवेश रहने के बाद 1954 में जब यह मुक्त हुआ तो 22 वर्ष लम्बे एक युद्ध में उलझ गया। यूं तो इस युद्ध का आरम्भ इस देश का उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में दो टुकड़े करने से गृहयुद्ध के रूप में हुआ किन्तु रूस और अमरीका के बीच में कूद पड़ने से यह एक महायुद्ध में परिणत हो गया। अपने इस लेख में वियतनाम का युद्ध का उल्लेख करेंगे और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से जानेंगे:—

 

 

वियतनाम ने अमेरिका को कब हराया? वियतनाम युद्ध के कारण क्या थे? अमेरिका ने वियतनाम युद्ध में क्यों भाग लिया?
वियतनाम और अमेरिका का युद्ध कब हुआ? उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम का एकीकरण कब हुआ? किस शांति समझौते के द्वारा अमेरिका वियतनाम युद्ध समाप्त हुआ? वियतनाम युद्ध को किस अन्य नाम से जाना जाता है?

 

वियतनाम युद्ध के कारण

 

सन् 1976 मे उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम को मिला कर आज का वियतनाम सोशलिस्ट रिपब्लिक एकीकृत राष्ट्र (Unified Country) बना। इससे पहले का लगभग 100 वर्षो का वियतनाम का इतिहास वास्तव मे युद्धों का इतिहास कहा
जायेगा। इसका आरम्भ तब होता है जब 1867 में कैथोलिक मिशनरियों (Catholic Missionaries) को संरक्षण देने के बहाने फ्रांस यहां आया और उसने धीरे-धीरे 1885 तक पूरे देश को अपना उपनिवेश बना लिया। किन्ह (Kinh) कहे जाने वाले यहां के मूल वासियों ने तत्काल फ्रासीसी उपनिवेशवादियों का
प्रतिरोध शुरू कर दिया।

 

 

1940 में जापानियों ने वियतनाम पर आक्रमण कर दिया और फ्रांसीसी उपनिवेश लगभग समाप्त हो गया किन्तु जापानी आधिपत्य अधिक दिनो तक कायम नही रह सका और 1946 मे जापानी आक्रमणकारियों को पराजित होकर वहा से भागना पडा। जापानियों की इस पराजय का सबसे बडा श्रेय हो ची मिन्ह
(1892-969) को जाता हैं। देश की मुक्ति के लिए उन्होंने वियतमिन्ह (Vietminh) नामक राष्ट्रवादी गुरिल्ला सैनिक दस्तों का गठन किया। उन्होंने वियतनाम कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना भी की जो आज देश की शासक पार्टी है और बाद में वह उत्तरी वियतनाम के राष्ट्रीध्यक्ष भी बने।

 

 

जापानी आक्रमणकारी तो भाग गये किन्तु फ्रांसीसी उपनिवेशवादियों ने देश के दक्षणी हिस्से पर अपना आधिपत्य सुदृढ कर लिया। यही नहीं, फ्रांसीसियों ने उत्तरी हिस्से पर भी अपना आधिपत्य करने की कोशिश शुरू कर दी। उनकी यह कोशिश सफल नही हुई और वियतमिन्ह गुरिल्ला दस्तों ने 1954 मे दियेन वियेन फू (Dien Bien Phu) नामक स्थान पर उन्हें करारी हार दी।

 

 

अन्ततः जैनेवा में दोनो पक्षों के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते के अन्तर्गत 17वें पैरेलल पर वियतनाम को उत्तरी और दक्षिणी, दो हिस्सों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया। उत्तरी वियतनाम मे ही ची मिन्ह के नेतृत्व में कम्युनिस्ट सरकार गठित हुई और दक्षिणी वियतनाम मे न्‍गो दिन्ह दियेम (Ngo Dinh Diem) के नेतृत्व में राष्ट्रवादी सरकार। उत्तरी वियतनाम की सरकार देश को एकीकृत (Unified) करने की हिमायती थी तो दक्षिणी वियतनाम की सरकार इसकी घोर विरोधी। जेनेवा समझौते के बाद फ्रासीसी सेनाए दक्षिणी वियतनाम से पूरी तरह वापस बुला ली गयी लेकिन उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम के शासकों का वैचारिक मतभेद और विरोध बढता ही गया। यह विरोध इस कारण से भी अधिक तीव्र होता गया क्योंकि दक्षिणी वियतनामियों में ऐसे लोगो की संख्या काफी बडी थी जो देश के विभाजन के विरुद्ध रहे थे। इसके अलावा, दक्षिणी वियतनाम मे कम्युनिस्ट भी सक्रिय थे और उत्तरी वियतनाम के साथ उनकी स्वाभाविक सहानुभूति थी। वे दक्षिणी वियतनाम मे पश्चिमी ढंग की पूंजीवादी व्यवस्था की स्थापना के विरोधी थे।

 

वियतनाम का युद्ध
वियतनाम का युद्ध

 

वही दूसरी ओर, उत्तरी वियतनाम में कम्युनिस्ट शासन होने के कारण, उसे रूस और चीन का समर्थन प्राप्त था। दोनो ही देश उसे भारी आर्थिक तथा सैनिक सहायता दे रहे थे। उत्तरी वियतनाम ने दक्षिणी वियतनाम के कम्युनिस्टों द्वारा गठित सरकार विरोधी वियतकांग (Vietcong) गुरिल्ला दस्तों को सैनिक सहायता देनी शुरू कर दी। उत्तरी वियतनामी सेनाएं भी दक्षिणी वियतनाम की सीमाओं में घुसपैठ करती रही। दक्षिणी वियतनाम की दियेम सरकार के लिए इस स्थिति का सामना करना कठिन होता गया। इसलिए गुरिल्ला आक़्रमण का मुकाबला करने और कम्यूनिस्टों के विरोध को कुचलने के लिए दियेम को अमरीका के साथ 1961 में एक सन्धि करनी पडी, जिसके तहत अमरीकी ने सैनिक सहायता दी। इस युद्ध में अमरीका की रुचि का एक कारण रूस के वर्चस्व को तोडना भी था। वह दक्षिणी वियतनाम मे कम्युनिस्टों की सरकार नहीं बन देना चाहता था। इसलिए उसने आर्थिक और सामरिक दृष्टि से दक्षिणी वियतनाम की खुलकर सहायता की किन्तु दो ही वर्ष बाद 1963 में दियेम के सहयोगियों ने ही दियेम की हत्या करके उसकी सत्ता को पलट दिया और 1967 मे न्यूयन वांन थियू (Nguyen Van Thieu) को दक्षिणी वियतनाम का राष्ट्रीध्यक्ष बनाया गया। उसने दक्षिणी वियतनामी सरकार को कुछ सुव्यवस्थित रूप दिया किन्तु
वियतकांग का दमन नहीं कर सका।

 

 

अमेरिका ने युद्ध मे सम्मिलित होने के बाद 1965 मे दक्षिणी वियतनाम में उत्तरी वियतनाम के सैनिक दलों पर जवाबी हमला किया। 1968 तक 5,45,000 अमरीकी सैनिक वियतनाम पहुंच चुके थे और भारी संख्या में लगातार आ रहें थे।फिर भी वियतकांग की शक्ति को रोक पाना मुश्किल हो रहा था। इस स्थिति में अमरीका के लिए वियतकांग से समझौते की बातचीत करना ही सही था। यह तभी हो सकता था जब उत्तरी वियतनाम की कम्यूनिस्ट सरकार भी समझौते के लिए तैयार हो, क्योंकि वियतकांग को उसका भरपूर समर्थन प्राप्त था। फलत: 1968 के प्रारम्भ में इस शर्त पर समझौते के लिए दोनों पक्ष तैयार हो गये कि यदि अमरीका युद्ध बंदी की घोषणा कर दे तो समझौता हो सकता है। परिणामस्वरूप 10 मई, 1968 को पेरिस में उत्तरी वियतनाम और अमरीका मे समझौते के लिए बातचीत शुरू की गयी। बातचीत सफल नहीं हुई और युद्ध जारी रहा।

 

 

1969 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निकसन ने युद्ध से अपने सैनिकों को हटाने की घोषणा कर दी और युद्ध की बागडोर दक्षिणी वियतनामी शक्तियों के सुपूर्द कर दी। अमरीकी सैनिकों द्वारा अन्तिम रूप से वियतनाम छोडने के कुछेक महीनों बाद तक युद्ध कम्बोडिया तथा लाओस, इत्यादि पडोसी देशों तक फैल चुका था। अन्तत 27 जनवरी 1973 को अनेक प्रयासों के बाद युद्ध विराम की घोषणा कर दी गयी। यद्यपि युद्ध विराम की घोषणा कर दी गयी थी किन्तु 1975 मे अमरीकी सैनिको की दखलंदाजी ने फिर से युद्ध को लौ दी। विश्व के लगभग सभी देशो ने अमरीका के इस कदम की कडी निंदा की। यहां तक कि अमरीकी संसद मै भी इस युद्ध का विरोध किया गया तथा अमरीकी लोगो ने वियतनाम की आजादी के समर्थन मे आवाजे बुलन्द की।

 

 

1975 के आरम्भ में वियतनाम के युद्ध ने एक निर्णायक मोड लिया। उत्तरी वियतनाम की फौजों तथा दक्षिणी वियतनाम के राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चे ने दक्षिणी वियतनामी सरकार की अमरीका समर्थित सेना को बुरी तरह नष्ट करना शुरू कर दिया। फलत: स्वतन्त्रता के लिए छटपटा रही वियतनामी सेना के भयंकर युद्ध के सामने अप्रैल, 1975 से अमरीकी सैनिको ने वहा से भागना शुरू कर दिया। अमरीकी सैनिको के जाने के बाद युद्ध समाप्त हो गया और दक्षिण वियतनाम मे एक अस्थायी क्रांतिकारी सरकार (Provisional Revolutionary Government) गठित की गयी। अप्रैल, 1976 में राष्ट्रीय स्तर पर आम चुनाव कराये गये और इसके फलस्वरूप जुलाई, 1976 मे उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को मिलाकर संयुक्त वियतनाम के गठन का निर्णय लिया गया।

 

 

वियतनाम युद्ध का परिणाम

 

इस युद्ध की समाप्ति के साथ ही विभाजित वियतनाम एक अखण्ड और स्वतन्त्र देश बना। इस युद्ध में 55,000 अमरीकियों सहित लाखों वियतनामी मारे गये और अपार क्षति हुई। इस युद्ध से यह भी सिद्ध हुआ कि वैचारिक मतभेद के कारण रूस और अमरीका कहीं भी शक्ति-परीक्षण कर सकते हैं। यही नहीं, दोनो
देशों की ओर से अनेक नये रासायनिक तथा सामरिक महत्त्व के हथियार भी काम में लाये गये। इससे विश्व मे चल रहे मुक्ति आंदोलनो को बल मिला

 

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