यू एफ ओ क्या है – उड़न तश्तरी का रहस्य – एलियन की खोज

यू एफ ओ की फुल फॉर्म है अनआइडेटीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेफ्ट्स यानी उड़न तश्तरी, उड़न तश्तरी या यू एफ ओ का रहस्य इस परमाणु युग का महानतम रहस्य है। मानव दिन रात अंतरिक्ष पर जाने के सपने देखता रहता है। क्‍या अंतरिक्षवासी भी इसी भांति पृथ्वी पर आते है? इसी प्रश्न के साथ जुडी है उड़न तश्तरियों को देखे जाने की अनगिनत घटनाएं।

 

 

अमेरिकी वैज्ञानिकों की काडन कमेटी ने काफी जांच-पड़ताल करके उड़न तश्तरियों की धारणा को एकदम तर्कहीन और निराधार बताया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हमारे सौरमंडल में अपार्थिव जीवन के चिह्न ही मौजूद नहीं है तब कोई अपार्थिव शक्ति अपने यान मे बैठकर पृथ्वी पर कैसे आ सकती है? परंतु दूसरे पक्ष का कहना है कि अंतरिक्ष मे कई आकाश गंगाएं है और कई सौर-मण्डल है। क्या गारंटी है कि यू एफ ओ का आगमन किसी दूसरे सौरमंडल से नहीं हो सकता?

 

यू एफ ओ की खोज

 

विश्व के 133 देशों से 70000 ऐसी रिपोर्ट मिल चुकी है जिनमें दावा किया गया है कि वहा अनआइडटीफाइड फ्लाइग ऑव्जक्टस (UFO) देखे गए है। इन 70000 रिपार्टो में से 95 प्रतिशत घटनाए जांच-पड़ताल करने पर विमानों, मौसम के गुब्बारों, बिजली चमकने, रॉकेटों, पक्षियों और कीटों से संबंधित निकली लेकिन अभी भी 5 प्रतिशत रिपार्टे रहस्यमय बनी हुई है। इन्ही 5 प्रतिशत घटनाओं के रहस्य पर पड़ा पर्दा उठने से ही सारा विश्व उड़न तश्तरियों या यू एफ ओ के रहस्य से परिचित हो सकेगा।

 

 

सन 1978 के अंतिम दिन आधी रात के बाद इसी रहस्य से संबंधित एक ऐसी घटना घटी जिसे रडार, कैमरा और टेपरिकॉर्डर जैसे वैज्ञानिक यंत्रो द्वारा रिकार्ड किया जा सका। इसी सबूत के कारण यू एफ ओ आज अफवाबाजों व अंधविश्वासीयों या उत्सुकता से भरे सामान्य नागरिकों का ही नही वरन् वैज्ञानिक चेतना से सम्पन्न लोगों की चिंता का विषय बन हुआ है। न्यूज़ीलैंड के दक्षिणी द्वीप के पूर्व में एक आर्गोसी कार्गो विमान मे मलबोन टेलीविजन दल के 3 सदस्यों ने वेलिंगटन (Wellington) और क्राइस्टचर्च (Christchurch) के बीच हवाई मार्ग पर उड़ते हुए आधी रात के ठीक बाद कुछ विचित्र रोशनिया को देखा। ये रोशनियां चमकदार थी और जल-बुझ रही थी। ठीक इसी समय वेलिंगटन के राडार ने कुछ अनजानी छवियो को अपनी स्क्रीन पर दिखाया। इन रोशनिया मे से एक रौशनी ने तो कुछ मिनट तक विमान का पीछा किया। जब यही वायुयान वापस लौटा तो 10 मील की दूरी से एक अन्य रौशनी उसकी तरफ बढ़ने लगी। यान मे बैठे हुए एक टीवी पर एक क्रूमेन (Crewman) के अनुसार यह प्रकाश आधार में चमकदार तथा शीर्ष पर पारदर्शक गोले की तरह था।

 

 

 

बहरहाल इन रोशनियों को न केवल टीवी दल ने और विमान के दो चालको ने देखा वरन् विमान के हवाई रडार ने भी पकड़ा। इन सबसे अधिक उत्तेजित करने वाला तथ्य यह था कि इन रोशनियों तथा उनमें छिपी हुई वस्तुओं की फिल्म उतार ली गई थी। 16 मिमी के 23 हजार फ्रेमों से युक्त यह फिल्म उसी टीवी दल ने उतारी। अमेरिकी नैवी के ऑप्टिकल फिजिसिस्ट डा. ब्रूस मैयकाबी (Dr. Bruce meccabe) ने जब इस फिल्म को देखा तो उन्हे उड़ती हुई रहस्यमय वस्तुओं की एक लघु श्रृंखला दिखाई पड़ी। इन फिल्मों ने आधार में चमकदार तथा शीर्ष में पारदर्शक गोले वाले व्यक्तव्य को सही साबित कर दिया। इनसे यह भी पता चला कि इन रहस्यमय वस्तुओं से 700000 वाट का शक्तिशाली प्रकाश छूट रहा था तथा इनका उड़न मार्ग छल्ले बनाते हुए आगे बढ़ने का था। फिल्मों से अनुमान लगाया गया कि इनमे से एक वस्तु 60 से 100 फुट के दायरे जितनी विशाल थी। एक ऐसी वस्तु भी देखी गई जो उड़ते समय पहले पीले-सफेद चमकदार रंग का गोलाकार बनाती तथा फिर पीले और लाल रंग का तिकोना आकार बनाती थी। यदि ये वस्तुएं अंग्रेजी के आठ के आकार में छल्ला बनाते हुए उड़ रही थी तो इनकी गति का अनुमान 3000 मील प्रति घंटा लगाया गया है। इन वस्तुओं से निकलने वाली ध्वनियों को भी राडार के माध्यम से रिकार्ड किया गया था।

 

यू एफ ओ
यू एफ ओ

 

उडने वाली अजनबी वस्तुओं यानि यू एफ ओ को देखे जाने का इतिहास बहुत पुराना है। बताया जाता है कि कालम्बस ने अपने जहाज़ साता मारिया पर खड़े होकर नई दुनिया के क्षितिज पर 20वी शताब्दी की शुरुआत में सयकत राज्य अमेरिका के मध्य पश्चिम आकाश पर देखा था। फरिश्त इजकील (Ezekiel) द्वारा भी इस तरह की वस्तुओं को देखे जाने का वर्णन बाईबल में मिलता है।

 

 

सन्‌ 1968 में इन विश्वासों अंधविश्वासों को सबसे ज्यादा बल प्रदान किया एरिक वान डनिकेन (Erich wan deniken) की पुस्तक चेरियटस ऑप गाॅड ने। डेनिकेन ने अपनी पुस्तक में इन वस्तुओं को अंतरिक्ष से आए हुए अपार्थिव लेकिन अधिक योग्य व्यक्तियों के यान के रूप में परिभाषित किया तथा दावा किया कि मिस्र के पिरामिड तथा सुमेरी सभ्यता जैसी महान रचनाए बिना अपार्थिव लोगों की मदद से नही हो सकती थी।

 

 

आधुनिक युग मे पहली बार सन्‌ 1947 में कैनथ आर्नोल्ड (Kenneth Arnold) नामक व्यापारी और अनुभवी पायलट ने यू एफ ओ को देखा था। आर्नोल्ड उस समय अपने व्यक्तिगत विमान में उडान भर रहा था कि उसने चमकती हुई तश्तरियों जैसी वस्तुओं को तीर की तेजी से आसमान में उड़ते हुए देखा। अखबारों ने अर्नोल्ड के इस अनुभव को सुर्खियों में छापा। और अगले दिन सभी जगह उड़न तश्तरियों की धूम मच गई। इसके बाद विश्व के विभिन्न कोनों से कितने जाने वाले ऐसे दावों का तांता लग गया। कुछ लोगों ने तो अंतरिक्ष से आया हुआ पार्दर्शी शूट पहने सात फुट का जीव भी देखा। और कुछ लोगों ने तीन तीन फुट के अंतरिक्ष बोनो को देखे जाने का भी दावा किया। राष्ट्रपति आइजनहावर के काल में तो यह दावा किया जाता था कि अमेरिकी सरकार ने तीन अंतरिक्ष वासियों (ऐलियन) को गिरफ्तार कर लिया है। और खुद राष्ट्रपति एलियन से मिले। कुछ लोग इस दावे पर आज भी विसवास करते हैं।

 

 

यू एफ ओ से संबंधित सबसे लम्बी और विश्वसनीय प्रतीत होने वाली शोध अमेरिकी वायुसेना ने अर्जित की। इसे ऑपरेशन ब्लू बुक या प्रॉजेक्ट ब्लू केनाम से जाना जाता है। यह शोध बीस वर्ष तक चली और इसके सलाहकार थे खगोल भौतिकी के प्रोफेसर डा. जे. ऐलन हाइनक। डा. हाइनक ने पहले तो लंबे अरसे तक यू एफ ओ के अस्तित्व पर विश्वास नहीं किया पर सन् 1960 में उन्होंने कहा कि यू एफ ओ की घटनाओं की वैज्ञानिक जांच पड़ताल होनी चाहिए। इस मार्ग में अन्य वैज्ञानिकों ने भी हाइनक का साथ दिया।

 

 

आज इन वैज्ञानिकों के प्रयासों से इवास्टन इलिनोइ (Evasto Illinois) मे यू एफ ओ के अध्ययन के लिए एक केन्द्र खोला गया। जिसके जिसके डारेक्टर हाइनक को बनाया गया। डा. हाइनक ने लंबे अध्यन के उपरांत यू एफ ओ देखने की घटनाओं को तीन भागों में बांटा। ये तीन भाग है— क्लॉज एनकाउटम ऑफ फर्स्ट काइंड, सेकेंड काइंड तथा थर्ड काइंड। पहले प्रकार के एनकाउंटर (भिड़ंत) उन्हें कहा गया जिनमें यू एफ ओ को निकट से देखा भर गया तथा कोई शारीरिक संपर्क ने होने पर भी दर्शक पर उस घटना का भावनात्मक प्रभाव पड़ा। इस प्रकार का एक उल्लेखनीय एनकाउंटर 17 अप्रैल सन् 1966 को आहिआकी पाण्डे काउटी के डिप्टी शरिए सापुर के साथ हुआ। उन्हानें एक मकान जितनी बडी शीर्ष पर गुम्बदाकार तथा बैंगनी सफेद प्रकाश छोड़ने वाली उड़न तश्तरी को अपनी कार से 70 मील तक 105 मील प्रति ‘घंटा की रफ्तार से पिछा किया। इसमें सापुर की मदद अन्य पुलिस जनों ने भी की तथा इसे रेडियो द्वारा मांनिटर भी किया गया।

 

 

 

7 अगस्त सन् 1970 को प्रातः 11:30 इथियोपिया के एक ग्राम सालाडेयर (Saladare) पर से एक चमकती हुई गेंद नीचे उड़ते हुए विमान जितनी भयानक आवाज करते हुए गूजरी जिससे ग्राम के घर, पत्थर के पुल, वृक्ष घ्वस्त हो गए। आस्फाल्ट तथा धातु के बर्तन पिघल गये परंतु कोई आग नही लगी। इसे दूसरे प्रकार का क्लाज एनकाउंटर कहा गया। इस तरह के कई एनकाउण्टर की रिपोर्ट मिल चुकी है, जिनमे यू एफ ओ द्वारा व्यक्तियों तथा उनकी चीजों पर विध्वसात्मक प्रभाव डालने के बारे में बताया गया हैं। एक तो ऐसी रिपोर्ट भी मिली है जिनमें दशकों की बिमारियों व घावों पर यू एफ ओ ने ठीक करने वाला प्रभाव डाला।

 

 

 

तीसरी तरह का एनकाउण्टर इन दोनों से भी विचित प्रतीत होता है। इस श्रणी मे केवल व ही घटनाए आती है जिनमें अंतरिक्ष से आए हरे-नीले रंग के हयूमनाइड (Humanoids) को देखने तथा स्वयं भी उड़न तश्तरियों में अंतरिक्ष यात्रा करने के लिए जाने का दावा किया गया हो। अंतरिक्ष यात्रा की शैखी बघारने वाले महाशय से जब पूछा गया कि वह वापसी में अपने साथ कोई निशानी छुपा कर क्यों नहीं लाए तो वह बहाना बनाने लगे कि उन्हें तो ह्यूमनाइड ने अपहरण कर लिया था।

 

 

 

मजे की बात यह है कि जिस देश में से तीसरे तरह के एनकाउण्टर की रिपोर्ट मिली है उन पर उस दश के मिथकों और सांस्कृतिक विशिष्टता की छाप अवश्य अंकित है। फ्रासीसी दर्शक अंतरिक्ष वासियों को देखकर उत्सुकता से उनकी ओर लपकता है अमेरिकी डर के मारे उन पर गाली चला बठते है तो पापुआ न्यूगिनी का पादरी उन्हें हाथ हिला कर विदाई देता है। कुछ वैज्ञानिकों ने यू एफ ओ को ब्लैकहॉल के अनसुलझे रहस्य से जोड़ने की चेष्टा भी की है।

 

 

 

सन 1978 में फ्रांसीसी सरकार द्वारा गठित 4 सदस्यीय टीम ने जिनमें एक मनोवैज्ञानिक भी शामिल था। ग्यारह यू एफ ओ घटनाओं की जांच की और पाया कि 11 में से 10 दर्शकों को वास्तव में कोइ ऐसी चीज दिखाई दी थी जो उन के ज्ञान से हवा में उड़ती थी। सन्‌ 1960 में अमेरिका के वैज्ञानिकों के एक दल ने 50 लाख डालर की लागत से यूं एफ ओ के रहस्य की जांच करनी प्रारम्भ की। इस दल के नेता डा. एडवड यू काडन (Edward U Cordon ) थे। काडन कमेटी की रिपोर्ट ने साफ तौर से कहा है कि यू एफ ओ के अस्तित्व के बारे में कोई ठोस वैज्ञानिक तथ्य नही मिल सका है। डा हाइनक ने इस रिपोर्ट को सही नही माना और आरोप लगाया कि इस कमेटी ने अपार्थिव परिकल्पना (Extraterrestrial hypothesis) की जांच करने के बजाय यू एफ ओ के वास्तविक हाने या न हाने की जांच शुरू कर दी। फ्रांसीसी शोधकर्ता जैक वेली (Jacques velle) ने एक कम्प्यूटर विशेषज्ञ तथा खगोल विज्ञान के अध्यक्षता के रूप में लिखी अपनी पुस्तक ‘पासपोट टु मंगोनिया (Passport to magonia) में तीमरे तरह के क्लाज एनकाउंटरों तथा प्रत्येक संस्कृति के मिथकों के अंतर संबंधों की विवेचना करके कहा है कि प्राचीन काल मे हम देवताओं की कल्पना किया करते थे और आज अतरग्रहीय कल्पना करते हैं तथा अत्यधिक सामाजिक दबाव के काल में लोगों के मानस से इस तरह की कल्पनाओं का उद्गम होता हैं।

 

 

 

अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है की यू एफ ओ ने तो अंतरग्रहीय अंतरिक्ष यान है और न ही हमारी धरती की कोई असामान्य विशेषता है। या तो सामान्य वस्तुओं को देखकर भ्रम हो जाना मानव मस्तिष्क की भ्रमहीन सामूहिक विक्षिप्तता तथा जानबूझकर मारी गई गप का दूसरा नाम है। कार्डन कमेटी के अध्यक्ष डॉ काडन के अनुसार उड़न तश्तरियों के बारे में प्रकाशित करने वाले प्रकाशकों तथा पढ़ाने वाले अध्यापकों को कानून लगाकर उन व्यवसायों से बाहर कर देना चाहिए। लेकिन इस सब खंडन के बाद भी आज भी यू एफ ओ देखें जाने की खबरें लगातार आ रही है। इन पर लिखे गए उपन्यास, कहानियों व बनाई गई फिल्मों की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है कि हमारे सौरमंडल में कोई अपाथिव जीवन उपस्थित नहीं है। लेकिन फिर भी कुछ वैज्ञानिकों का दावा है कि उड़न तश्तरी हमारे सौरमंडल से नहीं तो किसी और सौरमंडल से आती है। इस दावे से यू एफ ओ का रहस्य और भी गहरा जाता है।

 

 

 

 

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