Alvitrips – Tourism, History and Biography

Touris place, religious place, history, and biography information in hindi

महाराजा अभय सिंह का इतिहास और जीवन परिचय

महाराजा अभय सिंह जोधपुर

सन् 1724 में अभय सिंह जी जोधपुर राज्य की गद्दी पर बिराजे। गद्दी पर बैठते समय आपको बादशाह महमदशाह की ओर से राज राजेश्वर की पदवी मिली। नागोर की जागीर इस समय अमर सिंह जी के पौत्र इन्द्र सिंह जी के अधिकार में थी। पर इस समय से वह भी बादशाह ने अभय सिंह जी को दे दी। महाराजा अभय सिंह जी ने नागोर बखत सिंह जी को दे दी और इन्द्र सिंह जी को भी एक दूसरी जागीर दे दी। सिरोही के राव जी और आपके बीच अनबन हो गई थी। अतएवं आपने युद्ध करके उन्हें हराया।

 

महाराजा अभय सिंह जोधपुर का इतिहास और जीवन परिचय

 

सन् 1726 में दिल्ली के पास मराठों और मुगलों के बीच जो लड़ाई हुई थी उसमें मुगलों की ओर से आप सम्मिलित थे। इस युद्ध में मराठों को हारना पड़ा। इस समय मुगल बादशाहत बड़ी कमजोर हालत में थी, अतएवं सन् 1730 में अवध और दक्षिण के सूबेदार स्वतंत्र बन बेठे। गुजरात के सूबेदार सर बुलन्द खाँ ने भी इसका अनुकरण किया। महमदशाह ने अभय सिंह जी को गुजरात का सूबेदार नियुक्त कर दिया। अतएवं आपने अपने भाई बखत सिंह के साथ गुजरात पर चढ़ाई कर दी। अहमदाबाद के पास सरबुलंद खाँ के साथ आपका मुकाबला हुआ। पाँच दिन तक लड़ाई जारी रही।

 

महाराजा अभय सिंह जोधपुर
महाराजा अभय सिंह जोधपुर

 

अन्त में सर बुलंद खां को हार माननी पड़ी। जब उसने हार मंजूर कर ली तो अभय सिंह जी ने उसे सकुशल दिल्ली लौट जाने दिया । वहां जाकर उसने फिर से झूठी सच्ची बातें बनाकर महमदशाह का विश्वास प्राप्त कर लिया। महमदशाह ने उसे फिर काश्मीर का सूबेदार बना दिया। इस युद्ध में अभय सिंह जी को खूब लूट का सामान मिला। इस लूट का कुछ सामान अभी तक जोधपुर के किले में मौजूद है। इसके एक साल बाद बाजीराव पेशवा गुजरात पर चढ आये। वे बड़ोदा तक आ गये थे पर अभय सिंह जी ने उन्हें वहाँ ही से वापस लौट जाने को बाध्य किया। अभय सिंह जी एक दीर्घकाल तक गुजरात में रहे। हम ऊपर कह आये हैं कि अभय सिंह जी को आनंद सिंह जी नामक एक छोटे भाई थे। पहले इन्हें कोई जागीर नहीं मिली हुई थी अतएव अभय सिंह जी की अनुपस्थिति में इन्होंने मारवाड़ में लूट-खसोट शुरू कर दी थी। अभय सिंह जी बुद्धिमान थे अतएवं आपने उन्हें ईडर का शासक नियुक्त कर झगड़े का फैसला कर दिया।

 

 

इसी बीच बखत सिंह जी और बीकानेर के तत्कालीन महाराजा जोरावर सिंह जी के बीच खरबूजी नामक जिले के लिये झगड़ा उत्पन्न हो गया। इस में बखत सिंह जी सफल हुए और उन्होंने खरबूजी जिले को अपने राज्य में मिला लिया। अपने भाई का पक्ष लेकर अभय सिंह जी ने भी बीकानेर पर चढ़ाई कर दी। जोरावर सिंह जी ने इसका प्रतिकार किया और कहा कि जिस खरबूजी जिले के लिये यह झगड़ा हुआ है वह तो में पहले ही बखतसिंहजी को दे चुका हूँ। जब किसी प्रकार अभय सिंह जी युद्ध बन्द करने को तैयार नहीं हुए तब जोरावर सिंह जी ने जयपुर नरेश जयसिंह जी को अपनी सहायतार्थ बुला लिया। जयसिंह जी ने तुरन्त जोधपुर पर चढ़ाई कर दी। अभय सिंह जी बीकानेर छोड़ जोधपुर लौटने को बाध्य हुए। अब अभय सिंह जी ने अपने भाई बखत सिंह जी को अपनी सहायता के लिये बुलाया। बखत सिंह जी ने जयपुर पर चढ़ाई कर दी। वे अजमेर के पास गगवाना नामक स्थान तक आ पहुँचे।

 

 

इस स्थान पर जयपुर वालों से इनका मुकाबला हुआ। पहले तो जयपुर वाले भूखे शेर की तरह बखत सिंह जी की सेना पर टूट पड़े। उन्होंने बखत सिंह जी की तमाम सेना को करीब करीब घास-मूली की तरह काट डाला। बखत सिंह जी के पास सिर्फ 60 आदमी मुश्किल से रह गये थे। इन्ही 60 आदमियों को लेकर बखत सिंह जी अब जयपुर के निशान की तरफ झपटे। उन्होंने अपनी सारी शक्ति इस ओर लगा दी।जयपुरियों के पाँव उखड़ गये। बखत सिंह जी के गले में विजय माला पड़ी। इस प्रकार केवल मुट्ठी भर आदमियों की सहायता से बखत सिंह जी ने जयपुर की विशाल सेना को परास्त कर दिया। अभय सिंह जी ने इस सहायता के बदले अनेकानेक धन्यवाद दिये और साथ ही इस प्रकार की अदूरदर्शिता के लिये भी बहुत कुछ भला बुरा कहा।

 

 

गगवाना के युद्ध के बाद राणाजी ने बीच में पड़कर जयपुर और
जोधपुर वालों के बीच शांति स्थापित करवा दी। इसी साल अर्थात 1738 में नादिरशाह ने हिन्दुस्थान पर हमला किया था। सन् 1747 में सम्राट्‌ महमदशाह का देहान्त हो गया। महमदशाह के बाद अहमद शाह दिल्ली का सम्राट हुआ। इस नवीन सम्राट ने बखत सिंह जी को गुजरात का सूबेदार नियुक्त किया। सन् 1748 में 24 वर्ष राज्य कर अभय सिंह जी ने अपनी इहलोक यात्रा संचरण की। आप बड़े पराक्रमी एवं युद्ध-विद्या में पारंगत थे। जिस युद्ध में आप सम्मिलित हो जाते थे उसमें आपकी विजय निश्चित थी। आपके रामसिंह नामक एक मात्र पुत्र थे।

 

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढ़े:—-

 

 

महाराजा गंगा सिंह
महाराजा डूंगर सिंह की मृत्यु के बाद महाराजा गंगा सिंह जी बीकानेर राज्य के सिंहासन पर विराजे। महाराजा गंगा सिंह का Read more
महाराजा डूंगर सिंह बीकानेर राज्य
महाराजा सरदार सिंह जी की पुत्रहीन अवस्था में मृत्यु होने से बीकानेर का राज्य-सिंहासन सूना हो गया। इसी कारण से Read more
महाराजा सरदार सिंह बीकानेर
महाराजा रत्नसिंह जी के स्वर्गवासी हो जाने पर सन् 1852 में उनके पुत्र महाराजा सरदार सिंह जी बीकानेर राज्य के सिंहासन Read more
महाराजा रत्नसिंह बीकानेर
महाराजा सूरत सिंह जी के परलोकवासी होने पर उनके पुत्र महाराजा रत्नसिंह जी बीकानेर राजसिंहासन पर विराजमान हुए। आपके सिंहासन पर Read more
महाराजा सूरत सिंह बीकानेर राज्य
महाराजा राजसिंह के दो पुत्र थे। महाराजा सूरत सिंह की माता की इच्छा राजसिंह के प्राण हरण कर अपने पुत्र Read more
महाराजा अनूप सिंह
महाराजा कर्ण सिंह जी के तीन पुत्रों की मृत्यु तो उपरोक्त लेख में बतलाये मुताबिक हो ही चुकी थी। केवल Read more
महाराजा कर्ण सिंह बीकानेर
महाराजा रायसिंह के स्वर्गवासी हो जाने घर उनके एक मात्र पुत्र महाराजा कर्ण सिंह जी पिता के सिंहासन पर विराजमान Read more
महाराजा रायसिंह बीकानेर
स्वर्गीय कल्याणमल जी के पश्चात उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराजा रायसिंह जी बीकानेर राज्य के राज सिंहासन पर बैठे। आपके शासन-काल Read more
राव बीका जी जोधपुर राज्य के संस्थापक
बीकानेर राज्य के शासक उस पराक्रमी और सुप्रिसिद्ध राठौड़ वंश के है, जिसके शौर्य साहस और रणकौशल का वर्णन हम Read more
महाराजा किशन सिंह भरतपुर रियासत
भरतपुर के महाराजा श्री विजेन्द्र सवाई महाराजा किशन सिंह जी बहादुर थे। आपको लेफ्टनेट कर्नल की उपाधि प्राप्त थी। आपका Read more
महाराजा जसवंत सिंह भरतपुर रियासत
महाराजा बलवन्त सिंह जी के बाद उनके पुत्र महाराजा जसवंत सिंह जी भरतपुर राज्य के राज्य सिंहासन पर बिराजे। इस Read more
महाराजा रणजीत सिंह भरतपुर राज्य
महाराजा केहरी सिंह जी के बाद महाराजा रणजीत सिंह जी भरतपुर राज्य के राज्य सिंहासन पर अधिष्ठित हुए। इनके समय में Read more
महाराजा जवाहर सिंह भरतपुर राज्य
स्वर्गीय राजा सूरजमल जी के पाँच पुत्र थे, यथा:- जवाहर सिंह, ताहर सिंह, रतन सिंह, नवल सिंह, और रणजीत सिंह। Read more
राजा सूरजमल भरतपुर राज्य
राजा सूरजमल का जन्म सन् 1707 में भरतपुर में हुआ था। राजा बदन सिंह की मृत्यु के बाद राजा सूरजमल Read more
राजा बदन सिंह
ठाकुर बदन सिंह चूडामन जाट के भतीजे थे। ये आमेर जयपुर के सवाई राजा जयसिंहजी के पास बतौर ( Feudatory cheif) Read more
महाराजा उम्मेद सिंह जोधपुर
महाराजा सुमेर सिंह जी के कोई पुत्र न था अतएवं आपके भाई महाराजा उम्मेद सिंह जी जोधपुर की गद्दी पर सिंहासनारूढ़ Read more
महाराजा सुमेर सिंह जोधपुर
महाराजा सरदार सिंह जी के स्वर्गवासी होने के पश्चात्‌ महाराजा सुमेर सिंह जी जोधपुर के राज्यासन पर बिराजे। जिस समय आप Read more
महाराजा मानसिंह जोधपुर
महाराजा भीम सिंह जी के बाद सन् 1804 में महाराजा मान सिंह जी गद्दी पर बिराजे। आप महाराजा भीम सिंह Read more
महाराजा अजीत सिंह राठौड़ मारवाड़
महाराजा जसवंत सिंह जी की मृत्यु के समय उनकी जादमजी ओर नारुकीजी नामक दो रानियाँ गर्भवती थीं। अतएव कुछ समय Read more
महाराजा जसवंत सिंह राठौड़ मारवाड़
सन् 1638 में महाराजा जसवंत सिंह जी मारवाड की गददी पर विराजे। आपका जन्म सन् 1626 में बुरहानपुर नामक नगर Read more
राव उदय सिंह राठौड़ मारवाड़
राव उदय सिंह राठौड मारवाड़ के राजा थे, इनका जन्म 13 जनवरी 1538 को जोधपुर में हुआ था। यह राव मालदेव Read more
राव रणमल राठौड़
राव रणमल जी, राव चूडाजी के ज्येष्ठ पुत्र थे। एक समय राव चूडाजी ने इनसे कह दिया था कि ‘मेरे Read more
राव जोधा जी राठौड़
राव रणमल जी के 26 पुत्र थे। इन सब में राव जोधा जी बड़े थे। राव जोधा जी बड़े वीर Read more
राव सातल देव राठौड़
राव सातल देव जी राठौड़ मारवाड़ के राजा थे। ये वीर महाराजा राव जोधा जी के पुत्र थे। इनकी माता Read more
राव सुजा जी राठौड़ का चित्र उपलब्ध नहीं
राव सातल जी के याद राव सुजा जी सन् 1491 में गद्दी पर बिराजे। सुजा जी को नाराजी नामक पुत्र Read more
राव मालदेव राठौड़
राव मालदेव राठौड़ का जन्म 5 दिसंबर सन् 1511 को जोधपुर में हुआ था। 9 भी सन् 1532 को यह जोधपुर Read more
सवाई माधोसिंह द्वितीय
सवाई माधोसिंह द्वितीय जयपुर  के राजा थे। सवाई माधोसिंह द्वितीय का जन्म 29 अगस्त सन् 1861 को हुआ था। इन्होंने Read more
सवाई रामसिंह द्वितीय
सवाई जयसिंह जी तृतीय के बाद उनके पुत्र सवाई रामसिंह जी जयपुर की गद्दी पर बिराजे। इस समय सवाई रामसिंह जी Read more
महाराजा सवाई जगत सिंह जी
सवाई प्रताप सिंह जी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जगत सिंह जी जयपुर राज्य की गद्दी पर गद्दी नशीन हुए। Read more
महाराज सवाई प्रताप सिंह जी
सवाई प्रताप सिंह जी जयपुर राज्य के महाराजा थे। महाराजा सवाई प्रताप सिंह का जन्म 2 दिसंबर सन् 1764 ईस्वी को राजस्थान Read more
सवाई पृथ्वी सिंह द्वितीय
सवाई पृथ्वी सिंह द्वितीय जयपुर के राजा थे, महाराजा पृथ्वी सिंह जी का जीवन काल 1762 से 1778 बहुत ही अल्प Read more
सवाई माधोसिंह प्रथम
सवाई माधोसिंह जी जयपुर के महाराज थे, इनको सवाई माधोसिंह प्रथम के नाम से जाना जाता है, क्योंकि आगे चलकर इसी Read more
महाराज सवाई जयसिंह जी
भारत  में ऐसे कई परम-कीर्तिशाली नृपति हो गये है जिन्होंने मनुष्य-जाति के ज्ञान के विकास में-विविध प्रकार के विज्ञान के Read more
महाराजा जयसिंह जी
महासिंह जी के बाद महाराजा जयसिंह जी आमेर के सिंहासन पर बिराजे। इन्होंने आमेर के लुप्त गौरव को फिर प्रकाशमान Read more
राजा मानसिंह जी
राजा मानसिंह आमेर के कच्छवाहा राजपूत राजा थे। उन्हें ‘मानसिंह प्रथम’ के नाम से भी जाना जाता है। राजा भगवन्तदास इनके Read more
महाराणा फतह सिंह जी
महाराणा सज्जन सिंह जी के बाद महाराणा फतह सिंह जी सन 1885 में उदयपुर राज्य के राजसिहासन पर बिराजे। आपका जन्म Read more
महाराणा प्रताप सिंह
सन्‌ 1572 में महाराणा प्रताप सिंह जी मेवाड़ के महाराणा हुए। इस समय महाराणा के पास न तो पुरानी राजधानी Read more
महाराणा विक्रमादित्य
महाराणा विक्रमादित्य महाराणा सांगा के पुत्र थे, और महाराणा रतन सिंह द्वितीय के भाई थे, महाराणा रतन सिंह द्वितीय की Read more
महाराणा रतन सिंह द्वितीय
महाराणा संग्रामसिंह (सांगा) के बाद उनके पुत्र महाराणा रतन सिंह द्वितीय राज्य-सिंहासन पर बैठे। आपमें अपने पराक्रमी पिता की तरह Read more
महाराणा सांगा
महाराणा सांगा का इतिहास जानने से पहले तत्कालीन परिस्थिति जान ले जरूरी है:– अजमेर के चौहानों, कन्नौज के गहरवालों और Read more

write a comment

%d bloggers like this: