नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला हरियाणा चंडीगढ़

नाड़ा साहिब गुरूद्वारा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से 5किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। नाड़ा साहिब गुरूद्वारा हरियाणा प्रदेश के पंचकूला जिले में झझर नदी के तट पर स्थापित है। गुरु गोविंद सिंह ने भंगाणी की तरफ जाते समय यहां पर कुछ दिनों तक विश्राम किया था।

 

नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला

 

नाड़ा साहिब गुरूद्वारे की स्थापना पटियाला के राजा द्वारा सन् 1746 में की गई थी। नाड़ा साहिब रूबाना
गुरू गोविंद सिंह के भक्त थे। गुरु गोबिन्द सिंह ने उनको आशीर्वाद देते हुए कहा था कि यह स्थान भविष्य में नाड़ा साहिब के नाम से जाना जायेगा।

 

 

नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला
नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकुला

 

गुरूद्वारे का मुख्य दरबार साहिब 100×60 लम्बा चौडा दो मंजिला संगमरमर के पत्थरों से निर्मित है। बीच में संगमरमर के सिंहासन पर पर पालकी साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विराजित है। चारों तरफ परिक्रमा मार्ग है। परिक्रमा मार्ग सुन्दर श्वेत पत्थरों से सज्जित है। गुरूद्वारे के मुख्य द्वार पर कड़ाह प्रसाद का वितरण निरंतर होता रहता है।

 

 

 

 

गुरूद्वारे का क्षेत्रफल5 एकड़ है। गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा अतिथि गृह का संचालन किया जा रहा है जिसमें 180 कमरे एवं 5 बड़े हाल है। यहां पर निःशुल्क 24 घंटे लंगर चलता है। गुरूद्वारा मंजी साहिब पिंजौर, गुरूद्वारा बाग शहीदी सेक्टर44 ए चंडीगढ़, गुरूद्वारा सिमरनसर साहिब चंडीगढ़ का संचालन भी इसी प्रबंधक कमेटी द्वारा किया जाता हैं। इसका संचालन शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी अमृतसर द्वारा किया जाता है।

 

 

नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला
नाड़ा साहिब गुरूद्वारा

 

वर्ष में यहां का मुख्य पर्व पूर्णमासी है। अन्य सभी गुरूनानक जयंती एवं सभी दस गुरूओं की जयंती मनाई जाती है। गुरूद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा सभी पर्वों का आयोजन उत्साह पूर्वक किया जाता है। गुरूद्वारा प्रातः 4 बजे खुलकर रात्रि 11 बजे बंद होता है। सामान्य दिनों में 3 से 4 हजार रविवार को लगभग 10 से 20 हजार तथा प्रतयेक पूर्णमासी को लगभग तीन से चार लाख एवं सम्मपूर्ण वर्ष में लगभग 70-80 लाख भक्त यहां दर्शन के लिए आते है।

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