नथुला पास विश्व का सबसे अधिक ऊचांई पर स्थित ए टी एम

प्रिय पाठको पिछली पोस्टो मे हमने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलो दार्जिलिंग, कलिमपोंग, मिरिक तथा कर्सियोंग जैसे प्रसिद्ध व खुबसूरत पर्यटन स्थलो की सैर की और उसके बारे में विस्तार से जाना। इस पोस्ट मे हम भारत के राज्य सिक्किम के नथुला पास या नथुला दर्रा की सैर करेगे और उसके बारे में विस्तार से जानेगें ।

भारत के राज्य सिक्किम की राजधानी गंगटोक से मात्र 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नथुला पास एक खुबसूरत व रमणीक स्थल है। यह एक दो देशो का सीमांत क्षेत्र  तथा व्यापारीक मार्ग है। यहां पर भारत की सीमा समाप्त होती है। और चीन के तिब्बत स्वायत प्रदेश की सीमा आरम्भ होती है।

नथुला पास के सुंदर दृश्य
नथुला पास के सुंदर दृश्य

1962 मे भारत चीन युद्ध के बाद नथुला पास को बंद कर दिया गया था बाद मे भारत चीन के बीच कुछ व्यापारिक समझोतो के बाद 2006 मे इस दर्रे को दोबारा खोल दिया गया। अभी भी नथुला पास केवल भारतीय पर्यटको के लिए सप्ताह मे चार दिन बुद्धवार, बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार को खुला रहता है। नथुला दर्रा जाने के लिए भारतीय पर्यटको को टूरिज्म एंड एवियशन डिपार्टमेंट का परमिट लेना अनिवार्य है जो गंगटोक मे किसी भी रजिस्टर्ड ट्रेवल्स एजेंसी से प्राप्त किया जा सकता है। विदेशी पर्यटको को नथुला पास जाने की अनुमति नही है। नथुला दर्रा विश्व का सबसे अधिक ऊचाई पर स्थित दर्रा है। यहां पर विश्व का सबसे अधिक ऊचाई पर स्थित ए टी एम है। पर्यटक यहां बर्फ से ढकी चोटियो के सुंदर दृश्यो के साथ साथ बर्फ से अठखेलियो करने का आनंद उठा सकते है।

नथुला पास
सबसे अधिक ऊचाई पर एटीएम
नथुला पास के दर्शनीय स्थल- nathula pass tourism

छांगु झील-छांगु लेक:- गंगटोक से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह खुबसूरत झील नथुला पास जाने वाले मार्ग पर पडती है। छांगु लेक की समुन्द्र तल से ऊचाई 12210 फुट है। यह झील लगभग एक किलोमीटर लम्बी है। सर्दियो मे यह झील पूरी तरह जम जाती है। इस झील के किनारे पर्यटक कुछ शुल्क देकर याक की सवारी का आनंद भी ऊठा सकते है। इस झील का वास्तविक नाम सोमगो(tsomgo) है स्थानिय भाषा मे इसे छांगु झील कहते है।
कर्सियोंग बाजार के बीचो-बीच चलती ट्रेन

बाबा मंदिर:- पास के रास्ते मे बाबा मंदिर भी दर्शनीय है। यह मंदिर नथुला पास के करीब शहीद हुए सैनिको की याद मे बनवाया गया है। यहां के सैनिको का मानना है कि बाबा आज भी उनकी सुरक्षा के लिए अपनी डयूटी पर तैनात है। और मुसिबत मे फंसे सैनिको की रक्षा करतें है। स्थानिय लोगो का मानना है कि इस मंदिर मे मांगी गई हर मुराद पुरी होती है।

कैसे पहुचे

हवाई मार्ग:- यहा से निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा है

सडक मार्ग:- नाथुपास गंगटोक से सडक मार्ग से जुडा है।

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