दुनिया का सबसे पहला शहर कौन सा था – दुनिया का सबसे प्राचीन शहर

दुनिया का सबसे पहला शहर कौन-सा था?– 5000 वर्ष पूर्व के शानदार सुमेरियन शहरों को लम्बे समय तक विश्व की पहली शहरी सभ्यता का प्रतीक माना जाता रहा। नई खोजों से यह तथ्य प्रकाश में आया है कि सुमेरियन शहरों से बहुत पहले ही विश्व में शहरी सभ्यता थी शुरूआत हो चुकी थी।जेरिको, कैटस हुयुक तथा लेपेस्ंकि वी के खंडहरों से मिलने वाले प्रमाण पुकार पुकार कर कह रहे है कि पहली शहरी सभ्यता हाल की नहीं वरन् प्राचीन पाषाण युग की देन भी हो सकती है। इन तीनों नगरों में सबसे पुराना नगर प्रतीत होता है- जेरिको जिसका बाइबल में भी जिक्र आया है। अब सारे विश्व को इन तीन नगरों के वासियों तथा यहां की सभ्यता के बारें मे सभी जानकारियां मिलने का इंतजार है। प्रश्न यह है कि क्या जेरिको से भी अधिक पुराने नगरों के खण्डहर हमारी धरती के नीचे दबे पड़े हैं?

 

 

दुनिया का सबसे पहला शहर कौन सा था?

 

पिछले कुछ वर्षो तक यह माना जाता था कि दुनिया का पहला शहर 5000 वर्ष पूर्व सुमेरियन (Sumerian) सभ्यता के दौर में निर्मित हुआ था अथात्‌ ट्रिगरिस (Tigris) तथा इयुफ्रट्स (Euphrates) नदियों के बीच स्थित मध्य-पूर्व के क्षेत्र में जिस बबीलोनिया (Babylonia) के नाम से जाना जाता है। यह कहा जाता था कि उर (Ur) उरुक (Uruk) इरिडु (Eridu), लागाश (Lagash) निप्पुर (Nippur) तथा अन्य सुमरी शहरों से ही सभ्यता की शुरूआत हुई थी क्योंकि इससे पहले का इतिहास लिखित अवस्था में मोजूद नहीं मिलता।

 

 

 

हाल ही में हुई कुछ नई खोजों से इस धारणा पर प्रश्न-चिह्न लग गया है। पुरातात्विक खोजों ने यह साबित करना प्रारम्भ कर दिया है कि सुमेरियन सभ्यता द्वारा बसाए गए शहर ही विश्व के प्रथम शहर नही थे वरन्‌ उससे भी पहले प्रागैतिहासिक युग में इस तरह के शहर मौजूद थे, जो आधुनिक विद्वानों द्वारा प्रस्तुत की गई शहर की परिभाषा तथा शर्तो पर खरे उतरते हैं। ये शर्ते है एक ही जगह रहना, निवासियों द्वारा विशिष्ट कला-कौशल तथा आपसी रीति-रिवाज विकसित करना, आस-पास के क्षेत्रों पर खाद्य के लिए निर्भर रहना सामुदायिक या सार्वजनिक भवनों की रचना अर्थात्‌ उपयुक्त मात्रा में संसाधन तथा श्रमशक्ति व एक निश्चित आकार की बस्ती।

 

हमारे इस लेख में आप निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर जानेंगे

  • दुनिया का सबसे पहला शहर कौन सा था?
  • दुनिया का सबसे प्राचीन शहर कौन सा था?
  • दुनिया की सबसे पहली बस्ती कौनसी थी?
  • विश्व का प्रथम शहर कौन सा था?
  • विश्व का सबसे प्राचीन शहर कौन सा है?
  • दुनिया का सबसे पुराना शहर कौन सा है?
  • विश्व का सबसे पुराना शहर कौन सा है?
  • दुनिया के सबसे पहले शहर की खोज किसने की?
  • दुनिया के सबसे पहले शहर का रहस्य क्या है?
  • दुनिया का सबसे पहला शहर कैसा होता था?
  • विश्व के सबसे पहले शहर के घर कैसे होते थे?
  • दुनिया के सबसे पहले शहर में लोग कैसे रहते थे?

 

प्रागैतिहासिक काल से संबंधित शोध द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत प्रारम्भ हुए। नाभिकीय शोधों में कार्बन-14 द्वारा प्राचीन वस्तुओं की आयु पता लगाने की तकनीक का पता लगाया और यह साबित हो गया कि मानव अपनी वर्तमान शक्ल-सूरत मे 30,000 वर्ष से बिना कोई परिवर्तन किए धरती पर मोजूद है। इस खोज से यह भी स्पष्ट हो गया कि मानव सभ्यता का इतिहास 5,000 वर्ष की सीमा पर नही रुक सकता। वह ओर भी पुराना है। इसी कारण से सुमेरियन शहरों से भी ज्यादा पुराने शहरों को खोजने की कोशिशें प्रारम्भ हुई। इस प्रक्रिया मे जो तीन प्रमुख शहरों के चिह्न मिले, वे हैं जेरिको (Jericho) केटल हयुक (Catal Huyuk) तथा लंपिस्की वीर (Lepenski vir) लेकिन इन प्राचीन शहरो के खण्डहरो के प्राप्त हो जाने से एक नया रहस्यमय प्रश्न खडा हो गया है कि क्या इससे भी ज्यादा पुराने शहर धरती के गर्भ मे मौजूद हैं?।

 

 

 

बाइबिल की ‘बुक ऑफ जाशुआ’ (Book of Joshua’s) में जेरिको शहर का मिथकीय चित्रण किया गया है। जोर्डन (Jordan) पार करने से पहले ही हजरत मूसा का देहांत हो चुका है। मूसा के अनुयायी जोशुआ ने इजरायल के लागो का रेगिस्तान पार करने में नेतृत्व किया। इस धर्म पुस्तक में बताया गया है कि पश्चिम की तरफ जाने वाले उनके गस्त मे ही जेरिको शहर पड़ता था जिसकी दीवारों को जोशुआ के अनुयायियों ने ध्वस्त कर डाला तथा पूरे शहर की जनसंख्या को तलवार से मौत के घाट उतार दिया।

 

 

 

दुनिया का सबसे
दुनिया का सबसे

 

 

पूरी एक शताब्दी तक जोशुआ के क्रोध का शिकार हुए इस शहर को जमीन खोद कर निकालने की कोशिश चलती रही लेकिन कुछ नही मिला लेकिन सन्‌ 1952 से 1958 के बीच अंग्रेज पुरातत्वशास्त्री डा कैथलीन कीनियन,(Kathleen Kenyon) द्वारा टेल एस सुल्तान (Tell Es Sultan) नामक जगह पर कुछ ऐसी दीवार पाई गई है, जिनकी आयु ईसा से 7000 वर्ष पूर्व मानी गई है। इतिहास के अनुसार इजराइलियों ने अपना प्रसिद्ध संग्राम 1400 से 1250 ईसा पूर्व लडा था। स्पष्ट है कि जोशुआ ने जिस नगर को धूल-धूसरित किया था वह पहले से ही 5000 वर्ष पुराना था।

 

 

 

जेरिको की खोज के बाद सन्‌ 1961 में एक अन्य ब्रिटिश पुरातत्वशास्त्री ने तुर्की मे अनातालियन (Anatolian) पठार के दक्षिणी सिरे पर ईसा से 6250 वर्ष पूर्व की एक बस्ती खोज निकाली, जिसका नाम केटल हुयुक है और जिसे एक प्रमुख
पुरातात्विक खोज माना जा रहा है। सन्‌ 1965 में युगोस्लाविया में दानुबे (Danube river) नदी के दक्षिणी किनारे पर की गई खुदाई में लेपिस्की वीर नामक शहर खोज लिया गया, जिसकी आयु 5000 ईसा पूर्व आंकी गई है।

 

 

 

पुरातत्वशास्त्री अभी तक इन नई खोजों को (New Stone Age) नव पाषाण युग की संस्कृति के विकास की पूर्व निर्धारित श्रेणियों में नही फिट कर पाए है लेकिन अब उनके लिए और भी नई-नई खोजों की संभावनाओं के द्वार खुल गए है। विशेष रूप से केटल हुयुक काफी गम्भीर पुरातात्विक खोजों का केन्द्र बना हुआ है। जबकि अभी तक इस शहर का केवल एक छोटा-सा ही हिस्सा बाहर निकाला जा सका है। कैटल हुयुक का एक शहर के रूप मे विकास 6250 ईसा पूर्व से 5400 ईसा पूर्व तक हुआ माना गया है। जेरिको के खण्डहरो मे केवल कुछ दीवारें तथा कुछ हड्डियां ही मिली थी लेकिन हुयुक की खुदाई मे एक सच्चे शहरी समुदाय तथा सुविकसित अर्थव्यवस्था व गहन धार्मिक व कलात्मक जीवन के प्रमाण मिले हैं।

 

 

 

इसके विपरीत युगोस्लाविया में मिला लेपिस्की वीर नामक शहर नव पाषाण युग का नही वरन्‌ पुरा पाषाण युग का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसा लगता है कि इस शहर को बसाने वाले पुरा पाषाण युग के शिकारी तथा मछेरे रहे होंगे। प्रारम्भ मे तम्बू लगा कर रहने तथा बाद मे भवन निर्माण करने की शैली के बीच की संक्रमण कालीन शैली का प्रतीक लगने वाला लेपिस्की वीर यह बताता है कि शहरी संस्कृति न केवल नव पाषाण युग मे मौजूद थी वरन्‌ उससे भी पहले पुरा पाषाण युग में भी उसका अस्तित्व था।

 

 

 

जेरिको, केटल हुयुक तथा लेपिस्की वीर में से जेरिको सबसे पुराना प्रतीत होता है अब देखना यह है कि ये तीनों शहर अपने चरम उत्कर्ष काल में कैसे लगते होंगे? इन तीनों शहरों के अलग-अलग विकास के बीच कोई सम्पर्क सूत्र कायम करना कठिन है। मृत सागर (Dead sea) के उत्तरी सिरे पर स्थित एक घाटी के एक मरूद्यान (Oasis) में जेरिको शहर की स्थापना हुई थी। जबकि कैटल हुयुक 3 हजार फुट की ऊंचाई पर कारसाम्वा के (Carsamba cay river) नदी के किनारे एक गेंहू के उपजाऊ मैदान के केन्द्र में स्थित था। लेपिस्की वीर की भौगोलिक स्थिति बाल्कन (Balken) तथा कार्पोथियन (Carpathian) पहाड़ियों के बीच दानुबे नदी के करीब घोड़े की नाल के आकार की छोटी सी घाटी मे पाई गई है। तीनों शहरों में एकमात्र जो समान बात पाई गई है- वह है पानी दी मौजूदगी।

 

 

 

ये तीनों शहर आकार में बहुत बड़े नही थे। लेपिस्की वीर तो केवल 185 गज लम्बा तथा 55 गज चौड़ा था। उसमे ज्यादा से ज्यादा 2 सौ से 3 सौ तक लोग रहते थे। जेरिको जिस ‘टैल एस सुल्तान’ पहाड़ी पर स्थित था, वह केवल 284 गज लम्बी तथा 175 गज चौड़ी है। समझा जाता है कि ईसा से 7000 वर्ष पूर्व यह शहर 10 एकड़ मे फैला होगा और इसमें 2 हजार से 3 हजार के बीच लोग रहते होगे।

 

 

 

कैटल हुयुक के आकार के बारे मे अभी कुछ कहना उचित नही होगा क्योंकि अभी तक केवल 492 गज लम्बा टीला खोद कर इस शहर का एक हिस्सा ही निकाला जा सका है। संभावना यह है कि इसमें 6000 से 10,000 लोगों की बसावट थी। 5000 वर्ष पहले के सुमेरियन शहरों की जनसंख्या तथा आकार को देखते हुए ये शहर बहुत छोटे प्रतीत होते हैं लेकिन इनके स्थापत्य की विविधता आश्चर्यचकित कर देती है।

 

 

 

जेरिको के खण्डहरों से पता चलता है कि उस युग के लोग आयताकार घरों को मिट्टी की मुखाई ईंटों द्वारा तथा चूने के प्लास्टर का फर्श व दीवारों पर लगा कर बनाते थे। उनके पूर्वज इधर-उधर घूमने वाले घुमक्कड़ कबीले थे। जब ये कबीले भटकते-भटकते थक गए होगे, तब उन्होने ने एक जगह बसने की ठानी होगी। उसी के फलस्वरूप जेरिको की बस्ती का अस्तित्व में आना प्रारम्भ हुआ होगा।

 

 

 

कैटल हुयुक के घरों में दरवाजे नही होते थे परंतु घर एक दूसरे से जुड़े रहते थे और छत के रास्ते से ही उनमें घुसा या उसमें से निकला जा सकता था। आत्मरक्षा का यह तरीका बहुत प्रभावशाली था क्योंकि अपने 2000 वर्ष के इतिहास में इस नगर को आक्रमणकारी कभी ध्वस्त नही कर पाए। इस शहर मे सड़क नही थी। लोग छतों पर ही चलते-फिरते थे। छतों को लकड़ी की सीढ़ियों से आपस में जोड़ दिया गया था। आक्रमणकारी के आने पर सीढ़ियां हटायी जा सकती थी। घरों में अधिकांशतः दो कमरे बनाए जात थे। 20×13 का पहला मुख्य कमरा तथा दूसरा छोटा कमरा भण्डारण के लिए। इन घरों पर हर साल प्लास्टर की नई परत चढ़ाई जाती थी।

 

 

लेपिस्को वीर के घर आधुनिक तरीके से अलग-अलग बनाए जाने वाले घरों के पूर्वज लगते है। उनका आकार तम्बुओं जैसा था। लकड़ी की दीवारों पर पशुओं की खाल की छतरी तान कर ये घर बनाए गए थे। झोपड़ियों से थोडे बेहतर लगने वाले इन घरों में चुना-पत्थरो तथा बलुआ-पत्थरों का भी प्रयोग किया गया था।

 

 

 

जेरिको और कैटल हुयुक में हमें कई सार्वजनिक भवन मिलते है लेकिन लेपिस्की वीर में केवल एसे चार मकान मिलते है जिन्हें मंदिर का नाम भी दिया जा सकता है। हुयुक में मिलने वाले शिल्पों से जाहिर है कि वहा के समाज में महिलाओं का खास स्थान था आर कृषि की प्रधानता थी। मात्र देवी इस शहर की सर्वोच्च पूजनीय देवी थीं। इस नगर के लोगों को मलेरिया निमोनिया तथा साधिशाथ जैसी बीमारियां भी होती थी। लेपिस्की वीर के निवासी एक अधिक कठोर व आदिम व्यवस्था के अधीन रहते थे। वहा व्यक्ति पूर्ण रूप से समूह के अधीन था। केटल हुयुक में मिलने वाले हथियार और जवाहरात इस बात का प्रमाण है कि वहा के निवासियों ने एक स्तर की तकनीकी कुशलता भी हासिल कर ली थी। इन तमाम खोजों और जानकारियों के हासिल हो जाने के बाद भी एक रहस्य अभी भी खुलना शेष है कि इन प्राचीनतम शहरों और सुमेरी सभ्यता के महान शहरों के
बीच की अवधि में शहरी सभ्यता का विकास कैसे हुआ था?।

 

 

 

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