दिल्ली शहर और एन.सी.आर क्षेत्र की धूल भरी, गर्म और भाग-दौड की जिंदगी से अक्सर हम इतना परेशान हो जाते है, कि सोचते है कि काश कोई तो ऐसी जगह हो जहां इन सबसे छुटकारा मिल सके। और तब हम सोचते है, ऐसी जगह पर घूमने जाने के बारे में, जहां वातावरण शांत हो, चारो तरफ मन को शांत करने वाले दृश्य हो, और ठंडी हवा के झौके हों, और जब ऐसी किसी जगह घूमने की बात चलती है तो सबसे पहले हम दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन की तलाश करते है।

 

 

दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन, दिल्ली के पास हिल स्टेशन, दिल्ली के आसपास अच्छे वातावरण वाले मानोरम दृश्यों से भरपूर पर्यटन स्थल, दिल्ली से 1-2 दिन की यात्रा वाले पर्यटन स्थल, दिल्ली से एक दो दिन की यात्रा पर कहां जाए। दिल्ली से कम समय की यात्रा वाले हिल स्टेशन, आदि विषय दिमाग में रखते हुए, हम कम से कम समय खर्च करके किसी अच्छे हिल स्टेशन की तलाश मे रहते है।

 

दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन के सुंदर दृश्य
दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन के सुंदर दृश्य

 

 

 

यदि आप दिल्ली के नजदीक वाटफॉल, या दिल्ली से कम दूरी पर वाटफॉल की तलाश कर रहे है तो आप हमारा यह लेख पढ़ें:—-

दिल्ली के पास वाटफॉल

 

दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन या दिल्ली से कम दूरी वाले हिल स्टेशन तलाशने के पिछे हमारा मुख्य कारण ऑफिस का व्यस्त कार्यक्रम, बच्चों के स्कूल की छूट्टी न होना, और भी अन्य कई कारण होते है। जिनकी वजह से हम दिल्ली से कम दूरी वाले हिल स्टेशनों की तलाश करते है

 

 

यदि आप भी दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन या दिल्ली से कम दूरी के किसी हिल स्टेशन की तलाश कर रहे है तो हमारा यह लेख आपके लिए ही है। अपने इस लेख मे हम दिल्ली के नजदीक और दिल्ली से कम दूरी वाले अच्छे हिल स्टेशनों की सूची और उनके बारे मे विस्तार से नीचे बता रहे है। हमारे द्वारा सुझाए गए इन हिल स्टेशनों पर आप दिल्ली से 1-2 दिन की अच्छी यात्रा का आनंद उठा सकते है। और समय की बचत करते हुए दिल्ली की गर्मी और भागदौड भरी जिंदगी से अलग कुछ सकून भरे पल गुजार सकते है।

 

 

दिल्ली के नजदीक हिल स्टेशन

 

 

सन्‌ 1572 में महाराणा प्रताप सिंह जी मेवाड़ के महाराणा हुए। इस समय महाराणा के पास न तो पुरानी राजधानी
महाराणा उदय सिंह जी ईस्वी सन्‌ 1440 में मेवाड़ के राज्य सिंहासन पर बिराजे। यहाँ यह बात स्मरण रखना चाहिये
महाराणा विक्रमादित्य महाराणा सांगा के पुत्र थे, और महाराणा रतन सिंह द्वितीय के भाई थे, महाराणा रतन सिंह द्वितीय की
महाराणा संग्रामसिंह (सांगा) के बाद उनके पुत्र महाराणा रतन सिंह द्वितीय राज्य-सिंहासन पर बैठे। आपमें अपने पराक्रमी पिता की तरह
राणा सांगा और बाबर का युद्ध सन् 1527 में हुआ था। यह राणा सांगा और बाबर की लड़ाई खानवा में
महाराणा सांगा का इतिहास जानने से पहले तत्कालीन परिस्थिति जान ले जरूरी है:-- अजमेर के चौहानों, कन्नौज के गहरवालों और
राणा मोकल के बाद उनके पुत्र महाराणा कुम्भा ने मेवाड़ के गौरवशाली राज्य-सिंहासन को सुशोभित किया। मेवाड़ के जिन महापराक्रमी
रावल जैत्रसिंह मेवाड़ के राजा मंथनसिंह के पौत्र और पद्मसिंह के पुत्र थे। प्राचीन शिलालेखों में जैत्रसिंह के स्थान पर
राजा महेन्द्र के बाद उनके पुत्र कालभोज, (बप्पा रावल का मूल नाम) जो बप्पा रावल के नाम से प्रसिद्ध हैं,
मध्य भारत में भोपाल रियासत प्रथम श्रेणी की एक महत्वपूर्ण रियासत है। यहाँ के राज्यकर्ता मुसलमान हैं। भोपाल रियासत का इतिहास