दिमित्री मेंडेलीव का जीवन परिचय और दिमित्री मेंडेलीव की खोज

आपने कभी जोड़-तोड़ (जिग-सॉ) का खेल देखा है, और उसके टुकड़ों को जोड़कर कुछ सही बनाने की कोशिश की है ? शुरू शुरू में सभी कुछ बेसिर पैर नजर आता है।सेकड़ों टुकड़े मुख्तलिफ शक्लों, रंगों, मापों के टुकड़े लेकिन कुछ गौर के साथ चीज़ को कुछ पढ़ने की करे तो मसला अपने आप हल होने लग जाता है। वही टुकड़े एक-एक करके अपनी-अपनी जगह भरने लग जाते हैं ओर चित्र, स्पष्ट होते-होते, पूरा बन जाता है। जिग-सॉ पजल शुरू करने से पहले ही हमें मालूम होता है कि टुकड़ों का कुछ सिर पैर है कि उन्हें फिट करते-करते हम तस्वीर को पूरा कर ही लेंगे। 1869 तक इसी तरह की कुछ जोड़-तोड़ की चीज़ें रसायन में इकट्ठी हो चुकी थी। 63 तत्त्वों की खोज हो चुकी थी। रासायनिकों को अब इन तत्त्वों में कहीं-कहीं कुछ समानताएं नज़र आने लगी थीं। उदाहरणतः सोडियम और पोटेशियम दोनों मुलायम होते हैं, क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन तीनों रंगीन भी होते हैं, और धातुओं को खा जाने वाले द्रव्य होते हैं। जिग-साँ के चित्र में तो कुछ पूर्व-विनिश्चितता होती है, किन्तु वैज्ञानिकों को अभी यह निश्चय नहीं था कि इन तत्त्वों में कुछ परस्पर क्रमिकता है, उन्हें यह भी मालूम नहीं था कि इस सम्बन्ध में परीक्षा के लिए किन अंगों की छानबीन होनी चाहिए, और अभी तो चित्र के सभी अंश भी उपलब्ध नहीं थे। फिर भी समस्या को सुलझाना निहायत ज़रूरी था। हज़ारों टुकड़ों में बिखरा पड़ा यह रसायन-सम्बन्धी ज्ञान-विज्ञान संकलित होकर किसी क्रम-बन्ध में प्रस्तुत होना चाहिए। अनेकों रसायनशास्त्री इस प्रश्न से जूझ चुके थे, किन्तु जहां सभी असफल रहे, एक रूसी वैज्ञानिक ने वही कुछ व्यवस्था सिद्ध कर दिखाई। दिमित्री मेंडेलीव ने इन रासायनिक तत्त्वों को उनके अणु भारो के क्रम मे रखकर विश्व को एक तत्त्वानुक्रमणी–पीरियाडिक टेबल ऑफ एलिमेण्ट्स प्रस्तुत कर दी।

 

 

दिमित्री मेंडेलीव का जीवन परिचय

 

 

दिमित्री मेंडेलीव की गणना सोवियत यूनियन के गण्यमान्य वैज्ञानिकों में होती है यद्यपि उसका अनुसंधान काल जार-युग के रूस में पडता है। दिमित्री मेंडेलीव का जन्म 1 फरवरी, 1834 को पूर्वी साइबेरिया के एक वीरान इलाके तोबोल्स्क मे हुआ था। वह
एक स्थानीय हाईस्कूल के डायरेक्टर की सत्रहवी तथा कनिष्ठ संतान था। तोबोल्स्क मे पहले-पहल आकर बसे परिवारों में एक परिवार के दादा ने यहां आकर सबसे पहला प्रिंटिंग प्रेस चालू किया था और उसके बाद साइबेरिया भर में सबसे पहला अखबार चलाया था। मां अपने युग की एक मानी हुई सुन्दरी थी और उसका तार्तार परिवार भी तोबोल्स्क के पहले बाशिन्दों में ही एक था। इस तार्तार परिवार ने ही साइबेरिया में सबसे पहली शीशे की फैक्टरी चालू की थी।

 

 

किन्तु दिमित्री के पैदा होने के कुछ ही दिन बाद बाप अंधा हो गया और उसकी नौकरी जाती रही। मां ने अपने मायके की वह बन्द चली आ रही फेक्टरी फिर से खोल दी कि घर का गुजर कुछ तो चल सके। तोबोल्स्क एक ऐसा केन्द्र था जहां पर रूस के राजनीतिक बन्दियों को लाया जाता था और दिमित्री की एक बहिन ने कभी दिसम्बर 1925 की क्रांति के किसी ऐसे ही कैदी से शादी की थी। यह देश-निर्वासित पढा-लिखा बन्दी ही था जिसने दिमित्री को प्रकृति-विज्ञान मे प्रथम दीक्षा दी थी। गिलास फेक्टरी मे आग लग गई और दिमित्री मेंडेलीव की मां ने फैसला कर लिया कि बेटे के पढाई के शौक को पूरा करने के लिए अब परिवार को मास्को चल देना चाहिए।

 

 

उस वक्त दिमित्री मेंडेलीव की आयु 17 वर्ष थी। उसे सिर्फ साइबेरिया की भाषा ही आती थी। विश्वविद्यालय में दाखिला नही मिल सका। किन्तु वह एक पक्के इरादे की औरत थी। पीट्सबर्ग चल दी, जहां रूसी भाषा सीख कर बच्चा एक ऐसे स्कूल में दाखिल हो गया जहा हाईस्कूल के लिए टीचर्स तैयार किए जाते थे। यहां उसके विशेष विषय थे– गणित, भौतिकी, तथा रसायन। साहित्य और विदेशी भाषाओं में मेंडेलीव की तनिक भी रुचि नही थी। फिर भी स्नातक परीक्षा में वह अपनी श्रेणी में प्रथम ही रहा था।

 

 

दिमित्री मेंडेलीव
दिमित्री मेंडेलीव

 

उसने सेहत कोई बहुत अच्छी नही पाई थी। फेफड़ों में हमेशा कुछ न कुछ तकलीफ और मां की मौत ने उसके हौसले को बिलकुल पस्त कर दिया। डाक्टरों ने फतवा दे दिया कि छह महीने से ज्यादा नही जी सकता, सो वह उठकर क्रीमिया के कुछ गरम मौसम में आ गया और वहां भी एक स्कूल में विज्ञान पढाने के लिए उसे एक नौकरी मिल गई। तभी क्रीमिया की लडाई छिड़ गई और वह वहां से उठकर पहले ओडेसा और फिर सेंट पीटर्सबर्ग आ गया। विश्वविद्यालय ने ही खुद उसे अनुमति दे दी कि एक प्राइवेट डोसेंट की तरह घर में विद्यार्थियों को पढ़ा सकता है और उनकी आई फीस का कुछ मुकर्र हिस्सा अपने लिए रख सकता है।

 

 

रूस में उन दिनो विज्ञान में उच्चतर अध्ययन के लिए उपयुक्त व्यवस्था कोई थी नही, उसने सरकार से इजाजत ले ली कि वह फ्रांस और जर्मनी में जाकर अनुसंधान आदि कर सकता है। पेरिस में वह एक रसायन परीक्षणकर्ता हेनरी रैनो का सहकारी था, तो हाइडलबर्ग में आकर उसने अपनी ही एक छोटी-सी परीक्षणशाला खोल ली। वहां उसे प्रसिद्ध बर्नर के आविष्कर्ता बुन्सेन के सम्पर्क में आने तथा उसके साथ मिलकर काम करने का अवसर मिला, और गुस्ताफ किर्चहाफ के साथ भी। तीनों मिलकर स्पेक्ट्रोस्कोप ईजाद करने में लगे हुए थे।

 

 

दिमित्री मेंडेलीव की खोज

 

स्पेक्ट्रोस्कोप– प्रकाश की किरण की आन्तर रचना जानने के लिए एक उपकरण है, जिसकी उपयोगिता रासायनिक विश्लेषणों में भी कुछ कम नहीं होती। जर्मनी में पढ़ाई करते हुए मेंडेलीव कार्ल्सरूहे की कांग्रेस में भी शामिल हुआ था जहां कैनीज्रारों ने ऐंवोगेड्रो के कण-सिद्धान्त के हक में अपनी ऐतिहासिक अपील की। कैनीज्रारों की ऐंटॉमिक टेबल का उपयोग भी पीछे चलकर मेंडेलीव ने अपनी ‘पीरियॉडिक टेबल ऑफ एलिमेंट्स’ तैयार करते हुए किया था।

 

 

मेंडेलीव पीटर्सबर्ग लौट आया और शादी करके बस गया। उसने 60 दिन में ऑर्गेनिक कैमिस्ट्री की एक पाठ्य पुस्तक भी लिख डाली। रसायन में उसने डाक्टरेट भी प्राप्त कर ली उसका विषय था, ऑलकोहल तथा जल का परस्पर-मिश्रण। 1865 में जब मेंडेलीव अभी 31 वर्ष का ही था, उसकी वैज्ञानिक प्रतिभा तथा अध्ययन-कार्य के सम्मान में पीटर्सबर्ग के अधिकारियों ने उसे प्रोफेसरशिप के पूर्ण अधिकार दे दिए। क्लास रूम हमेशा भरे होते। भारी प्रभावशाली देह, और नीली-नीली अन्तर प्रवेश करती सी आंखें, बिखरे बाल, कुछ अजीब-सा किन्तु आकर्षक व्यक्तित्व।

 

 

1869 में रासायनिक आधार के संग्रह तथा अन्वेषण के अनन्तर अब दिमित्री मेंडेलीव इस स्थिति में था कि तत्त्वों में कुछ क्रम वह विनिश्चित कर सके। तब 63 तत्त्व मिल चुके थे जिनकी विविध भौतिक प्रवृत्तियां थी। कुछ हलकी किस्म की धातुएं तो कुछ भारी, कुछ सामान्य अवस्था में द्रव-सी तो कभी स्थूल भी, कुछ हलकी गैसे तो कुछ भारी। कुछ इतनी अधिक क्रियाशील थी कि बिना किसी प्रकार की सुरक्षा का प्रबन्ध किए उन्हें प्रयोग में लाना खतरे से खाली नही, और दूसरी कुछ ऐसी कि सालो-साल पडी रहे और उनमें कोई भी फर्क न आए।

 

 

मेंडेलीव को मालूम था कि उसके सामने प्रश्न इस तत्त्वों में कुछ परस्पर क्रम संगति बिठाने का था। मूल में ही कुछ परस्पर सम्बन्ध होना चाहिए। बढते अणु-भार के अनुसार उन्हे क्रम में बिठाकर देखा गया कि दोनों सिरों पर क्रमश हाइडोजन और यूरेनियम ही फिट बैठते है। अब मेंडेलीव ने देखा कि यदि इन्ही 63 तत्त्वों को उनके इस अणु-भार क्रम में रखने पर यदि अब उनके 7 वर्ग बना दिए जाए तो उनकी भौतिक एवं रासायनिक वत्तियो में कुछ अद्भुत सगति-सी आ जाती है। हर सात तत्त्व के पदचात फिर वही विशेषताएं आवृत्त होकर आ जाती है। चित्र पर एक निगाह डाली नही कि वैज्ञानिक किसी भी तत्त्व के बारे मे प्रस्तुत क्रम मे उसके स्थान को देख कर बतला सकता है कि अमृक तत्त्व की रासायनिक प्रवृत्ति कैसी होनी चाहिए।

 

 

इस प्रकार दिमित्री मेंडेलीव ने रसायन की ‘जोड-तोड’ की समस्या को सुलझा लिया था हालाकि पूर्ण-चित्र के तब सिर्फ दो-तिहाई अंश ही वैज्ञानिको के हाथ में थे। और अब, एक और प्रश्न कि क्‍या इस तत्त्व-चित्र के आधार अनुपलब्ध तत्त्वों के बारे में भी कुछ आभास नही दिया जा सकता अनेको अनुपलब्ध तत्त्वों के अणु भार तथा रासायनिक गुण भी मेंडेलीव ने पहले से गिनकर रख दिए। कुछ दिनो बाद इनमे सिलिकन, गेलियम, जमेंनियम, तथा स्कैण्डियम की खोज हो गई, और उनके गुण भी वस्तुत वही थे जैसा कि मेंडेलीव भविष्यवाणी कर गया था। मेंडेलीव की टेबल की समय-समय पर पुन परीक्षा हो चुकी है। आज हम इन अणुओं का क्रम उनके ‘नम्बर’ के अनुसार बिठाते है जो क्रमांक ऐंटॉमिक अणु में विद्यमान प्रोटनों की सख्या का द्योतक होता है। कुछ एक अपवादों को छोड दें तो तत्त्व का ऐंटॉमिक नम्बर प्राय उसके अणु-भार का ही समसंख्य होता है।

 

 

21 वें साल में जिसके बारे में चेतावनी दी गई थी कि वह अब छः महीने से ज्यादा और नही निकाल सकता, वही दिमित्री 78 साल जी गया। आखिर 1907 मे निमोनिया से दिमित्री मेंडेलीव मृत्यु हुई। उसके मरने तक रसायन को 86 तत्त्व मिल चुके थे, और वे भी मेंडेलीव की ही चित्र-पूर्ति की बदौलत कि बीच-बीच मे ये फला तत्त्व होने चाहिए।आज पीरियाडिक टेबल पूरी की जा चुकी है, 92 के 92 प्राकृतिक तत्त्व अब मिल चुके है। इंसान अणुओं के विस्फोट द्वारा नये तत्वों का निर्माण करना भी सीख गया है और तत्त्व-सख्या 101 को नाम दिया गया हे ‘मेंडेलीवियम’।

 

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढ़े—-

 

एनरिको फर्मी
एनरिको फर्मी--- इटली का समुंद्र यात्री नई दुनिया के किनारे आ लगा। और ज़मीन पर पैर रखते ही उसने देखा कि Read more
नील्स बोर
दरबारी अन्दाज़ का बूढ़ा अपनी सीट से उठा और निहायत चुस्ती और अदब के साथ सिर से हैट उतारते हुए Read more
एलेग्जेंडर फ्लेमिंग
साधारण-सी प्रतीत होने वाली घटनाओं में भी कुछ न कुछ अद्भुत तत्त्व प्रच्छन्न होता है, किन्तु उसका प्रत्यक्ष कर सकने Read more
अल्बर्ट आइंस्टीन
“डिअर मिस्टर प्रेसीडेंट” पत्र का आरम्भ करते हुए विश्वविख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने लिखा, ई० फेर्मि तथा एल० जीलार्ड के Read more
हम्फ्री डेवी
15 लाख रुपया खर्च करके यदि कोई राष्ट्र एक ऐसे विद्यार्थी की शिक्षा-दीक्षा का प्रबन्ध कर सकता है जो कल Read more
मैरी क्यूरी
मैंने निश्चय कर लिया है कि इस घृणित दुनिया से अब विदा ले लूं। मेरे यहां से उठ जाने से Read more
मैक्स प्लांक
दोस्तो आप ने सचमुच जादू से खुलने वाले दरवाज़े कहीं न कहीं देखे होंगे। जरा सोचिए दरवाज़े की सिल पर Read more
हेनरिक ऊ
रेडार और सर्चलाइट लगभग एक ही ढंग से काम करते हैं। दोनों में फर्क केवल इतना ही होता है कि Read more
जे जे थॉमसन
योग्यता की एक कसौटी नोबल प्राइज भी है। जे जे थॉमसन को यह पुरस्कार 1906 में मिला था। किन्तु अपने-आप Read more
अल्बर्ट अब्राहम मिशेलसन
सन् 1869 में एक जन प्रवासी का लड़का एक लम्बी यात्रा पर अमेरीका के निवादा राज्य से निकला। यात्रा का Read more
इवान पावलोव
भड़ाम! कुछ नहीं, बस कोई ट्रक था जो बैक-फायर कर रहा था। आप कूद क्यों पड़े ? यह तो आपने Read more
विलहम कॉनरैड रॉटजन
विज्ञान में और चिकित्साशास्त्र तथा तंत्रविज्ञान में विशेषतः एक दूरव्यापी क्रान्ति का प्रवर्तन 1895 के दिसम्बर की एक शरद शाम Read more
जेम्स क्लर्क मैक्सवेल
दो पिन लीजिए और उन्हें एक कागज़ पर दो इंच की दूरी पर गाड़ दीजिए। अब एक धागा लेकर दोनों Read more
ग्रेगर जॉन मेंडल
“सचाई तुम्हें बड़ी मामूली चीज़ों से ही मिल जाएगी।” सालों-साल ग्रेगर जॉन मेंडल अपनी नन्हीं-सी बगीची में बड़े ही धैर्य Read more
लुई पाश्चर
कुत्ता काट ले तो गांवों में लुहार ही तब डाक्टर का काम कर देता। और अगर यह कुत्ता पागल हो Read more
लियोन फौकॉल्ट
न्यूयार्क में राष्ट्रसंघ के भवन में एक छोटा-सा गोला, एक लम्बी लोहे की छड़ से लटकता हुआ, पेंडुलम की तरह Read more
चार्ल्स डार्विन
“कुत्ते, शिकार, और चूहे पकड़ना इन तीन चीज़ों के अलावा किसी चीज़ से कोई वास्ता नहीं, बड़ा होकर अपने लिए, Read more
“यूरिया का निर्माण मैं प्रयोगशाला में ही, और बगेर किसी इन्सान व कुत्ते की मदद के, बगैर गुर्दे के, कर Read more
जोसेफ हेनरी
परीक्षण करते हुए जोसेफ हेनरी ने साथ-साथ उनके प्रकाशन की उपेक्षा कर दी, जिसका परिणाम यह हुआ कि विद्युत विज्ञान Read more
माइकल फैराडे
चुम्बक को विद्युत में परिणत करना है। यह संक्षिप्त सा सूत्र माइकल फैराडे ने अपनी नोटबुक में 1822 में दर्ज Read more
जॉर्ज साइमन ओम
जॉर्ज साइमन ओम ने कोलोन के जेसुइट कालिज में गणित की प्रोफेसरी से त्यागपत्र दे दिया। यह 1827 की बात Read more
ऐवोगेड्रो
वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी समस्याओं में एक यह भी हमेशा से रही है कि उन्हें यह कैसे ज्ञात रहे कि Read more
आंद्रे मैरी एम्पीयर
इतिहास में कभी-कभी ऐसे वक्त आते हैं जब सहसा यह विश्वास कर सकता असंभव हो जाता है कि मनुष्य की Read more
जॉन डाल्टन
विश्व की वैज्ञानिक विभूतियों में गिना जाने से पूर्वी, जॉन डाल्टन एक स्कूल में हेडमास्टर था। एक वैज्ञानिक के स्कूल-टीचर Read more
काउंट रूमफोर्ड
कुछ लोगों के दिल से शायद नहीं जबान से अक्सर यही निकलता सुना जाता है कि जिन्दगी की सबसे बड़ी Read more
एडवर्ड जेनर
छः करोड़ आदमी अर्थात लन्दन, न्यूयार्क, टोकियो, शंघाई और मास्कों की कुल आबादी का दुगुना, अनुमान किया जाता है कि Read more
एलेसेंड्रा वोल्टा
आपने कभी बिजली 'चखी' है ? “अपनी ज़बान के सिरे को मेनेटिन की एक पतली-सी पतरी से ढक लिया और Read more
एंटोनी लेवोज़ियर
1798 में फ्रांस की सरकार ने एंटोनी लॉरेंस द लेवोज़ियर (Antoine-Laurent de Lavoisier) के सम्मान में एक विशाल अन्त्येष्टि का Read more
जोसेफ प्रिस्टले
क्या आपको याद है कि हाल ही में सोडा वाटर की बोतल आपने कब पी थी ? क्‍या आप जानते Read more
हेनरी कैवेंडिश
हेनरी कैवेंडिश अपने ज़माने में इंग्लैंड का सबसे अमीर आदमी था। मरने पर उसकी सम्पत्ति का अन्दाजा लगाया गया तो Read more
बेंजामिन फ्रैंकलिन
“डैब्बी", पत्नी को सम्बोधित करते हुए बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा, “कभी-कभी सोचता हूं परमात्मा ने ये दिन हमारे लिए यदि Read more
सर आइज़क न्यूटन
आइज़क न्यूटन का जन्म इंग्लैंड के एक छोटे से गांव में खेतों के साथ लगे एक घरौंदे में सन् 1642 में Read more
रॉबर्ट हुक
क्या आप ने वर्ण विपर्यास की पहेली कभी बूझी है ? उलटा-सीधा करके देखें तो ज़रा इन अक्षरों का कुछ Read more
एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक
सन् 1673 में लन्दन की रॉयल सोसाइटी के नाम एक खासा लम्बा और अजीब किस्म का पत्र पहुंचा जिसे पढ़कर Read more
क्रिस्चियन ह्यूजेन्स
क्रिस्चियन ह्यूजेन्स (Christiaan Huygens) की ईजाद की गई पेंडुलम घड़ी (pendulum clock) को जब फ्रेंचगायना ले जाया गया तो उसके Read more
रॉबर्ट बॉयल
रॉबर्ट बॉयल का जन्म 26 जनवरी 1627 के दिन आयरलैंड के मुन्स्टर शहर में हुआ था। वह कॉर्क के अति Read more
इवेंजलिस्टा टॉरिसेलि
अब जरा यह परीक्षण खुद कर देखिए तो लेकिन किसी चिरमिच्ची' या हौदी पर। एक गिलास में तीन-चौथाई पानी भर Read more
विलियम हार्वे
“आज की सबसे बड़ी खबर चुड़ैलों के एक बड़े भारी गिरोह के बारे में है, और शक किया जा रहा Read more
“और सम्भव है यह सत्य ही स्वयं अब किसी अध्येता की प्रतीक्षा में एक पूरी सदी आकुल पड़ा रहे, वैसे Read more
गैलीलियो
“मै गैलीलियो गैलिलाई, स्वर्गीय विसेजिओ गैलिलाई का पुत्र, फ्लॉरेन्स का निवासी, उम्र सत्तर साल, कचहरी में हाजिर होकर अपने असत्य Read more
आंद्रेयेस विसेलियस
“मैं जानता हूं कि मेरी जवानी ही, मेरी उम्र ही, मेरे रास्ते में आ खड़ी होगी और मेरी कोई सुनेगा Read more
निकोलस कोपरनिकस
निकोलस कोपरनिकस के अध्ययनसे पहले-- “क्यों, भेया, सूरज कुछ आगे बढ़ा ?” “सूरज निकलता किस वक्त है ?” “देखा है Read more
लियोनार्दो दा विंची
फ्लॉरेंस ()(इटली) में एक पहाड़ी है। एक दिन यहां सुनहरे बालों वाला एक नौजवान आया जिसके हाथ में एक पिंजरा Read more
गैलेन
इन स्थापनाओं में से किसी पर भी एकाएक विश्वास कर लेना मेरे लिए असंभव है जब तक कि मैं, जहां Read more
आर्किमिडीज
जो कुछ सामने हो रहा है उसे देखने की अक्ल हो, जो कुछ देखा उसे समझ सकने की अक्ल हो, Read more
एरिस्टोटल
रोजर बेकन ने एक स्थान पर कहा है, “मेरा बस चले तो मैं एरिस्टोटल की सब किताबें जलवा दू। इनसे Read more
हिपोक्रेटिस
मैं इस व्रत को निभाने का शपथ लेता हूं। अपनी बुद्धि और विवेक के अनुसार मैं बीमारों की सेवा के Read more
यूक्लिड
युवावस्था में इस किताब के हाथ लगते ही यदि किसी की दुनिया एकदम बदल नहीं जाती थी तो हम यही Read more
,