तूतनखामेन का रहस्य – तूतनखामेन की कब्र वह ममी का रहस्य

अमेरिकी पुरातत्व शास्त्रियों ने तूतनखामेन की ममी व उसका खजाना तो खोज निकाला लेकिन उनकी विद्या दो रहस्यों पर से पर्दा नहीं उठा सकी। तूतनखामन की ममी मे निकले 150 ताबीजो का क्या रहस्य है और तूतनखामन की ममी समय से पहले खराब होनी क्यो शुरू हो गई थी? 150 में से केवल 3 ताबीजो के बारे में पता लग पाया है कि उनका क्या अर्थ है तथा ममी के खराब होने के बारे में जो तर्क दिए जाते है, वे खासे अविश्वसनीय हैं। तूतेनखामेन का खजाना, तूतनखामेन का रहस्य तथा अपने इस लेख में हम अनसुलझे तूतनखामेन मकबरे का रहस्य जानेंगे।

 

 

तूतनखामेन का मकबरा व उसके अनसुलझे रहस्य

 

मिस्र जितना प्रसिद्ध अपनी प्राचीन सभ्यता के लिए है उतना ही अपने रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। विशालकाय पिरामिडों के रहस्य से आज भी विश्व भर के पुरातत्वशास्त्री, वास्तुकार ओर वैज्ञानिक जूझ रहे है। लेकिन अभी तक वे उनके निर्माण का वास्तविक उद्देश्य नही खोज पाए है। महान मिस्री फराआ राजा चिआप्स (Cheops) के शासन की समाप्ति की 12 शताब्दियों के बाद मिस्र पर तूृतनखामेन (Tutankhaman) नामक राजा का शासन हुआ, तूतनखामेन मकबरे का रहस्य भी पिरामिडों के रहस्य से कम गम्भीर नहीं है

 

 

 

अमरिकन पुरातत्ववेत्ता काटर (Carter) तथा कार्नाकान (karnakhan) पहली बार तूतनखामन के मकबरे में घुसने का अवसर प्राप्त किया। इस मकबर में चार कब्र थी, जिनमें से एक पर सोने की अतिकलात्मक नक्काशी थी तो दूसरी पर मृतक की रक्षा के लिए देवी-देवताओ के चित्र बनाए गए थे। तीसरी कब्र भी इसी तरह की थी। चौथी कब्र में तूतनखामेन का शव रखा था। इस कब्र में पत्थर के ताबूत मे रखे सोन के एक चमचमाते आदमकद आवरण में तीन कफनो के अंदर लिपटी तूतनखामन की साढे तीन हजार वर्ष पुरानी ममी निकली। यह शव भव्य रूप से सजाया गया था। शव का मुखौटा तथा उसके सिर के नीचे रखा गया लौहे का तकिया उस जमाने की कला शिल्पियों की कला के उत्कृष्ट नमूने थे। राजा के शव के सिर पर रखे आकर्षक मुकुट पर सर्प बूटी तथा गिद्ध की आकृतियां अंकित थी, जो उस समय का राज-चिह्न था।

 

 

 

तूतनखामेन
तूतनखामेन

 

तूतनखामेन के ताबूत में अन्य वेशकीमती आभूषण थे, जिनमे सबसे अधिक विशिष्ट था हरे कांच, नीलम तथा कार्नेलियन से बना मिस्र की दक्षिणी देवी के प्रतीक के रूप मे बना नेकलेस। शव के दाए ओर बाए हाथ मे पांच और आठ अंगुठियां थी। पेट और कमर में सोने की करधरनियां। कमर वाली करधरनी में एक तलवार बंधी थी, जिनमें बहुमुल्य पत्थरों की कारीगरी थी। म्यान और मूठ सोने की थी। इसके अलावा छूरी कटार तथा अनेक बहुमूल्य रत्न भी आसपास बिखरे पड़े थे। तूतनखामन के पूरे शरीर पर 143 बहुमूल्य वस्तुएं थीं।

 

 

 

तूतनखामेन के मकबरे से संबंधित दो रहस्य आज तक नहीं सुलझ पायें है। पहला तो यह कि तूतनखामन की ममी से मिले 150 ताबीजो का क्या रहस्य है तथा दूसरा यह की तूतनखामन की ममी खराब क्यों हो गई। क्योंकि निकालने पर पाया गया था कि ममी की त्वचा फटने लगी है।

 

 

 

ममी में पाएं ग्रे ताबीज जहां एक ओर उत्कृष्ट कलाकृतियों के बेजोड़ नमूने हैं वहीं दूसरी ओर मिश्र वासियों की रहस्यमय परंपराओं की ओर इशारा करते हैं। इन ताबीजो में आई ऑफ हॉर्स (Eye of horus) बक्ल ऑफ इबिस (Buckle of isis) बहुत प्रसिद्ध है। सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है स्केरब (Scarab) नामक ताबीज जो जीवन का प्रतीक है, और जो सूर्य देव रॉ (ra) को समर्पित है। शवों को दफनाने के संस्कार के समय स्केरब को जो भवंरे की शक्ल के आधार पर बनाया जाता था, ह्रदय की जगह पर रखा जाता था। इस ताबीज की पीठ पर एक जादुई मंत्र खुदा रहता था। जिसमें देवताओं से अमरता देने की प्रार्थना की जाती थी। धीरे-धीरे भंवरा ही स्करब की शक्ति का प्रतीक माना जाने लगा। बांझ औरत इस कीट को सुखा कर उसका चूरा बना लेती थी तथा इस आशा में उस पाउडर का पेय बना कर पी लेती थी कि उससे उन्हें बच्चा पैदा करने की सामर्थ्य मिल जाएगी। इस ताबीज पर एक आंख तथा एक क्रास, एक छल्लेदार शीर्ष के साथ बना हुआ है। ये तीनो चीज भी जीवन और अमरता की प्रतीक है।

 

 

 

तूतनखामेन के सीने पर पाए गए 150 तावीजो मे से केवल इन्ही तीन ताबीजो का अर्थ समझा जा सका है। होरूस व ‘इसिस भी देवता ही है। होरूस एक ऐसा देवता माना जाता था, जो मृतक के हृदय का अंतिम फैसला देते समय तौलता था। इस धारणा से संबंधित कलाकृतियां और मिस्री चित्र मिस्रविद्याविदो को काफी सख्या में मिले हैं। शव की गहराई से जांच करने पर दूसरा रहस्य सामने आया। शरीर की त्वचा जगह-जगह से फट चुकी थी तथा शव भंगुर स्थिति में था। प्रश्न यह उठा कि जब मिस्र की अन्य मम्मियां हजारों वर्ष से सुरक्षित है तो फिर तूतनखामन की ममी ही क्यों खराब हुई?

 

 

 

 

इसके उत्तर में एक तर्क दिया जाता है कि तूतनखामन को मिस्री लोग मृत्यु का देवता आसिरिस का प्रतिनिधि मानते थे इसलिए उन्होंने अपना अतिरिक्त सम्मान प्रदर्शित करने के लिए उसके शव की ममी बनाने से पहले तेल ओर विभिन्‍न लेपो से मालिश की। लंबी अवधि में यही तेल ओर आलेपन शरीर की त्वचा मे पहुंच गया और इसने त्वचा को खराब कर दिया लेकिन अभी तक इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण नही मिल पाए है कि शव वास्तव मे इसी कारण खराब हुआ होगा।

 

 

 

तूतनखामेन के शव के साथ अमेरिकी पुरातत्वविदों ने जो खजाना प्राप्त किया वह आंखें चौंधिया देने वाला था। रत्न-जडित शास्त्रास्त्र, बहुमूल्य परिधान, हीरे-मातियों जड़ित सिंहासन सजावटी वस्तुएं, लकड़ी की कलात्मक चौटख बहूरगी कुर्सिया, सिंहासन, रथ तथा इन सबसे ऊपर स्वय तूतेनखामेन की सिहासनारूढ मूर्ति तथा उसके पास खडी हुई उसकी रानी आखेसामन की मूर्ति इस खजाने की उल्लेखनीय वस्तुएं थी।

 

 

दंतकथा है कि अमेरिकी पुरातत्वविदों को सफलता मिलने से पूर्व 20 अन्य व्यक्तियों ने भी तूतेनखामेन के सिंहासन के लालच मे उसके मकबरे मे घुसने का प्रयास किया था लेकिन वे रहस्यमय परिस्थितियों मे अपनी जान से हाथ धो बेठे। इस कथा के बारे में प्रामाणिक तोर से कुछ नही कहा जा सकता क्योंकि अमेरिकी पुरातात्विकविदो ने मकबरे में ऐसी कोई जानलेवा खतरनाक वस्तु नही देखी ना ही माहौल मे ऐसी किसी चीज को महसूस किया।

 

 

 

यदि तूतनखामन की ममी खराब होने का रहस्य तथा उसके बचे हुए 147 तावीजो का रहस्य खुल जाता हे तो दो महत्वपूर्ण बातो से विश्व भर के उत्सुक लोगों का परिचय हो जाएगा कि ममियो को बनाने की ठीक-ठीक उस समय बहुत प्रचलित विधि क्या थी तथा तावीजो पर बनी आकृतियां तत्कालीन मिस्री समाज की किन किन सभ्यताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।

 

 

 

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