टेलीविजन के आविष्कारक कौन है – टीवी का आविष्कार कब हुआ

टेलीविजन

टेलीविजन का आविष्कार किसी एक व्यक्ति द्वारा एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि इसका विकास अनेक वैज्ञानिकों के वर्षो के प्रयास का परिणाम है। लेकिन फिर भी सफल टेलीविजन के आविष्कार का श्रेय एक स्काटिश पादरी युवक जॉन लोगी बेयर्ड को जाता है।
उन्होंने 26-27 जनवरी सन्‌ 1926 में संसार के पहले सफल टेलीविजन का प्रदर्शन किया। इससे पहले इस दिशा में किए गए प्रयासों को भुलाया नही जा सकता।

1842 में अलेक्ज़ेंडर बेन नाम के एक अन्य स्कॉटिश वैज्ञानिक ने विद्युत-तार से चित्र प्रेषित करने के लिए एक यंत्र बनाया था। इस यंत्र को बाद में बेवल ने विकसित किया। इसके बाद एक जर्मन भौतिकशास्त्री आथर कोन ने विद्युत रसायन के स्थान पर प्रकाश विद्युत प्रभाव का इस्तेमाल कर इसे और परिष्कृत किया।

 

टेलीविजन का आविष्कार किसने किया

 

टेलीविजन के लिए सबसे बडी समस्या स्केनिंग यानी
सक्ष्मावलोकन की थी। इसका समाधान कुछ अंश तक बर्लिन विश्वविद्यालय के पाल निकोव नामक युवक ने करने का प्रयास किया। स्केनिंग ओर उसे फिर से वास्तविक रूप में सज्जीकरण के लिए उन्होने गत्ते का डिस्क लिया और उस पर छोटे-छाटे सूराखों को इस प्रकार व्यवस्थित किया कि वे इसकी कोर (core) के पास एक सर्पिल वृत्त बना सके। एक विशेष प्रकार के केमरे मे इस डिस्क को लगाया। इस केमरे के सामने किसी हरकत करती वस्तु पर छिद्रित डिस्क के घूमने से केमरे में लगे एक तेज रोशनी वाले लेम्प से प्रकाश किरण निकलकर वस्तु या दृश्य पर पडती थी। इस प्रक्रम से वह वस्तु छोटे-छोटे बिन्दुओं में बट जाती थी।

 

छिद्रों का आकार डिस्क पर सर्पिल रूप में हाने से वस्तु का सूक्ष्मवलोकन डिस्क की एक ही परिक्रमा में हो जाता था। एक प्रकाश संवेदी (Light sensetive) सेल जो बैटरी से जुडा होता था ओर जिसका सबंध रिसीवर से होता था, इस वस्तु या दृश्य को विद्युत संवेगो मे बदल कर लगातार प्रेषित करता रहता था। एक दूसरे छिद्रित डिस्क मे सर्पिल वृत्त मे बने सूराखों के सहारे तेज और मंद प्रकाश के असंख्य बिन्दुओं के सम्मिलन से पूरा दृश्य फिर से निर्मित हो जाता था, लेकिन निकोय इसे अधिक विकसित नहीं कर पाए, क्योंकि इसमें तकनीकी बाधाएं बहुत थी।

 

 

इसी बीच टेलीविजन के दो बुनियादी यंत्रो का विकास हुआ। स्ट्रासबर्ग विश्वविद्यालय क प्रोफेसर फर्डिनाड ब्राउन ने क्रक्स की कैथोड-ट्यूब में संशोधन किया। उन्होंने ट्यूब के चौडे सिरे वाले भाग पर चमकीले इमल्शन का लेप करके कैथोड से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन के प्रवाह को दिखने योग्य बना दिया। वे इस नली का उपयोग ओसिलोस्कोप’ (दोलनमापी) के रूप में करत थे।

 

दूसरा यंत्र था ‘प्रकाश विद्युत सेल। इसका आविष्कार 1905 में जर्मनी के जूलियस एल्स्टर आर हार्स गाइटेल ने किया। सन् 1909 मे म्यूनिख के एक इंजीनियर मैक्स दाइकमान ने भी कैथोड किरणों के माध्यम से एक छोटा-सा मॉडल बनाया जो छाया चित्रा का प्रेषण कर सकता था।

 

बेयर्ड ने इन सभी प्रयासों से पर्याप्त लाभ उठाया ओर सन्‌ 1925 मे उन्हें अपने टेलीविजन मॉडल से एक मनुष्य की आकृति को एक कमरे से दूसरे कमरे में प्रेषित करन मे सफलता मिली। बेयर्ड ने अपने मॉडल में निकोव द्वारा प्रयुक्त छिद्रित डिस्क का उपयोग किया था। बेयर्ड ने अपने मॉडल द्वारा प्रषित चित्र को और साफ सुथरा बनाने के लिए बेतार द्वारा प्रेषण का क्षेत्र बढाने के प्रयास किए। बेयर्ड द्वारा निर्मित टेलीविजन सेट का प्रायोगिक प्रेषणबी बी सी से सन् 1929 में शुरू किया गया।

 

टेलीविजन
टेलीविजन

 

इन्हीं दिनों अमेरीकी प्रयोगशालाओं में भी टेलीविजन की इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली को बहुत अधिक विकसित कर लिया गया। यहां के वैज्ञानिक फिलो टी फान्सवर्थ, आर डॉ वीक ज्यारिकिन ने इस क्षेत्र में बड़े असाधारण कार्य किए। 1928 में ज्योरिकिन ने टेलीविजन के आधारभूत साधन ‘आइकानोस्कोप” बनाया। यह एक बिल्कुल नयी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली का नियोजन था, जिसे निकोब डिस्क ओर ब्राउन नली के स्थान पर लगाया गया। टेलीविजन बिम्बो को शीघ्र ओर कुशलता से प्रेषित करने में यह एक क्रांतिकारी विकास था जो आज भी टेलीविजन का आधारभूत साधन बना हुआ है।

 

टीवी सेट के अंदर एक कैथोड नलिका होती है, जिसमें चार्ड सिर के भीतरी भाग में प्रतिदीप्त जिंकसन्फाइड का लेप होता है। यही टीवी का स्क्रीन कहलाता है। जब इलेक्ट्रॉन गन से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन स्क्रीन पर पड़ते हैं, तो यह स्क्रीन चमक उठती है। यह विशेष पदार्थ पूरे स्क्रीन पर छाटे-छोटे कणों के रूप में फैला होता
है। इन कणों में उसी मात्रा में प्रकाश के स्फुर्लिंग निकलते रहते हैं जिस अनुपात में उस पर इलेक्ट्रॉनटकराते हैं। जिस प्रकार से इलेक्ट्रॉन गन टी वी कमरा मे क्रमवीक्षण करता है उसी तरह कैथोड-किरण ट्यूब तेज रफ्तार सम इलेक्ट्रोनों को दाएं बाएं शूट करती रहती है और स्क्रीन पर हरकत करते चित्र दिखाई देते रहते
है।

 

 

टी वी प्रसारण केन्द्र में एक खास किस्म के कमरे से पर्दे पर वह दृश्य डाला जाता है जिसे प्रसारित करना होता है। यह स्क्रीन लाखो छोटे-छोटे कणों से निर्मित होता है। इन कणों को अभ्रक पट्टी के एक तरफ जमा दिया जाता है। इन कणों आकार इंच के हजारवें भाग के बराबर होता है। आसपास के कण एक दूसरे से विद्युत रूप से पृथक पृथक होते है। इन कणों में प्रकाश की क्रिया तेजी और बहुलता से होती है। इन कणों पर जब प्रकाश डाला जाता है, तो इनमे से इलेक्ट्रॉन-कण निकलने लगते है। इन इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की मात्रा पर निर्भर करती है। कैमरे के दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉन-गन की व्यवस्था होती है, जो इलेक्ट्रॉन- कणों का स्रोत होती है। इलेक्ट्रोन-गन मे से निकलने वाली इलेक्टॉन बीम दाए-बाए और ऊपर नीचे क्रम से घुमायी जाती है। यह क्रम-वीक्षण (Scanning) कहलाती है। इन इलेक्ट्रॉन कणों की सख्या के अनुरूप विद्युत-धारा उत्पन्न होती है, जो नन्हें-नन्हें पुंजो की शक्ल में होती है। विद्युत-धारा के इन पुंजो को एम्प्लीफायर द्वारा प्रवर्धित (Amplified) किया जाता है। उसके बाद इन्हे प्रसारित करन के लिए रेडियो-तरंगो पर सवार कर दिया जाता है। एंटिना के माध्यम से टेलीविजन सेट मे पहुंचने पर ये तरंगे पुन दृश्य रूप कसे पाती है, यह पहले बतलाया जा चुका है।

 

 

रंगीन टेलीविजन का आविष्कार

 

टेलीविजन के स्क्रीन पर विद्युत-पुंजो को पृथक करके उसी क्रम मे ऊपर-नीचे दाए-बाए घुमाया जाता है, जिस क्रम में प्रसारण केन्द्र में घुमाया गया था। तभी दृश्य उभरता हैं। रंगीन टेलीविजन में दृश्य तीन मूल रंगों के मेल से बनता है-लाल, नीला और हरा। दृश्य को इन्ही तीन रंगों के खण्डो में विभाजित किया जाता है। तीनो मूल रंगों के हिस्से तीन अलग-अलग कैमरो के स्क्रीन पर डाले जाते हैं। ये तीनो कैमरे रंगो के अनुरूप विद्युत-धाराओं के तीन क्रम उत्पन्न करते है। फिर ये स्व॒तंत्र रूप से रेडियो तरंगो के ऊपर सवार करके प्रसारित कर दिए जाते है।

 

रंगीन टेलीविजन सेट मे अलग-अलग रंगो के लिए तीन इलेक्ट्रॉन-गने होती हैं। ये गन विद्युत-धारा में से अपने क्रम वाली तरंगे चुनकर उन्हे इलेक्ट्रॉन-पुंजो के रूप में स्क्रीन पर एक साथ प्रक्षेपित करती है। तीन पंक्तियों में से प्रत्येक पंक्ति के कण अलग अलग रंगो का प्रकाश स्क्रीन पर डालते है। तीनों रंगो के मेल से स्क्रीन पर रंगीन दृश्य उभर आता है।

 

 

टेलीविजन प्रसारण प्राणली

 

टेलीविजन प्रसारण का क्षेत्र बढाने के लिए आजकल दो प्रणालियां अधिकतर अपनायी जा रही है। पहली माइक्रोवेव प्रणाली तथा दूसरी संचार उपग्रह प्रणाली। माइक्रोवेव प्रणाली द्वारा टेलीविजन के कार्यक्रम प्रसारित करने की संक्षिप्त कार्य प्रणाली इस प्रकार है- जिस कार्यक्रम को टेलीवजन पर दिखाना होता है, वहां से चित्र और आवाज की तरंग माइक्रोवेव डिस्क द्वारा टेलीविजन सेट में भेजी जाती है। केन्द्र पर लगी दूसरी माइक्रोवेव डिस्क उन्हें ग्रहण करती है। टेलीविजन केन्द्र के टावर से ये तरंगे मास्टर स्विचिंग रूम (एम एस आर ) में पहुंचती है।

 

 

यदि कार्यक्रम का अन्य केन्द्रो से भी रिल करना हो तो ये तरंग एम एस आर से कोएक्सियल केबल जो जमीन के अंदर बिछी होती है उसके द्वारा पोस्ट एड टेलीग्राफ के माइक्रोवेव में पहुंचती है। फिर माइक्रोवेब डिस्क के जरिए इन्हें दूसरे केन्द्र तक भेजा जाता है। एक केन्द्र से दूसरे के मध्य में हर सौ किलोमीटर पर एक रिपीटर
स्टेशन होता है। ये रिपीटर स्टेशन तरंगो को आगे बढाते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर बम्बई से दिल्‍ली के टेलीविजन केन्द्र तक 26 रिपीटर स्टेशन है। यदि बम्बई से कोई कार्यक्रम दिल्ली के लिए प्रसारित किया जाता है, तो तरंगे एक के बाद एक इन्ही रिपीटर
स्टेशनों से होती हुई दिल्ली केन्द्र तक पहुंचती है। दूसरे केंद्र के एम एस आर पर पहुंचकर ये तरंगे टेलीविजन सिस्टम से होती हुई टेलीविजन सेट तक पहुंचती है।

 

टेलीविजन प्रसारण की सेटेलाइट प्रणाली
टेलीविजन प्रसारण की सेटेलाइट प्रणाली

 

सेटेलाइट द्वारा टेलीविजन कार्यक्रम प्रसारित करने के लिए जिस स्थान का कार्यक्रम दिखाना होता है, वहां भी माइक्रोवेव डिस्क की व्यवस्था की जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि दिल्ली के किसी कार्यक्रम को विदेश अथवा बहुत दूर के शहर में प्रसारित करना हो तो दिल्‍ली के ओबी स्पॉट से माइक्रीवेव डिस्क द्वारा दिल्‍ली टेलीविजन से एम एस आर की ओर तरंगे भेजी जाती हैं। वहा से उन्हें जमीन के अंदर कोएक्सियल केबल के माध्यम से दिल्‍ली के विदेश संचार भवन में भेजा जाता है। उसके पश्चात उन्हे माइक्रोवेव डिस्क के माध्यम से देहरादून में लगे अर्थ स्टेशन की ओर भेजा जाता है। वहा स्थित पराबोलायड एटिना के माध्यम से आकाश में स्थित सैटेलाइट की ओर तरंगे भेजी जाती हैं। उसके बाद सेटेलाइट से इन तरंगो को उस देश का संचार माध्यम प्राप्त कर शेष पूर्वविधि से उसे अपने टेलीविजन केन्द्रों से प्रसारित करने की व्यवस्था कर लेता है। हमारे देश मे इन दोनों ही संचार प्रणालियो का उपयोग टेलीविजन के कार्यक्रम सारे देश में प्रसारित करने के लिए किया जा रहा है।

 

 

टीवी में क्रातिकारी विकास

 

वैज्ञानिकों ने एक नयी तरह की विधि का भी विकास किया है। एक विशेष प्रकार के एंटिना का निर्माण किया गया ह, जो विश्व के किसी भी स्थान से किसी भी संचार उपग्रह से सिग्नलों को ग्रहण करके सीधे टेलीविजन स्क्रीन पर दिखा सकता है। इस विधि से आप विश्व के किसी भी देश में हो रहे टेलीविजन कार्यक्रम को देख सकते है।

 

एक ओर नए तरह का टेलीविजन सेट विकसित किया गया है, जो एक साथ दो कार्यक्रम टेलीविजन स्क्रीन पर प्रेषित करता है। टी वी के बडे स्क्रीन के मध्य मे नीचे की ओर एक छोटा-सा स्क्रीन होता है, जिस पर अलग से कार्यक्रम आता है। यदि कोइ रोचक कार्यक्रम देखने के साथ-साथ आप उस दिन चलने वाले क्रिकेट मेच का भी आनद लेना चाहे तो इस प्रकार का टी वी हाजिर है। दो कार्यक्रम एक साथ दिखाने वाले इस टेलीविजन सेट का प्रचलन लगभग सभी के देशों मे हो चुका है।

 

इलेक्टॉनिक यंत्रों का आकार वाल्वो के स्थान पर ट्रांजिस्टरो और ट्रांजिस्टरों के स्थान पर सिलिकोन चिप्स का विकास करके घटाया गया। अब एक ओर नये विकास का तेजी के साथ आगमन हो रहा है। इस नये विकास का नाम ‘ ऑप्टिकल फाइबर’ है। अमेरिका की बेल लेबोरेटरीज में इसके विकास पर जोर शोर से कार्य हो रहा है। किसी भी घर की संचार लाइन में यह ऑप्टिकल फाइबर नामक सूक्ष्म यंत्र लगा देने से अनेक संचार चैनलो से सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है। एक ही लाइन से टेलीफोन, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर आदि जोडे जा सकते हैं। महिलाएं बटन दबाकर बाजार में वस्तुओं का भाव मालूम कर घर बेठे ही आर्डर भी दे सकती है। टेलीविजन पर मनचाहे कार्यक्रम, बाजार भाव बच्चो की शिक्षा से संबधित उपयोगी कार्यक्रम, टेलीफोन पर वार्ता, रेडियो पर कार्यक्रम, कम्प्यूटर में पहले से सेट किए गए कार्यो आदि को एक ही लाइन द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। कम्प्यूटर पहले से सेट कार्यों को समय-समय पर टी वी के पर्दे पर पेश करता रहेगा। इस प्रकार ‘ऑप्टिकल फाइबर’ से होने वाली क्रांति का क्षेत्र बहुत विस्तत है।

 

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढ़ें:—-

 

ट्रांसफार्मर
ए° सी० बिजली किफायत की दृष्टि से 2000 या अधिक वोल्ट की तैयार की जाती है। घर के साधारण कामों के Read more
डायनेमो सिद्धांत
डायनेमो क्या है, डायनेमो कैसे बने, तथा डायनेमो का आविष्कार किसने किया अपने इस लेख के अंदर हम इन प्रश्नों Read more
बैटरी
लैक्लांशी सेल या सखी बैटरी को प्राथमिक सेल ( प्राइमेरी सेल) कहते हैं। इनमें रासायनिक योग के कारण बिजली की Read more
रेफ्रिजरेटर
रेफ्रिजरेटर के आविष्कार से पहले प्राचीन काल में बर्फ से खाद्य-पदार्थों को सड़ने या खराब होने से बचाने का तरीका चीन Read more
बिजली लाइन
कृत्रिम तरीकों से बिजली पैदा करने ओर उसे अपने कार्यो मे प्रयोग करते हुए मानव को अभी 140 वर्ष के Read more
प्रेशर कुकर
प्रेशर कुकर का आविष्कार सन 1672 में फ्रांस के डेनिस पपिन नामक युवक ने किया था। जब डेनिस पपिन इंग्लेंड आए Read more
इत्र
कृत्रिम सुगंध यानी इत्र का आविष्कार संभवतः सबसे पहले भारत में हुआ। प्राचीन भारत में इत्र द्रव्यो का निर्यात मिस्र, बेबीलोन, Read more
कांच की वस्तुएं
कांच का प्रयोग मनुष्य प्राचीन काल से ही करता आ रहा है। अतः यह कहना असंभव है, कि कांच का Read more
घड़ी
जहां तक समय बतान वाले उपरकण के आविष्कार का प्रश्न है, उसका आविष्कार किसी वैज्ञानिक ने नहीं किया। यूरोप की Read more
कैलेंडर
कैलेंडर का आविष्कार सबसे पहले प्राचीन बेबीलोन के निवासियों ने किया था। यह चंद्र कैलेंडर कहलाता था। कैलेंडर का विकास समय Read more
सीटी स्कैन
सीटी स्कैन का आविष्कार ब्रिटिश भौतिकशास्त्री डॉ गॉडफ्रे हान्सफील्ड और अमरीकी भौतिकविज्ञानी डॉ एलन कोमार्क ने सन 1972 मे किया। Read more
थर्मामीटर
थर्मामीटर का आविष्कार इटली के प्रसिद्ध वैज्ञानिक गेलिलियो ने लगभग सन्‌ 1593 में किया था। गेलिलियो ने सबसे पहले वायु का Read more
पेनिसिलिन
पेनिसिलिन की खोज ब्रिटेन के सर एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने सन् 1928 में की थी, लेकिन इसका आम उपयोग इसकी खोज Read more
स्टेथोस्कोप
वर्तमान समय में खान पान और प्राकृतिक के बदलते स्वरूप के कारण हर मनुष्य कभी न कभी बिमारी का शिकार Read more
क्लोरोफॉर्म
चिकित्सा विज्ञान में क्लोरोफॉर्म का आविष्कार बडा ही महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। क्लोरोफॉर्म को ऑपरेशन के समय रोगी को बेहोश करने Read more
मिसाइल
मिसाइल एक ऐसा प्रक्षेपास्त्र है जिसे बिना किसी चालक के धरती के नियंत्रण-कक्ष से मनचाहे स्थान पर हमला करने के Read more
माइन
सुरंग विस्फोटक या लैंड माइन (Mine) का आविष्कार 1919 से 1939 के मध्य हुआ। इसका आविष्कार भी गुप्त रूप से Read more
मशीन गन
एक सफल मशीन गन का आविष्कार अमेरिका के हिरेम मैक्सिम ने सन 1882 में किया था जो लंदन में काम कर Read more
बम का आविष्कार
बम अनेक प्रकार के होते है, जो भिन्न-भिन्न क्षेत्रों, परिस्थितियों और शक्ति के अनुसार अनेक वर्गो में बांटे जा सकते Read more
रॉकेट
रॉकेट अग्नि बाण के रूप में हजारों वर्षो से प्रचलित रहा है। भारत में प्राचीन काल से ही अग्नि बाण का Read more

 

एनरिको फर्मी
एनरिको फर्मी— इटली का समुंद्र यात्री नई दुनिया के किनारे आ लगा। और ज़मीन पर पैर रखते ही उसने देखा कि Read more
नील्स बोर
दरबारी अन्दाज़ का बूढ़ा अपनी सीट से उठा और निहायत चुस्ती और अदब के साथ सिर से हैट उतारते हुए Read more
एलेग्जेंडर फ्लेमिंग
साधारण-सी प्रतीत होने वाली घटनाओं में भी कुछ न कुछ अद्भुत तत्त्व प्रच्छन्न होता है, किन्तु उसका प्रत्यक्ष कर सकने Read more
अल्बर्ट आइंस्टीन
“डिअर मिस्टर प्रेसीडेंट” पत्र का आरम्भ करते हुए विश्वविख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने लिखा, ई० फेर्मि तथा एल० जीलार्ड के Read more
हम्फ्री डेवी
15 लाख रुपया खर्च करके यदि कोई राष्ट्र एक ऐसे विद्यार्थी की शिक्षा-दीक्षा का प्रबन्ध कर सकता है जो कल Read more
मैरी क्यूरी
मैंने निश्चय कर लिया है कि इस घृणित दुनिया से अब विदा ले लूं। मेरे यहां से उठ जाने से Read more
मैक्स प्लांक
दोस्तो आप ने सचमुच जादू से खुलने वाले दरवाज़े कहीं न कहीं देखे होंगे। जरा सोचिए दरवाज़े की सिल पर Read more
हेनरिक ऊ
रेडार और सर्चलाइट लगभग एक ही ढंग से काम करते हैं। दोनों में फर्क केवल इतना ही होता है कि Read more
जे जे थॉमसन
योग्यता की एक कसौटी नोबल प्राइज भी है। जे जे थॉमसन को यह पुरस्कार 1906 में मिला था। किन्तु अपने-आप Read more
अल्बर्ट अब्राहम मिशेलसन
सन् 1869 में एक जन प्रवासी का लड़का एक लम्बी यात्रा पर अमेरीका के निवादा राज्य से निकला। यात्रा का Read more
इवान पावलोव
भड़ाम! कुछ नहीं, बस कोई ट्रक था जो बैक-फायर कर रहा था। आप कूद क्यों पड़े ? यह तो आपने Read more
विलहम कॉनरैड रॉटजन
विज्ञान में और चिकित्साशास्त्र तथा तंत्रविज्ञान में विशेषतः एक दूरव्यापी क्रान्ति का प्रवर्तन 1895 के दिसम्बर की एक शरद शाम Read more
दिमित्री मेंडेलीव
आपने कभी जोड़-तोड़ (जिग-सॉ) का खेल देखा है, और उसके टुकड़ों को जोड़कर कुछ सही बनाने की कोशिश की है Read more
जेम्स क्लर्क मैक्सवेल
दो पिन लीजिए और उन्हें एक कागज़ पर दो इंच की दूरी पर गाड़ दीजिए। अब एक धागा लेकर दोनों Read more
ग्रेगर जॉन मेंडल
“सचाई तुम्हें बड़ी मामूली चीज़ों से ही मिल जाएगी।” सालों-साल ग्रेगर जॉन मेंडल अपनी नन्हीं-सी बगीची में बड़े ही धैर्य Read more
लुई पाश्चर
कुत्ता काट ले तो गांवों में लुहार ही तब डाक्टर का काम कर देता। और अगर यह कुत्ता पागल हो Read more
लियोन फौकॉल्ट
न्यूयार्क में राष्ट्रसंघ के भवन में एक छोटा-सा गोला, एक लम्बी लोहे की छड़ से लटकता हुआ, पेंडुलम की तरह Read more
चार्ल्स डार्विन
“कुत्ते, शिकार, और चूहे पकड़ना इन तीन चीज़ों के अलावा किसी चीज़ से कोई वास्ता नहीं, बड़ा होकर अपने लिए, Read more
“यूरिया का निर्माण मैं प्रयोगशाला में ही, और बगेर किसी इन्सान व कुत्ते की मदद के, बगैर गुर्दे के, कर Read more
जोसेफ हेनरी
परीक्षण करते हुए जोसेफ हेनरी ने साथ-साथ उनके प्रकाशन की उपेक्षा कर दी, जिसका परिणाम यह हुआ कि विद्युत विज्ञान Read more
माइकल फैराडे
चुम्बक को विद्युत में परिणत करना है। यह संक्षिप्त सा सूत्र माइकल फैराडे ने अपनी नोटबुक में 1822 में दर्ज Read more
जॉर्ज साइमन ओम
जॉर्ज साइमन ओम ने कोलोन के जेसुइट कालिज में गणित की प्रोफेसरी से त्यागपत्र दे दिया। यह 1827 की बात Read more
ऐवोगेड्रो
वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी समस्याओं में एक यह भी हमेशा से रही है कि उन्हें यह कैसे ज्ञात रहे कि Read more
आंद्रे मैरी एम्पीयर
इतिहास में कभी-कभी ऐसे वक्त आते हैं जब सहसा यह विश्वास कर सकता असंभव हो जाता है कि मनुष्य की Read more
जॉन डाल्टन
विश्व की वैज्ञानिक विभूतियों में गिना जाने से पूर्वी, जॉन डाल्टन एक स्कूल में हेडमास्टर था। एक वैज्ञानिक के स्कूल-टीचर Read more
काउंट रूमफोर्ड
कुछ लोगों के दिल से शायद नहीं जबान से अक्सर यही निकलता सुना जाता है कि जिन्दगी की सबसे बड़ी Read more
एडवर्ड जेनर
छः करोड़ आदमी अर्थात लन्दन, न्यूयार्क, टोकियो, शंघाई और मास्कों की कुल आबादी का दुगुना, अनुमान किया जाता है कि Read more
एलेसेंड्रा वोल्टा
आपने कभी बिजली 'चखी' है ? “अपनी ज़बान के सिरे को मेनेटिन की एक पतली-सी पतरी से ढक लिया और Read more
एंटोनी लेवोज़ियर
1798 में फ्रांस की सरकार ने एंटोनी लॉरेंस द लेवोज़ियर (Antoine-Laurent de Lavoisier) के सम्मान में एक विशाल अन्त्येष्टि का Read more
जोसेफ प्रिस्टले
क्या आपको याद है कि हाल ही में सोडा वाटर की बोतल आपने कब पी थी ? क्‍या आप जानते Read more
हेनरी कैवेंडिश
हेनरी कैवेंडिश अपने ज़माने में इंग्लैंड का सबसे अमीर आदमी था। मरने पर उसकी सम्पत्ति का अन्दाजा लगाया गया तो Read more
बेंजामिन फ्रैंकलिन
“डैब्बी", पत्नी को सम्बोधित करते हुए बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा, “कभी-कभी सोचता हूं परमात्मा ने ये दिन हमारे लिए यदि Read more
सर आइज़क न्यूटन
आइज़क न्यूटन का जन्म इंग्लैंड के एक छोटे से गांव में खेतों के साथ लगे एक घरौंदे में सन् 1642 में Read more
रॉबर्ट हुक
क्या आप ने वर्ण विपर्यास की पहेली कभी बूझी है ? उलटा-सीधा करके देखें तो ज़रा इन अक्षरों का कुछ Read more
एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक
सन् 1673 में लन्दन की रॉयल सोसाइटी के नाम एक खासा लम्बा और अजीब किस्म का पत्र पहुंचा जिसे पढ़कर Read more
क्रिस्चियन ह्यूजेन्स
क्रिस्चियन ह्यूजेन्स (Christiaan Huygens) की ईजाद की गई पेंडुलम घड़ी (pendulum clock) को जब फ्रेंचगायना ले जाया गया तो उसके Read more
रॉबर्ट बॉयल
रॉबर्ट बॉयल का जन्म 26 जनवरी 1627 के दिन आयरलैंड के मुन्स्टर शहर में हुआ था। वह कॉर्क के अति Read more
इवेंजलिस्टा टॉरिसेलि
अब जरा यह परीक्षण खुद कर देखिए तो लेकिन किसी चिरमिच्ची' या हौदी पर। एक गिलास में तीन-चौथाई पानी भर Read more
विलियम हार्वे
“आज की सबसे बड़ी खबर चुड़ैलों के एक बड़े भारी गिरोह के बारे में है, और शक किया जा रहा Read more
“और सम्भव है यह सत्य ही स्वयं अब किसी अध्येता की प्रतीक्षा में एक पूरी सदी आकुल पड़ा रहे, वैसे Read more
गैलीलियो
“मै गैलीलियो गैलिलाई, स्वर्गीय विसेजिओ गैलिलाई का पुत्र, फ्लॉरेन्स का निवासी, उम्र सत्तर साल, कचहरी में हाजिर होकर अपने असत्य Read more
आंद्रेयेस विसेलियस
“मैं जानता हूं कि मेरी जवानी ही, मेरी उम्र ही, मेरे रास्ते में आ खड़ी होगी और मेरी कोई सुनेगा Read more
निकोलस कोपरनिकस
निकोलस कोपरनिकस के अध्ययनसे पहले– “क्यों, भेया, सूरज कुछ आगे बढ़ा ?” “सूरज निकलता किस वक्त है ?” “देखा है Read more
लियोनार्दो दा विंची
फ्लॉरेंस ()(इटली) में एक पहाड़ी है। एक दिन यहां सुनहरे बालों वाला एक नौजवान आया जिसके हाथ में एक पिंजरा Read more
गैलेन
इन स्थापनाओं में से किसी पर भी एकाएक विश्वास कर लेना मेरे लिए असंभव है जब तक कि मैं, जहां Read more
आर्किमिडीज
जो कुछ सामने हो रहा है उसे देखने की अक्ल हो, जो कुछ देखा उसे समझ सकने की अक्ल हो, Read more
एरिस्टोटल
रोजर बेकन ने एक स्थान पर कहा है, “मेरा बस चले तो मैं एरिस्टोटल की सब किताबें जलवा दू। इनसे Read more
हिपोक्रेटिस
मैं इस व्रत को निभाने का शपथ लेता हूं। अपनी बुद्धि और विवेक के अनुसार मैं बीमारों की सेवा के Read more
यूक्लिड
युवावस्था में इस किताब के हाथ लगते ही यदि किसी की दुनिया एकदम बदल नहीं जाती थी तो हम यही Read more

write a comment

%d bloggers like this: