गोरखनाथ का मेला गोरखपुर उत्तर प्रदेश

गोरखनाथ का मेला

उत्तर प्रदेश का गोरखपुर बाबा गुरु गोरखनाथ के नाम से जाना जाता है। नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक तथा प्रथम साधु गुरु गोरखनाथ ने यही रहकर नाथ सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार किया था। वहा नगर के समीप आज भी विशाल मंदिर, पार्श्व मे तालाब बना हुआ है जहा विभिन्‍न अवसरों पर वैसे भी मेला का सा दृश्य उपस्थित हो जाता है। तब भी मकर संक्राति (खिचडी) के अवसर पर यहा बहुत बड़ा गोरखनाथ का मेला लगता है जिसमे लाखो श्रद्धालु यहा आकर जल, अक्षत, खिचडी, फल, फूल, मिष्ठान तिलकूट चढाते है।

 

 

यहा का बाबा गोरखनाथ का मेला लगभग एक माह चलता है। बाबा गोरखनाथ के मेले में देश-विदेश के नाथ सम्प्रदाय के मतानुयायी यहा आते और भजन-कीर्तन मे सम्मिलित होते है। यहा इतना चढावा आता है कि साधु-सतों के भोजन एवं अन्य खर्चे उसी से निकल आते है। सैकड़ों मन खिचडी चढती है। इसलिए इसे गोरखनाथ खिचड़ी मेला भी कहते है। यहा वैसे तो वर्ष भर भजन-कीर्तन चलता रहता है, किंतु खिचडी माह जनवरी मे वृहद आयोजन होता है। यह विश्व-प्रसिद्ध मेला है।

 

गोरखनाथ का मेला
गोरखनाथ का मेला

 

गोरखनाथ का मेला

 

इस मेले मे काष्ठ कला की वस्तुए, मिट॒टी के टेराकोटा पात्र बिकने के लिए आते हैं जिनका बडे पैमाने पर क्रय-विक्रय होता है। इसके अलावा गोरखनाथ के मेले में विभिन्न प्रकार के छोटे बड़े झूले और मनोरंजन के अनेक साधन भी होते हैं। खरीदारी के लिए मेलें में विभिन्न प्रकार की दुकानें लगती है। वैसे तो मदिर का ट्रस्ट है, किंतु इस जनपद, नगर महापालिका की ओर से भी मेले की समुचित व्यवस्था की जाती है। इससे उनकी आय मे लाखो की वृद्धि हो जाती है। चूकि यह स्थान शहर के पास स्थित है, अत यातायात, संदेशवाहन के सभी साधन उपलब्ध रहते है। यात्रियों के टिकने के लिए धर्मशालाओ के अतिरिक्त होटल, व्यक्तिगत तथा पर्यटन विभाग द्वारा समुचित व्यवस्था होती है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से सुरक्षा की सम्पूर्ण व्यवस्था होती है।

 

 

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