गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जीवन परिचय, वाणी, गुरूगददी आदि

गुरु हरगोबिंद साहिब जी

श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहीदी के बाद आपने जब देखा कि मात्र शांति के साथ कठिन समय ठीक नहीं हो सकता तो दुष्ट हाकिमों के साथ लोहा लेने के लिए तथा जुल्म को नष्ट करने के लिए गुरूगददी से बिराजते समय दो तलवारें एक मीरी की तथा दूसरी पीरी की सजाई, जिसका अर्थ था कि मीरी तेग धर्म की रक्षा के चमकेगी तथा पीरी शांति व भक्ति को प्रकट करेगी। गुरू हरगोबिंद साहिब जी महाराज सिक्खों के छठे गुरू है। पंचम गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज द्वारा इन्हें छठे गुरु के रूप में गुरूगददी सौपी थी।

 

गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जीवन परिचय

 

नाम —-  श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज

जन्म —- 1 आषाढ़ वदी एकम वि. सं. 1652 (16 जून 1595 ई.)

जन्म स्थान —- श्री वडाली साहिब, जिला अमृतसर

पिता —- श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज

माता —- माता गंगा जी

पत्नी —- माता नानकी, महादेव, दमोदरी जी

पुत्र —- बाबा गुरूदित्ता, बाबा सूरजमल, बाबा अनी राय, बाबा अटल राय, गुरू तेगबहादुर जी

सुपुत्री —- बीबी वीरो जी

गुरूगददी —- ज्येष्ठ कृष्णा अष्टमी, सं. 1633 वि. (11 जून 1606 ई.)

ज्योति ज्योत —– चैत्र सुदी पंचमी वि.सं. 1701 (3 मार्च 1644 ई.) कीरतपुर साहिब

 

 

गुरु हरगोबिंद साहिब जी
गुरु हरगोबिंद साहिब जी

 

अकाल तख्त की रचना:—

अकाल तख्त की रचना आषाढ़ शुक्ल 10वी वि.सं. 1663 को ही जहां से युद्ध के लिए प्रार्थना करके सैनिक जालिमों पर चढ़ाई करते थे। शाही ठाठ बाठ में रहते थे। सिर पर कलगी तथा शस्त्रों से सदा तैयार रहते थे और घोड़े की सवारी करते थे। अकाल तख्त साहिब की रचना करके महाराज की घोड़ों व शस्त्रों में अधिक रूचि रहने लगी। जो गुरुसिख आपको घोड़े व शस्त्र भेंट करता था आप उस पर अधिक प्रसन्न होते थे।

 

 

ढाडी परम्परा का जन्म:—

गुरुसीखों को जहां युद्ध अभ्यास करवाने का कार्यक्रम बनवाया वहीं ढाडी दरबार की मर्यादा चलाई उनसे आप वीर रस पूर्ण वारें सुनते तथा सूरमाओं के ठंड़े खून में अनोखी वीरता का जोश जगाते, जिससे उनके अंदर छुपी बुजदिली व डरपोक पने का नाश होता, स्वाभिमान की भावना पैदा होती तथा देश धर्म के लिए मर मिटने का शौक पैदा होता।

 

 

चन्दू ने जहांगीर को भड़काया:—

एक बार चन्दू ने गुरु जी को पत्र लिखा कि आप मेरी लड़की का रिश्ता स्वीकार करें तथा पिछली बातों को भूल जाये, पर महाराज ने साफ इंकार कर दिया तो उसने जहांगीर को बहुत भड़काया कि सतगुरु कलगी सजा कर बादशाही शान में रहता है। अकाल तख्त की सृजना करके, सेना तैयार कर रखी है। किसी दिन आपके लिए उसे संभालना कठिन हो जायेगा। उन्होंने संतों वाली पिता पुरखी की रीति को त्याग दिया है तथा जवानों को शस्त्र विद्या देकर शस्त्रों द्वारा लैस कर रहे है।

 

 

 

जहांगीर के साथ मुलाकात:—

चन्दू की बात सुनकर जहांगीर ने गुरु जी को दिल्ली बुला भेजा। बादशाह से मिलने के लिए चले तो भाई गुरदास व बाबा बुड्ढा जी को गुरु घर की सेवा सौंप गए।
गुरू जी भाई बिधी चन्द,जेठा,पैड़ा,मोखा,लोकचद्र लालू ,बालू आदि शूरवीर जवान लेकर दिल्ली में मंजनू के टीले बादशाह से मिले । बादशाह ने शाही स्वागत किया तथा पास बिठाकर प्रश्न किया कि मजहब कौन सा अच्छा है? महाराज ने उत्तर दिया। मजहब तो वहीं अच्छा है जो अल्लाह की दरगाह में मंज़ूर हो जाय तो नेक काम करें,पर उपकार करें तथा उसकि याद में जुड़कर उसकी इबादत करना सिखलाये।

 

 

 

शेर का शिकार:—-

एक दिन शेर का शिकार खेलने गये। घने जंगल में एक शेर गर्जना करते हुए लपक पड़ा। बादशाह ने बहादुर साथियों से कहा कि शिकार करो पर कोई भी डरता आगे न बढ़ा। जब गुरु जी से विनती की तो आप ढाल तलवार लेकर शेर का सामना करने लगे। तलवार शेर के पेट में जा धंसी और वह चित्त हो गया। यह देखकर बादशाह बहुत प्रभावित हुआ।

 

 

 

सच्चा पातशाह:—

गुरु जी जहांगीर बादशाह के साथ आगरा पहुंचे तो नगर के बाहर बादशाही कैंप के साथ गुरुजी का कैंप भी लगवाया गया। महाराज ने दीवान सजा रखा था तथा नाम वाणी का प्रवाह चल रहा था, तो जहांगीर के कैंप में एक घसियार सिक्ख सिर पर घास की गठड़ी उठाये हुए पहुंचा। गठड़ी जमीन पर रखकर एक टका जहांगीर के आगे मत्था टेक कर विनती की महाराज मुझे मुक्ति देवें। जहांगीर ने कहा– मैं तो दुनिया का हर पदार्थ दे सकता हूँ। मुक्ति प्रदान करने वाला सच्चा पातशाह तो साथ वाले कैंप में है।

घसियारे ने फौरन टका और घास का गठरा उठाया और रवाना होने लगा तो वहां खड़े अहलकारों ने कहा कि रखी हुई भेंट उठाया नहीं करते ओर जो कुछ भी इनाम मांगना हो मांग लो पर सिक्ख तो श्रृद्धा से भरपूर था उसने किसी की भी परवाह नहीं की और गठरी व टका उठाकर गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज के खेमे में आकर भेट सच्चे पातशाह के सामने ला रखी।

 

 

 

हरिगोविंदपुर बसाना:—-

गुरु जी को दूसरे युद्ध गांव रोहेला में फतेह प्राप्त हुई तो आपने वहां एक गड्ढा खुदवाकर उसमें सूबा अब्दुल खां और उसके सथियों के शव दबा दिये और मिट्टी डलवाकर एक बड़ा चबूतरा बनवाया उस पर विराजमान होकर पास ही अपने शहीद साथियों का संस्कार करवाकर राख व्यास में प्रवाहित करवा दी। जिस चबुतरे पर गुरु जी बैठते थे उसका नाम दमदमा साहिब रखा गया। दीवान सजाकर गांव में एक सुंदर नगर तैयार करवाने का विचार किया।
गुरु जी ने व्यास नदी के किनारे एक नया नगर बसाने की तैयारी शुरू कर दी। जब बाबा बुड्ढा जी को समाचार मिला तो भाई गुरदास आदि प्रमुख सिक्खों को साथ लेकर आ पहुंचे। सब लोग बहुत प्रसन्न हुए तथा नये नगर का नाम हरिगोविंदपुर रखने की विनती की जिसे महाराज ने स्वीकार कर लिया और इस नये नगर का नाम हरिगोविंदपुर रखा गया।

 

 

 

शुद्ध पाठ जपुजी साहिब:—

एक दिन गुरु जी ने दमदमा साहिब दीवान की समाप्ति कर कहा कि जो कोई सिक्ख शुद्ध लगा मात्र सहित जपुजी साहिब का पाठ सुनायेगा उसे मुंह मांगी मुराद मिलेगी। भाई गोपाल जी ने विनती करी कि मैं सुनाता हूँ। इस पर गुरु जी ने उनके लिए सुंदर आसन बिछवाया। सारी संगत पाठ श्रवण करने के लिए सज कर बैठ गई। भाई जी ने इतना शुद्ध व स्पष्ट लिव जोड़कर पाठ सुनाया कि गुरु महाराज उसे अपनी गद्दी बख्शने के लिए तैयार हो गये। जब “पवन गुरु पानी पिता” का श्लोक पढ़ने लगा तो उसके मन में विचार आया कि गुरु जी मुझे अमुक घोड़ा सोने की कोठी सहित दे देवें तो बहुत अच्छा रहे। पाठ की समाप्ति हुई तो गुरु जी मुस्कुराकर कहने लगे, भोले मानुष तू तो बहुत ही नीचे जा गिरा बस एक छोटे से दुनियावी पदार्थ पर रीझ गया, हम तो तुम्हें गुरु नानक पातशाह की गद्दी ही देने को तैयार थे। लेकिन तुम सोने की काठी वाला घोड़ा ही ले जाओ। सारी संगत महाराज के चरणों में लेट कर धन्य धन्य गुरु हरिगोबिन्द साहिब जी महाराज महाराज जपने लगी।

 

 

 

शाहजहां का बाज पकड़ना:—

एक बार शाहजहां का बाज उड़कर गुरु जी के पास आ गया। सिक्खों ने पकड़ लिया। बाज बहुत सुंदर था। महाराज की आज्ञा से वापस नहीं किया गया। आजकल गुरपलाह जिला अमृतसर में स्थान बना हुआ है, वहां पर शाही फौज के साथ मुठभेड़ हुई। दुश्मन हार गये।

 

 

 

बाबा गुरुदीत्ता जी :—–

एक बार कीरतपुर साहिब में बाबा गुरुदीत्ता जी के शिकारी सिक्खों से हिरन के भ्रम में एक गाय को तीर लग गया और वह गाय शांत हो गई। जिन पहाडियों की वह गाय थी उन्होंने शिकारियों को घेर लिया और नुकसान की भरपाई करने को कहा। बाबा गुरुदीत्ता जी भी वहां पहुंच गये तो पहाड़ी कहने लगे आप तो बड़े शक्तिवान हो अब इस मरी गाय को जिंदा करो। हम बहुत गरीब लोग हैं हमारा तो बहुत नुक्सान हो गया है। बाबा जी ने सोचा यह तो गो हत्या हो गई हैं लोगों को पता चलेगा तो उलटी चर्चा चलेगी इसलिए एक वृक्ष की टहनी तोड़कर गाय के मुख से छुवाकर कहा गऊ उठो पठे खाओ, तो गाय ऐसे उठ खड़ी हुई जैसे जानबूझ कर सो रही हो।

जब गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज को इस बात का पता चला तो कहा कि अपने भाई अटल राय की तरह तुमने भी ईश्वरेच्छा के विपरीत काम नहीं किया। यह बात सुनकर बाबा गुरूदित्ता जी नमस्कार करके साईं बुड्ढन शाह की कब्र के समीप पहाडी पर चढ़ गये और वहां ज्योति ज्योत समा गये। गुरु जी ने अपने हाथो चंदन की चिता बनाकर संस्कार किया और अनेक वरदान दिये।

 

 

 

हरिराय जी को गुरूगददी:—

गुरुदीत्ता जी उदासीन हो गये थे इसलिए गुरु जी ने उनके पुत्र अपने पौत्र हरिराय जी को गुरु गद्दी सौंप दी तथा स्वयं कीरतपुर में ही ज्योति ज्योत में समा गये।

 

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढ़ें:—–

 

पटना साहिब के फोटो
बिहार की राजधानी पटना शहर एक धार्मिक और ऐतिहासिक शहर है। यह शहर सिख और जैन धर्म के अनुयायियों के Read more
हेमकुंड साहिब के सुंदर दृश्य
समुद्र तल से लगभग 4329 मीटर की हाईट पर स्थित गुरूद्वारा श्री हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) उतराखंड राज्य (Utrakhand state) Read more
नानकमत्ता साहिब के सुंदर दृश्य
नानकमत्ता साहिब सिक्खों का पवित्र तीर्थ स्थान है। यह स्थान उतराखंड राज्य के उधमसिंहनगर जिले (रूद्रपुर) नानकमत्ता नामक नगर में Read more
शीशगंज साहिब गुरूद्वारे के सुंदर दृश्य
गुरुद्वारा शीशगंज साहिब एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण गुरुद्वारा है जो सिक्खों के नौवें गुरु तेग बहादुर को समर्पित है। Read more
आनंदपुर साहिब के सुंदर दृश्य
आनंदपुर साहिब, जिसे कभी-कभी बस आनंदपुर आनंद का शहर" कहा जाता है के रूप में संदर्भित किया जाता है, यह Read more
हजूर साहिब नांदेड़ के सुंदर दृश्य
हजूर साहिब गुरूद्वारा महाराष्ट्र राज्य के नांदेड़ जिले में स्थापित हैं। यह स्थान गुरु गोविंद सिंह जी का कार्य स्थल Read more
स्वर्ण मंदिर अमृतसर के सुंदर दृश्य
स्वर्ण मंदिर क्या है? :- स्वर्ण मंदिर सिक्ख धर्म के अनुयायियों का धार्मिक केन्द्र है। यह सिक्खों का प्रमुख गुरूद्वारा Read more
दुख भंजनी बेरी के सुंदर दृश्य
दुख भंजनी बेरी ट्री एक पुराना बेर का पेड़ है जिसे पवित्र माना जाता है और इसमें चमत्कारी शक्ति होती Read more
श्री अकाल तख्त साहिब अमृतसर के सुंदर दृश्य
यह ऐतिहासिक तथा पवित्र पांच मंजिलों वाली भव्य इमारत श्री हरमंदिर साहिब की दर्शनी ड्योढ़ी के बिल्कुल सामने स्थित है। Read more
गुरूद्वारा बाबा अटल राय जी के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा बाबा अटल राय जी अमृतसर का एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। हर साल हरमंदिर साहिब जाने वाले लाखों तीर्थयात्रियों में Read more
पांवटा साहिब के सुंदर दृश्य
गुरुद्वारा पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। पांवटा साहिब पर्यटन स्थल Read more
तख्त श्री दमदमा साहिब के सुंदर दृश्य
यह तख्त साहिब भटिंडा ज़िला मुख्यलय से 35 किमी दूर तलवांडी साबो में बस स्टेशन के बगल में स्थापित है Read more
गुरू ग्रंथ साहिब
जिस तरह हिन्दुओं के लिए रामायण, गीता, मुसलमानों के लिए कुरान शरीफ, ईसाइयों के लिए बाइबल पूजनीय है। इसी तरह Read more
पांच तख्त साहिब के सुंदर दृश्य
जैसा की आप और हम जानते है कि सिक्ख धर्म के पांच प्रमुख तख्त साहिब है। सिक्ख तख्त साहिब की Read more
खालसा पंथ
"खालसा पंथ" दोस्तों यह नाम आपने अक्सर सुना व पढ़ा होगा। खालसा पंथ क्या है। आज के अपने इस लेख Read more
गुरूद्वारा गुरू का महल के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा गुरू का महल कटड़ा बाग चौक पासियां अमृतसर मे स्थित है। श्री गुरू रामदास जी ने गुरू गद्दी काल Read more
गुरूद्वारा शहीदगंज साहिब के सुंदर दृश्य
गुरुद्वारा शहीदगंज साहिब बाबा दीप सिंह जी सिक्खों की तीर्थ नगरी अमृतसर में स्थित है। गुरूद्वारा शहीदगंज साहिब वह जगह Read more
लोहगढ़ साहिब के सुंदर दृश्य
अमृतसर शहर के कुल 13 द्वार है। लोहगढ़ द्वार के अंदर लोहगढ़ किला स्थित है। तत्कालीन मुगल सरकार पर्याप्त रूप Read more
सिख धर्म के पांच ककार
प्रिय पाठकों अपने इस लेख में हम सिख धर्म के उन पांच प्रतीक चिन्हों के बारें में जानेंगे, जिन्हें धारण Read more
तरनतारन गुरूद्वारा साहिब के सुंदर दृश्य
तरनतारन गुरूद्वारा साहिब, भारत के पंजाब राज्य में एक शहर), जिला मुख्यालय और तरन तारन जिले की नगरपालिका परिषद है। Read more
गुरूद्वारा मंजी साहिब आलमगीर लुधियाना के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा मंजी साहिब लुधियाना के आलमगीर में स्थापित है। यह स्थान लुधियाना रेलवे स्टेशन से 16 किलोमीटर की दूरी पर Read more
मंजी साहिब गुरुद्वारा, नीम साहिब गुरूद्वारा कैथल के सुंदर दृश्य
मंजी साहिब गुरूद्वारा हरियाणा के कैथल शहर में स्थित है। कैथल भारत के हरियाणा राज्य का एक जिला, शहर और Read more
दुख निवारण साहिब पटियाला के सुंदर दृश्य
दुख निवारण गुरूद्वारा साहिब पटियाला रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड से 300 मी की दूरी पर स्थित है। दुख निवारण Read more
गोइंदवाल साहिब के सुंदर दृश्य
गुरू श्री अंगद देव जी के हुक्म से श्री गुरू अमरदास जी ने पवित्र ऐतिहासिक नगर श्री गोइंदवाल साहिब को Read more
नानकसर साहिब कलेरा जगराओं के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा नानकसर कलेरा जगराओं लुधियाना जिले की जगराओं तहसील में स्थापित है।यह लुधियाना शहर से 40 किलोमीटर और जगराओं से Read more
गुरूद्वारा चरण कंवल साहिब माछीवाड़ा के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा चरण कंवल साहिब लुधियाना जिले की माछीवाड़ा तहसील में समराला नामक स्थान पर स्थित है। जो लुधियाना शहर से Read more
मुक्तसर साहिब के सुंदर दृश्य
मुक्तसर फरीदकोट जिले के सब डिवीजन का मुख्यालय है। तथा एक खुशहाल कस्बा है। यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थान भी है। Read more
गुरूद्वारा गुरू तेग बहादुर धुबरी साहिब के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा श्री तेगबहादुर साहिब या धुबरी साहिब भारत के असम राज्य के धुबरी जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित Read more
गुरूद्वारा नानक झिरा साहिब के सुंदर दृश्य
गुरूद्वारा नानक झिरा साहिब कर्नाटक राज्य के बीदर जिले में स्थित है। यह सिक्खों का पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थान Read more
नाड़ा साहिब गुरूद्वारा पंचकूला
नाड़ा साहिब गुरूद्वारा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से 5किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। नाड़ा साहिब गुरूद्वारा हरियाणा प्रदेश के पंचकूला Read more
गुरुद्वारा पिपली साहिब पुतलीघर अमृतसर
गुरुद्वारा पिपली साहिब अमृतसर रेलवे स्टेशन से छेहरटा जाने वाली सड़क पर चौक पुतलीघर से आबादी इस्लामाबाद वाले बाजार एवं Read more
गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब, यह गुरुद्वारा रूपनगर जिले के किरतपुर में स्थित है। यह सतलुज नदी के तट पर बनाया गया Read more
गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब चमकौर
गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब श्री चमकौर साहिब में स्थापित है। यह गुरुद्वारा ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। इस स्थान पर श्री गुरु गोबिंद Read more
गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी
गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी नामक कस्बे में स्थित है। सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला जिले का एक प्रमुख नगर है। तथा Read more
गुरुद्वारा हट्ट साहिब
गुरुद्वारा हट्ट साहिब, पंजाब के जिला कपूरथला में सुल्तानपुर लोधी एक प्रसिद्ध कस्बा है। यहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु Read more
गुरुद्वारा मुक्तसर साहिब
मुक्तसर जिला फरीदकोट के सब डिवीजन का मुख्यालय है तथा एक खुशहाल कस्बा है। यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थान भी है। Read more
गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर लोकसभा के सामने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब स्थित है। गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब की स्थापना Read more
दरबार साहिब तरनतारन
श्री दरबार साहिब तरनतारन रेलवे स्टेशन से 1 किलोमीटर तथा बस स्टैंड तरनतारन से आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित Read more
गुरुद्वारा बिलासपुर साहिब
गुरुद्वारा बिलासपुर साहिब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर शहर मे स्थित है बिलासपुर, कीरतपुर साहिब से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर Read more
मोती बाग गुरुद्वारा साहिब
मोती बाग गुरुद्वारा दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। गुरुद्वारा मोती बाग दिल्ली के प्रमुख गुरुद्वारों में से Read more
गुरुद्वारा मजनूं का टीला साहिब
गुरुद्वारा मजनूं का टीला नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 15 किलोमीटर एवं पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से 6 किलोमीटर की दूरी Read more
बंगला साहिब गुरुद्वारा
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर की दूरी पर गोल डाकखाने के पास बंगला साहिब गुरुद्वारा स्थापित है। बंगला Read more
लखनऊ गुरुद्वारा गुरु तेगबहादुर साहिब
उत्तर प्रदेश की की राजधानी लखनऊ के जिला मुख्यालय से 4 किलोमीटर की दूरी पर यहियागंज के बाजार में स्थापित लखनऊ Read more
नाका गुरुद्वारा
नाका गुरुद्वारा, यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा नाका हिण्डोला लखनऊ में स्थित है। नाका गुरुद्वारा साहिब के बारे में कहा जाता है Read more
गुरुद्वारा गुरु का ताल आगरा
आगरा भारत के शेरशाह सूरी मार्ग पर उत्तर दक्षिण की तरफ यमुना किनारे वृज भूमि में बसा हुआ एक पुरातन Read more
गुरुद्वारा बड़ी संगत नीचीबाग बनारस
गुरुद्वारा बड़ी संगत गुरु तेगबहादुर जी को समर्पित है। जो बनारस रेलवे स्टेशन से लगभग 9 किलोमीटर दूर नीचीबाग में Read more
%d bloggers like this: