गलताजी मंदिर का इतिहास – हिस्ट्री ऑफ गलताजी धाम जयपुर

नगर के कोलाहल से दूर पहाडियों के आंचल में स्थित प्रकृति के आकर्षक परिवेश से सुसज्जित राजस्थान के जयपुर नगर के पूर्व में मैदानी धरातल से 350 फीट ऊपर तथा मुख्य नगर से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर एक रमणीक तीर्थ स्थान है। जो गलताजी कहलाता है। जयपुर शहर से गलताजी का सामान्य मार्ग सूरजपोल द्वार से होकर जाता हैं। सूरजपोल अथवा गलता दरवाजा से बाहर निकलने पर लगभग डेढ़ किलोमीटर चलने के बाद पर्वत की बडी बडी श्रेणियाँ है। जो गलताजी की पहाडियां कहलाती है। इन्हीं पर्वत श्रेणियों के पास एक और द्वार बना हुआ है। जयपुर शहर से इस द्वार तक पक्की सड़क बनी हुई है। सडक़ के अंतिम छोर से ही पर्वतों के बीच एक घाटी आरंभ होती है। जो गलताजी की घाटी कहलाती है। यही घाटी सर्पाकार चलती हुई गलता कुंड तक चली गई हैं। यह पुण्य स्थली गालव ऋषि की तपोभूमि होने के कारण गालव आश्रम के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। जिसका नाम समय के साथ साथ बिगडकर गालव से गलता हो गया है। जो आज गलताजी तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। गालव ऋषि ने 15 वी शताब्दी पूर्व इस सुरम्य, शांत स्थली को तपस्या के अनुकूल पाकर अपनी तपोभूमि बनाया था।

 

हिस्ट्री ऑफ गलताजी जयपुर राजस्थान


गलताजी तीर्थ चारों ओर से ऊंची ऊंची पर्वतमालाओं से घिरा हुआ अत्यंत रमणीक स्थान है। इसमें प्रसिद्ध आठ कुंड है। जिनके नाम है:– यज्ञ कुंड, कर्म कुंड, चौकोर कुंड, मर्दाना कुंड, जनाना कुंड, बावरी कुंड, केले का कुंड, और लाल कुंड। इन सब मे बडा और प्रधान कुंड मर्दाना कुंड है। गलताजी के इस बडे कुंड में संगमरमर का एक गौमुख झरना निरंतर गिरता रहता है। गौमुख से गिरने वाली इस जल धारा के उद्गम स्त्रोंतों का पता आज तक भी नहीं चल पाया है। अतीत काल से यह जल धारा निर्बाध रूप से गौमुख से कुंड मे गिरती चली आ रही है। यह जल धारा गंगा धारा मानी जाती है। ऐसा माना जाता हैं कि गालव मुनि की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा जी यहां प्रकट हो गई जो आज भी नियमित प्रवाह में है।

 

गलताजी टेम्पल जयपुर के सुंदर दृश्य
गलताजी टेम्पल जयपुर के सुंदर दृश्य


एक ओर किवदंती के अनुसार माना जाता है कि बहुत पहले की बात है जब एक बार जयपुर के महाराजा शिकार खेलते हुए पर्वतांचल में स्थित ऋषि के आश्रम की ओर आ निकले। इस आश्रम के समीप साधु महात्मा सिंह का रूप धारण कर पर्वतों पर विचरण करते थे। राजा ने एक सिंह पर तीर चलाया जो सिंह के पिछले पांव में लगा और यहां रक्त की धार बह निकली। उसी समय यह सिंह अपना रूप छोडकर एक महात्मा के वास्तविक रूप में प्रकट हुआ, और राजा से कहा !राजन! आपने इस आश्रम की ओर शिकार खेलने की चेष्टा कैसे की?। इसके फलस्वरूप आपको कुष्ठ रोग हो। यह श्राप देकर वह महात्मा गायब हो गए।

 


कहते है कि वही गालब ऋषि थे। राजा अपने महल में लौट आया किंतु उसी दिन से वह कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया और अधिक पीडित रहने लगा। बहुत उपचार करवाने पर भी राजा को रोग से छुटकारा न मिला। दुखी होकर राजा अपने कुछ साथियों के साथ महात्मा की तलाश में उसी आश्रम की ओर चला। अत्यंत प्रयत्न के बाद महात्मा एक पर्वत की गुफा में समाधिस्थ मिले। समाधि के पास राजा ने प्रार्थना की हे प्रभु! मै अनजान में अज्ञानता वश इधर शिकार खान लने चला गया था। मेरा अपराध क्षमा किजिए, और कृपया इस रोग से मुक्ति का कोई उपाय बताए। दयावान महात्मा ने राजा से कहा राजन! इस स्थान पर एक पक्का आश्रम और इसमें एक विशाल कुंड बनवा दिजिए। मै उस कुंड मै गंगा की एक जल धारा ला दूंगा। वह जल धारा जब तक संसार रहेगा तब तक कभी बंद नहीं होगी। उसी गंगा धारा मे स्नान करने से तेरा कुष्ठ रोग जाता रहेगा और जो कोई उसमें श्रद्धा पूर्वक स्नान करेगा या जल का आचमन करेगा वह पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होगा। राजा ने ऐसा ही अनुसरण किया और उसका कुष्ठ रोग जाता रहा। आज भी भक्तों का मानना है कि इस कुंड में स्नान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

गलताजी टेम्पल जयपुर के सुंदर दृश्य
गलताजी टेम्पल जयपुर के सुंदर दृश्य

 


गलताजी के जनाने कुंड के दक्षिण की ओर एक छोटी पहाडी पर महात्मा पियाहारी की गुफा है। गुफा के द्वार पर महात्मा जी का एक चित्र कांच में जडा हुआ है। माना जाता है कि यह गुफा कोसों दूर तक चली गयी है। यह भी कहा जाता है कि इस गुफा की लम्बाई का पता लगाने के लिए एक बार कुछ साधु इसमें घुस गए थे। उनका बाद में कुछ भी पता न लगा। तब से इस गुफा का द्वार राज्य की ओर से सदैव के लिए बंद कर दिया गया। महात्मा पियाहारी जी के चित्र के सामने पूर्व जयपुर राज्य की ओर से अखंड धूनी लगी रहती थी। जो कभी नहीं बूझती थी। पियाहारी जी एक बडे तपस्वी और पहुंचे हुए महात्मा हुए हैं। कहते है कि इनकी तपस्या के बल से सिंह और गाय एक ही घाट पर पानी पिते थे। और इनकी आंख का इशारा पाते ही बडे बडे हिसंक जंतु भी इनके चरणों पर लौटने लगते थे। ये परम योगी महात्मा संत कवि नाभा जी के शिष्य थे। जयपुर के भूतपूर्व महाराजा ईश्वरीय सिंह जी इनके पूर्ण भक्त थे और उन्होंने इनसे कई योग सिद्धि की बातें सीखी थी।

 




गलताजी तीर्थ तपस्वी महात्माओं के लिए सदैव से प्रसिद्ध रहा है। किवदंतियों के अनुसार यहां कई बार पर्वतों की लुप्त गुफाओं मे साधु महात्मा तपस्या करते हुए पाये गए हैं। यह भी कहा जाता है कि सन् 1917 ईसवीं में जब गलता जी के मर्दाना कुंड की छटाई और खुदाई हुई थी। तब उस समय कुंड के अंदर एक तिवारा निकला था। जिसमें सात साधु तपस्या करते हुए दिखाई दिए थे। किंतु क्षणभर में वे विलीन हो गए थे।

 


गलताजी के प्रमुख स्थान पर जयपुर नगर के ठीक सामने पूर्व दिशा की ओर सूर्य भगवान का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ से जयपुर शहर का दृश्य अत्यंत ही मनोहारी दिखाई पडता है। मंदिर में सूर्य भगवान की स्वर्ण प्रतिमा है। प्रति वर्ष शुक्ल सप्तमी (सूर्य सप्तमी) के दिन यही से सूर्य भगवान का रथ निखलता है। उस दिन यहाँ विशाल मेला लगता है। सूर्य भगवान की स्वर्ण मूर्ति एक विशाल चांदी के रथ में विराजमान कर उसकी शोभा यात्रा निकाली जाती हैं। गलताजी के सूर्य मंदिर से लेकर नगर मे त्रिपोलिया द्वार तक बडा भारी मेला रहता है। रथ पुनः घुमकर अपने मंदिर मे चला जाता हैं। सूर्य मंदिर की स्थिति ऐसी उत्तम है कि मुख्य जयपुर के निवासी जब प्रभात की बेला में उठकर सूर्य की ओर दृष्टि डालते है। तो ऐसा प्रतीत होता है कि मानो सूर्य ठीक उसी सूर्य मंदिर में से निकल रहा हो।

 



सूर्य मंदिर के अतिरिक्त गलताजी तीर्थ स्थित अन्य मंदिरों में एक प्रमुख मंदिर महादेव जी का भी है। गलता तीर्थ पर सूर्य सप्तमी, राम नवमी, निर्जला एकादशी, तथा जल जूलनी एकादशी के दिन बडे भारी मेले लगते है। और बडी संख्या मे श्रृद्धालु यात्री आते है। चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण और स्नानार्थ पर्वो पर भी यहां बडी भीड रहती है। चतुर्मास मे तो यहां की छटा निराली होती है। श्रावण शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा तक यहां बराबर मेला लगा रहता है। सैकडों नर नारी यहां प्रति दिन आते है। और भंडारे आदि करते है। श्रावण मे यहां वन सोमवारों का मेला देखने योग्य होता है।

 


सुबह होते ही श्रृद्धालु भक्तों की भीड नरवदे हर, हर हर गंगे, का उच्चारण करते हुए कुंड के पवित्र जल मे स्नान करने लगते है। कुछ लोग कुंड के उस शीतल एव पवित्र जल मे तैरते हुए गौमुख से प्रवाहित जलधारा के नीचे खड़े होकर झरने का आनंद लेते है। और हर हर महादेव का उच्चारण करते जाते है। नीले क्षितिज के पार खिलती सूर्य की किरणें गलताजी की सारी छटा को सतरंगी बना देती है। वृक्षों की हरीतिमा में तोते और बहुरंगी चिडिय़ा घाटी में बहती हवाओं में सरगम भर देती है। निःसंदेह गलताजी का प्राकृतिक सौंदर्य अनुपम ही है। जो पर्यटकों व यात्रियों के लिए जीवन भर की स्थाई स्मृति बन जाता हैं। प्रतिदिन गलताजी तीर्थ में यात्री धर्मशाला रहते है। यहां पर बंगाली और गुजराती तीर्थ यात्री बडी संख्या में आते है। जो यात्री अपनी जयपुर की यात्रा मे गलताजी धाम नहीं जाता उसकी जयपुर यात्रा अधुरी समझी जाती है।

 

 

प्रिय पाठकों आपको हमारा यह लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताए। यह जानकारी आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते है

 

राजस्थान पर्यटन पर आधारित हमारे यह लेख भी जरूर पढ़ें:–

 

पश्चिमी राजस्थान जहाँ रेगिस्तान की खान है तो शेष राजस्थान विशेष कर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान की छटा अलग और
जोधपुर का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे मन में वहाँ की एतिहासिक इमारतों वैभवशाली महलों पुराने घरों और प्राचीन
भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद्ध शहर अजमेर को कौन नहीं जानता । यह प्रसिद्ध शहर अरावली पर्वत श्रेणी की
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने हेदराबाद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल व स्मारक के बारे में विस्तार से जाना और
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने जयपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हवा महल की सैर की थी और उसके बारे
प्रिय पाठको जैसा कि आप सभी जानते है। कि हम भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद् शहर व गुलाबी नगरी
प्रिय पाठको जैसा कि आप सब जानते है। कि हम भारत के राज्य राजस्थान कीं सैंर पर है । और
पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार
जैसलमेर के दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
जैसलमेर भारत के राजस्थान राज्य का एक खुबसूरत और ऐतिहासिक नगर है। जैसलमेर के दर्शनीय स्थल पर्यटको में काफी प्रसिद्ध
अजमेर का इतिहास
अजमेर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्राचीन शहर है। अजमेर का इतिहास और उसके हर तारिखी दौर में इस
अलवर के पर्यटन स्थल के सुंदर दृश्य
अलवर राजस्थान राज्य का एक खुबसूरत शहर है। जितना खुबसूरत यह शहर है उतने ही दिलचस्प अलवर के पर्यटन स्थल
उदयपुर दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
उदयपुर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर है। उदयपुर की गिनती भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलो में भी
नाथद्वारा दर्शन धाम के सुंदर दृश्य
वैष्णव धर्म के वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों, मैं नाथद्वारा धाम का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। नाथद्वारा दर्शन
कोटा दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
चंबल नदी के तट पर स्थित, कोटा राजस्थान, भारत का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। रेगिस्तान, महलों और उद्यानों के
कुम्भलगढ़ का इतिहास
राजा राणा कुम्भा के शासन के तहत, मेवाड का राज्य रणथंभौर से ग्वालियर तक फैला था। इस विशाल साम्राज्य में
झुंझुनूं के पर्यटन स्थल के सुंदर दृश्य
झुंझुनूं भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख जिला है। राजस्थान को महलों और भवनो की धरती भी कहा जाता
पुष्कर तीर्थ के सुंदर दृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर जिले मे स्थित पुष्कर एक प्रसिद्ध नगर है। यह नगर यहाँ स्थित प्रसिद्ध पुष्कर
करणी माता मंदिर देशनोक के सुंदर दृश्य
बीकानेर जंक्शन रेलवे स्टेशन से 30 किमी की दूरी पर, करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक शहर
बीकानेर के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
जोधपुर से 245 किमी, अजमेर से 262 किमी, जैसलमेर से 32 9 किमी, जयपुर से 333 किमी, दिल्ली से 435
जयपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भारत की राजधानी दिल्ली से 268 किमी की दूरी पर स्थित जयपुर, जिसे गुलाबी शहर (पिंक सिटी) भी कहा जाता
सीकर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सीकर सबसे बड़ा थिकाना राजपूत राज्य है, जिसे शेखावत राजपूतों द्वारा शासित किया गया था, जो शेखावती में से थे।
भरतपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भरतपुर राजस्थान की यात्रा वहां के ऐतिहासिक, धार्मिक, पर्यटन और मनोरंजन से भरपूर है। पुराने समय से ही भरतपुर का
बाड़मेर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
28,387 वर्ग किमी के क्षेत्र के साथ बाड़मेर राजस्थान के बड़ा और प्रसिद्ध जिलों में से एक है। राज्य के
दौसा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
दौसा राजस्थान राज्य का एक छोटा प्राचीन शहर और जिला है, दौसा का नाम संस्कृत शब्द धौ-सा लिया गया है,
धौलपुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
धौलपुर भारतीय राज्य राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है और यह लाल रंग के सैंडस्टोन (धौलपुरी पत्थर) के लिए
भीलवाड़ा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
भीलवाड़ा भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख ऐतिहासिक शहर और जिला है। राजस्थान राज्य का क्षेत्र पुराने समय से
पाली के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
पाली राजस्थान राज्य का एक जिला और महत्वपूर्ण शहर है। यह गुमनाम रूप से औद्योगिक शहर के रूप में भी
जालोर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
जोलोर जोधपुर से 140 किलोमीटर और अहमदाबाद से 340 किलोमीटर स्वर्णगिरी पर्वत की तलहटी पर स्थित, राजस्थान राज्य का एक
टोंक राजस्थान के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
टोंक राजस्थान की राजधानी जयपुर से 96 किमी की दूरी पर स्थित एक शांत शहर है। और राजस्थान राज्य का
राजसमंद पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
राजसमंद राजस्थान राज्य का एक शहर, जिला, और जिला मुख्यालय है। राजसमंद शहर और जिले का नाम राजसमंद झील, 17
सिरोही के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सिरोही जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित है। यह उत्तर-पूर्व में जिला पाली, पूर्व में जिला उदयपुर, पश्चिम में
करौली जिले के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
करौली राजस्थान राज्य का छोटा शहर और जिला है, जिसने हाल ही में पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है, अच्छी
सवाई माधोपुर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
सवाई माधोपुर राजस्थान का एक छोटा शहर व जिला है, जो विभिन्न स्थलाकृति, महलों, किलों और मंदिरों के लिए जाना
नागौर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
राजस्थान राज्य के जोधपुर और बीकानेर के दो प्रसिद्ध शहरों के बीच स्थित, नागौर एक आकर्षक स्थान है, जो अपने
बूंदी आकर्षक स्थलों के सुंदर दृश्य
बूंदी कोटा से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शानदार शहर और राजस्थान का एक प्रमुख जिला है।
बारां जिले के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
कोटा के खूबसूरत क्षेत्र से अलग बारां राजस्थान के हाडोती प्रांत में और स्थित है। बारां सुरम्य जंगली पहाड़ियों और
झालावाड़ पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
झालावाड़ राजस्थान राज्य का एक प्रसिद्ध शहर और जिला है, जिसे कभी बृजनगर कहा जाता था, झालावाड़ को जीवंत वनस्पतियों
हनुमानगढ़ पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
हनुमानगढ़, दिल्ली से लगभग 400 किमी दूर स्थित है। हनुमानगढ़ एक ऐसा शहर है जो अपने मंदिरों और ऐतिहासिक महत्व
चूरू जिले के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
चूरू थार रेगिस्तान के पास स्थित है, चूरू राजस्थान में एक अर्ध शुष्क जलवायु वाला जिला है। जिले को। द
गोगामेड़ी धाम के सुंदर दृश्य
गोगामेड़ी राजस्थान के लोक देवता गोगाजी चौहान की मान्यता राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल, मध्यप्रदेश, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों
वीर तेजाजी महाराज से संबंधी चित्र
भारत में आज भी लोक देवताओं और लोक तीर्थों का बहुत बड़ा महत्व है। एक बड़ी संख्या में लोग अपने
शील की डूंगरी के सुंदर दृश्य
शीतला माता यह नाम किसी से छिपा नहीं है। आपने भी शीतला माता के मंदिर भिन्न भिन्न शहरों, कस्बों, गावों
सीताबाड़ी के सुंदर दृश्य
सीताबाड़ी, किसी ने सही कहा है कि भारत की धरती के कण कण में देव बसते है ऐसा ही एक
गलियाकोट दरगाह के सुंदर दृश्य
गलियाकोट दरगाह राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सागबाडा तहसील का एक छोटा सा कस्बा है। जो माही नदी के किनारे
श्री महावीरजी धाम राजस्थान के सुंदर दृश्य
यूं तो देश के विभिन्न हिस्सों में जैन धर्मावलंबियों के अनगिनत तीर्थ स्थल है। लेकिन आधुनिक युग के अनुकूल जो
कोलायत धाम के सुंदर दृश्य
प्रिय पाठकों अपने इस लेख में हम उस पवित्र धरती की चर्चा करेगें जिसका महाऋषि कपिलमुनि जी ने न केवल
मुकाम मंदिर राजस्थान के सुंदर दृश्य
मुकाम मंदिर या मुक्ति धाम मुकाम विश्नोई सम्प्रदाय का एक प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थान माना जाता है। इसका कारण
कैला देवी मंदिर फोटो
माँ कैला देवी धाम करौली राजस्थान हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यहा कैला देवी मंदिर के प्रति श्रृद्धालुओं की
ऋषभदेव मंदिर के सुंदर दृश्य
राजस्थान के दक्षिण भाग में उदयपुर से लगभग 64 किलोमीटर दूर उपत्यकाओं से घिरा हुआ तथा कोयल नामक छोटी सी
एकलिंगजी टेम्पल के सुंदर दृश्य
राजस्थान के शिव मंदिरों में एकलिंगजी टेम्पल एक महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय मंदिर है। एकलिंगजी टेम्पल उदयपुर से लगभग 21 किलोमीटर
हर्षनाथ मंदिर के सुंदर दृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के सीकर से दक्षिण पूर्व की ओर लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर हर्ष नामक एक
रामदेवरा धाम के सुंदर दृश्य
राजस्थान की पश्चिमी धरा का पावन धाम रूणिचा धाम अथवा रामदेवरा मंदिर राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक तीर्थ है। यह
नाकोड़ा जी तीर्थ के सुंदर दृश्य
नाकोड़ा जी तीर्थ जोधपुर से बाड़मेर जाने वाले रेल मार्ग के बलोतरा जंक्शन से कोई 10 किलोमीटर पश्चिम में लगभग
केशवरायपाटन मंदिर के सुंदर दृश्य
केशवरायपाटन अनादि निधन सनातन जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर भगवान मुनीसुव्रत नाथ जी के प्रसिद्ध जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र
गौतमेश्वर महादेव धाम के सुंदर दृश्य
राजस्थान राज्य के दक्षिणी भूखंड में आरावली पर्वतमालाओं के बीच प्रतापगढ़ जिले की अरनोद तहसील से 2.5 किलोमीटर की दूरी
रानी सती मंदिर झुंझुनूं के सुंदर दृश्य
सती तीर्थो में राजस्थान का झुंझुनूं कस्बा सर्वाधिक विख्यात है। यहां स्थित रानी सती मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां सती
ओसियां के दर्शनीय स्थल
राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले जोधपुर में एक प्राचीन नगर है ओसियां। जोधपुर से ओसियां की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है।
डिग्गी कल्याण जी मंदिर के सुंदर दृश्य
डिग्गी धाम राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर टोंक जिले के मालपुरा नामक स्थान के करीब
रणकपुर जैन मंदिर के सुंदर दृश्य
सभी लोक तीर्थों की अपनी धर्मगाथा होती है। लेकिन साहिस्यिक कर्मगाथा के रूप में रणकपुर सबसे अलग और अद्वितीय है।
लोद्रवा जैन मंदिर के सुंदर दृश्य
भारतीय मरूस्थल भूमि में स्थित राजस्थान का प्रमुख जिले जैसलमेर की प्राचीन राजधानी लोद्रवा अपनी कला, संस्कृति और जैन मंदिर
सकराय माता मंदिर के सुंदर दृश्य
राजस्थान के सीकर जिले में सीकर के पास सकराय माता जी का स्थान राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक
बूंदी राजस्थान
केतूबाई बूंदी के राव नारायण दास हाड़ा की रानी थी। राव नारायणदास बड़े वीर, पराक्रमी और बलवान पुरूष थे। उनके

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *