खत्री पहाड़ विंध्यवासिनी देवी मंदिर तथा शेरपुर सेवड़ा दुर्ग व इतिहास

उत्तर प्रदेश राज्य के बांदा जिले में शेरपुर सेवड़ा नामक एक गांव है। यह गांव खत्री पहाड़ के नाम से विख्यात है। जहां विंध्यवासिनी देवी का मंदिर है। इसके अलावा शेरपुर सेवडा में एक प्राचीन दुर्ग भी है। इसका महत्व अति प्राचीनकाल से है महाभारतकाल में यह चेदि देश की राजधानी थी तथा इसका प्राचीन नाम शुक्ति मती नगरी था तथा यहाँ के नरेश का नाम उपरिचरि वश था तथा इनकी पत्नी का नाम गिरिका था इनका सम्बन्ध दासराज की पुत्री अत्रिका से हुआ था। इससे सत्यवती नाम की एक कन्या उत्पन्न हुई। किन्तु कालान्तर में चेदि देश की राजधानी शुक्ति मती नगरी शेरपुर सेवडा के नाम से विख्यात हुई।

 

 

शेरपुर सेवड़ा दुर्ग का इतिहास

 

यह स्थल बांदा जनपद से 24 किलोमीटर दूर केन नदी के तट पर स्थित है। तथा यहाँ पर एक दुर्ग निर्मित था जो वर्तमान समय में नष्ट हो चुका है इसी के समीप एक छोटी सी पहाडी है जिसे खत्री पहाड के नाम से जाना जाता है पहाडी की ऊँचाई समुद्र तल से 259 मी० है इसके ऊपरी भाग में एक छोटा देवी मन्दिर बना हुआ है इसे विंध्यवासिनी देवी का मन्दिर कहा जाता है।

 

सन 1881  तक शेरपुर सेवडा बाँदा जनपद का महत्वपूर्ण परगना रहा हैं तथा यह तहसील का मुख्यालय भी रहा यह कहा जाता है कि शेरपुर सेवडा एक समय पूर्ण विकसित नगर था। इस नगर की स्थ्यापना पिथौरा नरेश ने की थी। अकबर के शासनकाल में यह कालिंजर सरकार का एक परगना था। तथा यह क्षेत्र इलाहाबाद सूबे से सम्बन्धित था। मुगलकाल में सेना का मुख्यालय कालिंजर में था। और प्रशासनिक कार्यालय सेवडा में था। कहते है कि यह नगर इतना विशाल था कि इस नगर में 700 मजिस्दे थी और 900 क॒आँ थे औरंगजेब के समय में सेवडा का पतन हुआ। खानजहान लोदी यहाँ किसी कार्यवाही के लिये आया था।

 

उसने इस क्षेत्र में सन्‌ 1622 में आक्रमण किया था उसके बाद भी यह क्षेत्र मुगलों के प्रशासनिक केन्द्र के रूप में बना रहा। सन्‌ 1727 में मुहम्मद खाँ बंगस ने पुनः आक्रमण करके इसे अपने अधिकार में ले लिया था इस समय यह बुन्देलों के अधिकार में था। इसके पश्चात छत्रशाल के द्वितीय पुत्र जगतराय के पुत्र कीरत सिंह को जागीर के रूप में प्रदान किया गया।

 

 

खत्री पहाड़ का दुर्ग व मंदिर
खत्री पहाड़ का दुर्ग व मंदिर

 

इसके पश्चात प्रशासनिक मुख्यालय बाँदा स्थानानतरित कर दिया गया। यही एक दूसरी पहाडी पर दुर्ग के अवशेष उपलब्ध होते है कहते है कि पाण्डवों ने यहा कुछ समय के लिये अज्ञातवास लिया था और महात्मा बुद्ध भी दक्षिण दिशा को जाने के लिये यहाँ आये थे। यह क्षेत्र नल और दमयन्ती की कथा से जुड़ा हुआ है। पहले यह दुर्ग प्राचीर में स्थित था किन्तु अब इस दुर्ग का परकोटा नष्ट हो गया है। इस दुर्ग में सन्‌ 1795 में बाँदा के प्रथम नवाब अली बहादुर और लक्ष्मण सिंह दउआ से यद्ध हुआ था। इस युद्ध में अली बहादुर की विजय हुई थी। इनकी विजय के पश्चात मुख्यालय बाँदा आ गया और धीरे-धीरे यह नगर उजाड हो गया।

 

दुर्ग के अवशेष

 

यह दुर्ग एक पहाडी पर था दुर्ग का वहंगम दृश्य सेवडा के नीचे केन नदी के मवई घाट से देखा जा सकता है निर्माण शैली के दृष्टि से यह दुर्ग चन्देल कालीन है जो प्राचीन प्रतिमाये इस दुर्ग में उपलब्ध हुई है वे सभी चन्देलकालीन है। इस दुर्ग का कुछ निर्माण कार्य सल्तनत और मुगलकाल में हुआ पहले यह दुर्ग प्राचीर में स्थित था और दुर्ग के ऊपर जल की आपूर्ति केन नदी से होती थी दुर्ग के ऊपर उपलब्ध इमारते वास्तुशिल्प की दृष्टि से मिश्रित वास्तुशिल्प के उत्तम नमूने हैं। इस क्षेत्र निम्न स्थल उपलब्ध होते है।

 

 

खत्री पहाड़ विंध्यवासिनी देवी मंदिर

 

यह मन्दिर सेवडा की एक पहाडी पर निर्मित है तथा यहाँ पहुँचने के लिये सीढ़ियाँ बनी हुईं है मन्दिर में उपलब्ध मूर्तियाँ अत्यन्त प्राचीन है। यह पहाड़ सफेद रंग का पहाड है, यह वही पहाड़ है जिसको नंदबाबा की बेटी ने तब कोढ़ी होने का श्राप दिया था जब पहाड़ ने इस देवी रुपी कन्या का भार सहन करने से इंकार कर दिया था। इसी पहाड़ में प्रसिद्ध विंध्यवासिनी मंदिर है जहां हर साल नवरात्रि में लाखों भक्तों का तांता लगता है।

 

 

इस मंदिर के संबंध में प्रचलित दंतकथा के अनुसार ऐसी मान्यता है कि राजा कंस, कृष्ण के बदले देवी कन्या को एक चट्टान पर पटकने लगा तो कन्या कंस के हाथ से छूटकर यह भविष्यवाणी करते हुए आसमान में ओझल हो गयी कि रे दुष्ट कंस तेरा वध करने वाला सुरक्षित है। कहा जाता है कि यही देवी कन्या सर्वप्रथम मिर्जापुर के विंध्याचल पर्वत पहुंची लेकिन पर्वत द्वारा देवी कन्या का बोझ सहन करने में असमर्थता प्रकट करने पर विंध्य पर्वत श्रृंखला की इस (खत्री पहाड़) आयीं लेकिन यहां भी पर्वत का वही उत्तर मिलने पर देवी कन्या ने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। तभी से यहां के पत्थर सफेद हो गये हैं और नाम खत्री पहाड़ हो गया। उसी समय देवी कन्या ने आकाशवाणी की थी कि वह प्रत्येक अष्टमी को भक्तों को यहां दर्शन देती रहेंगी तभी से यहां धार्मिक मेला लगता चला आ रहा है। यहाँ एक चट्टान ऐसी भी है जो चटक दो टुकडो में विभाजित हो गयी है। उसकी दरार में झाँकने से यह प्रतीत होता है कि उस चटटान में अनेक मूर्तियाँ बनी हुईं है।

 

 

 

बीहड़ एवं जलाशय

 

खत्री पहाड के नीचे केन नदी के पथ पर छोटा जलाशय प्राप्त होता है जो प्राचीन बीहड हैं इसके नीचे उतरने के लिये जल स्‍तर तक सीढिया बनी है यह बीहड मुगलकालीन है।

 

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढ़े:—–

 

भारत की राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन तथा हजरत निजामुद्दीन दरगाह के करीब मथुरा रोड़ के निकट हुमायूँ का मकबरा स्थित है। यह
कुतुबमीनार के सुंदर दृश्य
पिछली पोस्ट में हमने हुमायूँ के मकबरे की सैर की थी। आज हम एशिया की सबसे ऊंची मीनार की सैर करेंगे। जो
भारत की राजधानी के नेहरू प्लेस के पास स्थित एक बहाई उपासना स्थल है। यह उपासना स्थल हिन्दू मुस्लिम सिख
पिछली पोस्ट में हमने दिल्ली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कमल मंदिर के बारे में जाना और उसकी सैर की थी। इस पोस्ट
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने दिल्ली के प्रसिद्ध स्थल स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के बारे में जाना और उसकी सैर
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने हेदराबाद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल व स्मारक के बारे में विस्तार से जाना और
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने जयपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हवा महल की सैर की थी और उसके बारे
प्रिय पाठको जैसा कि आप सभी जानते है। कि हम भारत के राजस्थान राज्य के प्रसिद् शहर व गुलाबी नगरी
पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार
प्रिय पाठको अपनी पिछली अनेक पोस्टो में हमने महाराष्ट्र राज्य के अनेक पर्यटन स्थलो की जानकारी अपने पाठको को दी।
प्रिय पाठको अपनी इस पोस्ट में हम भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के एक ऐसे शहर की यात्रा करेगें जिसको
शेखचिल्ली यह नाम सुनते ही आपके दिमाग में एक हास्य कलाकार की तस्वीर और उसके गुदगुदाते चुटकुलो की कल्पना करके
प्रिय पाठको अपने इस लेख में आज हम आपको एक ऐसी रोचक जानकारी देने जा जिसके बारे में बहुत कम
India gate history in hindi
इंडिया गेट भारत की राजधानी शहर, नई दिल्ली के केंद्र में स्थित है।( india gate history in Hindi )  राष्ट्रपति
कोणार्क सूर्य मंदिर के सुंदर दृश्य
कोणार्क' दो शब्द 'कोना' और 'अर्का' का संयोजन है। 'कोना' का अर्थ है 'कॉर्नर' और 'अर्का' का मतलब 'सूर्य' है,
राजगढ़ का किला के सुंदर दृश्य
पुणे से 54 किमी की दूरी पर राजगढ़ का किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक प्राचीन पहाड़ी किला
ओरछा दर्शनीय स्थल के सुंदर दृश्य
शक्तिशाली बुंदेला राजपूत राजाओं की राजधानी ओरछा शहर के हर हिस्से में लगभग इतिहास का जादू फैला हुआ है। ओरछा
कुम्भलगढ़ का इतिहास
राजा राणा कुम्भा के शासन के तहत, मेवाड का राज्य रणथंभौर से ग्वालियर तक फैला था। इस विशाल साम्राज्य में
बीजापुर पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
बीजापुर कर्नाटक राज्य का एक प्रमुख शहर है। बीजापुर अपने मध्ययुगीन स्मारकों के लिए जाना जाता है, जो इस्लामी वास्तुकला
गुलबर्गा पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
गुलबर्गा कर्नाटक का एक प्रमुख शहर है. यह गुलबर्गा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय और उत्तर कर्नाटक क्षेत्र का एक प्रमुख
हम्पी की ऐतिहासिक धरोहरों के सुंदर दृश्य
हुबली से 160 किमी, बैंगलोर से 340 किमी और हैदराबाद से 377 किमी दूर, हम्पी उत्तरी कर्नाटक के तुंगभद्र नदी
बादामी के पर्यटन स्थलों के सुंदर दृश्य
बागलकोट से 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बादामी, जिसे वाटापी भी कहा जाता है, कर्नाटक के बागलकोट जिले में
एहोल के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
बागलकोट से 33 किमी, बादामी से 34 किमी और पट्टाडकल से 13.5 किलोमीटर दूर, एहोल, मलप्रभा नदी के तट पर
पट्टदकल स्मारक परिसरों के सुंदर दृश्य
बागलकोट से 45 किलोमीटर, बादामी से 21 किमी और एहोल से 13.5 किलोमीटर दूर, पट्टदकल, मालप्रभा नदी के तट पर
बीदर के दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
हैदराबाद से 140 किमी दूर, बीदर कर्नाटक के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित एक शहर और जिला मुख्यालय है। बिदर हेदराबाद
बेलूर दर्शनीय स्थलों के सुंदर दृश्य
चिकमंगलूर से 25 किमी की दूरी पर, और हसन से 40 किमी की दूरी पर, बेलूर कर्नाटक राज्य के हसन
फतेहपुर सीकरी के सुंदर दृश्य
विश्व धरोहर स्थलों में से एक, फतेहपुर सीकरी भारत में सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थानों में से एक है।
नालंदा विश्वविद्यालय के सुंदर फोटो
बिहार राज्य की राजधानी पटना से 88 किमी तथा बिहार के प्रमुख तीर्थ स्थान राजगीर से 13 किमी की दूरी
देवगढ़ के सुंदर दृश्य
देवगढ़ उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में बेतवा नदी के किनारे स्थित है। यह ललितपुर से दक्षिण पश्चिम में 31 किलोमीटर
कालिंजर का किला
कालिंजर का किला या कालिंजर दुर्ग कहा स्थित है?:--- यह दुर्ग बांदा जिला उत्तर प्रदेश मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर बांदा-सतना
भठिंडा का किला या किला मुबारक
पंजाब में भठिंडा आज एक संपन्न आधुनिक शहर है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शहर का एक खूबसूरत इतिहास
शाहपुर कंडी किला
शाहपुर कंडी किला शानदार ढंग से पठानकोट की परंपरा, विरासत और इतिहास को प्रदर्शित करता है। विशाल किले को बेहतरीन कारीगरी
अजयगढ़ का किला
अजयगढ़ का किला महोबा के दक्षिण पूर्व में कालिंजर के दक्षिण पश्चिम में और खुजराहों के उत्तर पूर्व में मध्यप्रदेश
रसिन का किला
रसिन का किला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले मे अतर्रा तहसील के रसिन गांव में स्थित है। यह जिला मुख्यालय बांदा
मड़फा दुर्ग
मड़फा दुर्ग भी एक चन्देल कालीन किला है यह दुर्ग चित्रकूट के समीप चित्रकूट से 30 किलोमीटर की दूरी पर
रनगढ़ दुर्ग या जल दुर्ग
रनगढ़ दुर्ग ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रतीत होता है। यद्यपि किसी भी ऐतिहासिक ग्रन्थ में इस दुर्ग
भूरागढ़ का किला
भूरागढ़ का किला बांदा शहर के केन नदी के तट पर स्थित है। पहले यह किला महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्थल था। वर्तमान
कल्याणगढ़ का किला मंदिर व बावली
कल्याणगढ़ का किला, बुंदेलखंड में अनगिनत ऐसे ऐतिहासिक स्थल है। जिन्हें सहेजकर उन्हें पर्यटन की मुख्य धारा से जोडा जा
महोबा का किला
महोबा का किला महोबा जनपद में एक सुप्रसिद्ध दुर्ग है। यह दुर्ग चन्देल कालीन है इस दुर्ग में कई अभिलेख भी
सिरसागढ़ का किला
सिरसागढ़ का किला कहाँ है? सिरसागढ़ का किला महोबा राठ मार्ग पर उरई के पास स्थित है। तथा किसी युग में
जैतपुर का किला या बेलाताल का किला
जैतपुर का किला उत्तर प्रदेश के महोबा हरपालपुर मार्ग पर कुलपहाड से 11 किलोमीटर दूर तथा महोबा से 32 किलोमीटर दूर
मंगलगढ़ का किला
मंगलगढ़ का किला चरखारी के एक पहाड़ी पर बना हुआ है। तथा इसके के आसपास अनेक ऐतिहासिक इमारते है। यह हमीरपुर
मनियागढ़ का किला
मनियागढ़ का किला मध्यप्रदेश के छतरपुर जनपद मे स्थित है। सामरिक दृष्टि से इस दुर्ग का विशेष महत्व है। सुप्रसिद्ध ग्रन्थ
बरूआ सागर का किला
बरूआ सागर झाँसी जनपद का एक छोटा से कस्बा है। यह मानिकपुर झांसी मार्ग पर है। तथा दक्षिण पूर्व दिशा पर
गढ़कुंडार का किला
गढ़कुण्डार का किला मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में गढ़कुंडार नामक एक छोटे से गांव मे स्थित है। गढ़कुंडार का किला बीच
चिरगाँव का किला
चिरगाँव झाँसी जनपद का एक छोटा से कस्बा है। यह झाँसी से 48 मील दूर तथा मोड से 44 मील
एरच का किला
उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद में एरच एक छोटा सा कस्बा है। जो बेतवा नदी के तट पर बसा है, या
उरई का किला और माहिल तालाब
उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद मे स्थित उरई नगर अति प्राचीन, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। यह झाँसी कानपुर
कालपी का किला व चौरासी खंभा
कालपी का किला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अति प्राचीन स्थल है। यह झाँसी कानपुर मार्ग पर स्थित है उरई
दतिया महल या दतिया का किला
दतिया जनपद मध्य प्रदेश का एक सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक जिला है इसकी सीमाए उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद से मिलती है। यहां

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *