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केरल का भोजन

केरल का भोजन – केरल का खानपान

केरल के उपजाऊ खेतों में धान बहुत पैदा होता है। अतः केरल के लोग ज़्यादा चावल या भात ही खाते हैं। गेहूं बहुत कम लोग खाते हैं। यहां नदी, झीलों ओर तालाबों में मछलियां खूब पायी जाती हैं। इसलिए मछली भी अधिकांश लोगों का मुख्य भोजन हैं। लोग भात के साथ कई तरह की स्वादिष्ट तरकारियां तथा शाक- भाजियां लेते हैं। नारियल की गरी ओर नारियल के तेल से भोजन बनाना यहां के लोग बहुत पसन्द करते है।

केरल का भोजन – केरल का खाना

केरल के व्यंजन

साधारणत: भोजन के लिये केरल के लोग कालन्‌, ओलन्‌ , आवियल, साम्बार, कट्टुकरी, एरिश्शेरी, आदि कई प्रकार के व्यंजन बनाते हैं। ये सभी चीज़ें अपने ढंग की निराली होती हैं। इनके बनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। केरल नारियल की भूमि हैं। अतः केरलीय व्यंजनों में नारियल का अनिवार्य योग रहता है। उबाले हुए खट्टे दही के साथ नमक, काली मिर्च, नारियल आदि अच्छी तरह पीसकर मिला देते हैं ओर केले तथा जमींकंद के छोटे टुकड़ों के साथ पकाकर कालन्‌ बनाते हैं जो कढ़ी जैसा होता हैं। कालन्‌ का महत्व उसके अधिक से अधिक गाढ़ा होने में माना जाता है। कुम्हड़ा, बैंगन, कदृदू, आलू आदि के छोटे-छोटे टुकड़ों को पानी में डालकर उबाल लेने के बाद उसमें नमक और नारियल का दूध मिलाकर ओलन बनाते हैं। हरी मिर्च के टुकड़े तथा नारियल का तैल भी उसमें डालते हैं। ओलन्‌ का नया रूप आजकल आलू मात्र से बने स्ट्‌ नामक डिश से मिलता हैं।

अवियल एक ऐसी डिश है जो आम या इमली तथा नमक ओर मिर्च के साथ केला, जमींकंद, कुम्हड़ा, बैंगन आदि सभी प्रकार की तरकारियों के टुकड़े मिलाकर बनाया जाता है। नारियल के दूध ओर गरी का आवियल में विशेष स्थान हैं। साम्बार में इमली, नमक और मिर्च के साथ अन्य तरकारियों की अपेक्षा भिण्डी, आलू, बैंगन आदि की अधिक्षता रहती है। दाल के बिना साम्बार बनाना संभव नहीं हैं। इसमें नारियल नहीं मिलाया जाता हैं। कूटटुकरी या “कूटटु” “अवियल ” के ढंग का ही एक दूसरा व्यंजन है। “अवियल्‌ ” में इमली का होना जरूरी है। “कटटु” में इमली कभी नहीं डालते, यही इन दोनों में मुख्य भेद है। “कटटु और “एरिश्शेरी ” में भी थोड़ा ही फरक है। दोनों में नारियल की गरी के महीन टुकड़े भूनकर डालते हैं। इतके अलावा “पच्चड़ी ”, “खिचड़ी “रसम्‌ ” आदि भी कई व्यंजनों के नाम उल्लेखनीय हैं।

केरल का भोजन
केरल का भोजन

पायसम भोजन

मीठे-मीठे “ प्रथमन्‌ या “ पायसम्‌ ” ओर “खीर का स्थान केरल के भोजन में सर्वप्रथम माना जाता है। इसलिए उनको “प्रथमन्‌” नाम दिया गया है। “अटठ-प्रथमन्‌ “, “पषप्रथमन्‌ ”, “कटल-प्रथमन्‌” आदि कितने ही प्रकार के प्रथमन्‌ और पायसम्‌ बनाये जाते हैं। चना, गेहूँ, मूंग, पक्के केले, कटहल आदि के अलग-अलग “प्रथमन्‌ ” बनाते हैं। सब प्रथमनों में गुड़ और नारियल का दूध अवश्य मिलाते हैं। पालपायसम्‌ या “खीर” चावल, चीनी और दूध मात्र से बनाते हैं। बड़े-बड़े भोजों में चार-पाँच प्रथमन्‌ और पाल पायसम्‌ अवश्य होते हैं। मामूली भोज में कम से कम एक प्रथमन्‌ या पायसम्‌ का होना अनिवार्य समझा जाता है।

अचार और उपदंश

केरल के लोग भोजन के या नित्य के मामूली भोजन के अन्त में भात के साथ दही या मठठा मिलाकर खाना आवश्यक समझते हैं। उस समय अचारों को चखने में वे विशेष रुचि दिखाते हैं। इसलिए नींबू, आँवला, आम, कटहल आदि के कई प्रकार के अचार बनाते हैं। इमली ओर अदरक या दही-ओर अदरक की चटनी ओर अचार का विशेष महत्त्व माना जाता है। पापड़ यहां के लोगों को बहुत ही प्रिय है। बड़े-बड़े भोजन मे वृत्ताकार छोटे और बड़े दोनों प्रकार के पापड़ अलग-अलग परोसना प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक समझा जाता है। बिना पापड़ के नित्य का भोजन भी यहां के लोगों को फीका लगता है। अतः यहां के “कोकिणी ” ओर “पंडारन ” जाति के लोग पापड़ बेलने के एकमात्र पेशे से अपनी आजीविका चलाने में कोई कठिनाई नहीं पाते। इतना ही नहीं, उनमें कई लोग पापड़ के देश-विदेशी व्यापार से खूब माला माल भी हो गये हैं।

केरल के भोजन में केले के भुने हुए सादे और गुड़-मिश्रित टुकड़े जिनको “ उप्पेरी ” या “ उपदंश ” कहते हैं, बहुत मुख्य है। उप्पेरी ज़मीकंद, कटहल आदि के टुकड़ों से भी बनाते हैं। उप्पेरी नारियल के तेल में भूनकर ही तैयार करते हैं। घी या अन्य प्रकार का तेल इसके लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता है।

यहाँ के लोग ज़मीन या फर्श पर छोटे तख्ते या चटाइयां बिछा कर उस पर पालथी मारकर बैठकर और अकसर केले के लम्बे मुलायम हरे पत्तों पर खाना परोसकर खाते हैं। भोजन के वक्‍त कुर्सी पर बैठकर मेज़ पर थालियों में चीज़ें परोस कर खाने का रिवाज यहां बहुत कम लोगों में पाया जाता है। यद्यपि आजकल कई घरों में केले के पत्तों की जगह थालियों का उपयोग भी करने लगे हैं, तो भी विवाह, श्राद्ध आदि सब प्रकार के त्योहारों के अवसरों पर केले के पत्तों पर ही भोजन परोसा जाता है।

केरल का नाश्ता

सबेरे तथा अन्य आवश्यक समय के नाश्ते या जलपान के लिए लोग “पुटटु” इडली ”, “डोशा ”वडा “, “अप्पम, “अटा ” आदि कई प्रकार के पकवान और मिठाइयां बनाया करते हैं। उनके चखने से कोई भी आदमी केरलीय पाक-कला की सफलता ओर विशेषता की मुक्त-कंठ से प्रशंसा किये बिना नहीं रहेगा। यद्यपि आधुनिक ज़माने के प्रायः सभी लोग नाश्ते के साथ “चाय, या “काफी ” पीते हैं तो भी पहले लोग सबेरे भात से पानी अलग किये बिना “ कंजी ” के रूप में उसे तरकारियों ओर पापड़ के साथ खाना ही पसंद करते थे। “कंजी “ पीने का रिवाज इस वक्त भी कई घरों में पूर्ववत्‌ जारी है। अक्सर गरीब लोग “ कंजी ” को ही अपना मुख्य भोजन मानते हैं।

यहां के लोग गर्मी के दिनों में कच्चे नारियल या डाभ का मीठा ठंडा रस पीते हैं। “संभारम” और “परानकम ” भी यहां के मुख्य पेय पदार्थ हैं। मट्ठा मिले हुए हल्के खट्टे पानी को जिसमें कभी नमक ओर हरी मिर्च भी डालते हैं, “संभारम्‌ ” कहते हैं।“पानकम्‌ ” मीठा रहता है। पानी में गुड़ घोलकर उबालते हैं और ठंडा करके थोड़ा-सा सोंठ का चूर्ण मिलाते हैं, तब पानकम्‌ तैयार होता है। गर्मी के दिनों में मुसाफिरों यथा अतिथियों को “संभारम्‌” और “पानकम्‌ ” पिलाने की व्यवस्था आज भी कई प्रतिष्ठित खानदानों की तरफ़ से अवश्य की जाती है। पानी में सोंठ, इलायची, जीरा आदि का चूर्ण डालकर उबाल लेते हैं और उसी को पीने के काम में लाते हैं जिसको “चुक्कुवल्लम (सोंठ का पानी) कहते हैं।
यहां के लोग ठंडे पानी के बदले उसी की पीना बहुत पसंद
करते हैं।

केरल का भोजन के बाद पान-सुपारी

भारत के अन्य प्रान्तों की तरह यहां के लोग भी भोजन के बाद तुरन्त पान-सुपारी खाने का नियम रखते हैं। तम्बाकू भी कई लोग पान-सुपारी के साथ चबाते हैं। ब्राहमण क्षत्रिय आदि कुछ शाकाहारी लोगों के अलावा यहां मांसाहार करने वाले लोगों की संख्या काफ़ी बड़ी है। वे मछली, गोश्त, अंडे आदि के विविध व्यंजन बनाकर खाया करते हैं। केरलीय ढंग से मांस और मछली के कई स्वादिष्ट भोजन बनाने की कला केरल के मुसलमान और ईसाई परिवारों के रसोइया लोग जानते हैं, अतः वे केरल के बाहर जाकर भी अच्छे ”बावर्ची” बनते हैं और खूब कमाते हैं।

केरल का मांसाहारी खाना

चिकन फ्राई केरल के मांसाहारी लोगों का फेमस फूड़ हैं, चिकन फ्राई केरल में अधिकतर लोगों का पसंदीदा खाना है, चिकन को प्याज, लहुसन, मिर्च सिरका और धनिया का पेस्ट लगाकर तला जाता है, फिर उसे केले के पत्तों पर परोसा जाता है। इसी तरह बीफ फ्राई भी बनाया जाता है। मछली यहां का सबसे खास व्यंजन है। केरल के इस व्यंजन में वह खास बात है। हल्की तली हुई मछली को मिट्टी के बर्तन में स्टू में बनाया जाता है, चाहे कुछ भी हो, उसका स्वाद अच्छा होता है! हमेशा की तरह, इसे नारियल के दूध और कोकम और मसालों जैसे हल्दी, काली मिर्च, दालचीनी और लौंग के साथ ताज़ी हरी मिर्च के साथ बनाया जाता है ताकि इसे एक तीखा स्वाद दिया जा सके। मछली आमतौर पर किंगफिश या द्रष्टा मछली होती है। इसके अलावा केरल के मांसाहारी भोजन में चिकन करी, मटन करी, बीफ करी, नादान कोजी करी आदि अनेक व्यंजन बनाए जाते हैं।

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Naeem Ahmad

CEO & founder alvi travels agency tour organiser planners and consultant and Indian Hindi blogger

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