औली पर्यटन स्थल – औली में बर्फबारी का आनंद – औली का तापमान

प्रिय पाठको हमने अपनी पिछली अनेक पोस्टो में अपने पाठको को उत्तराखंड के पर्यटन के अनेक पर्यटन स्थलो की जानकारी अपने पाठको को दी। अपनी इस पोस्ट में हम उत्तराखंड के ही एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली की जानकारी अपने पाठको को देंगे और औली पर्यटन स्थल की सैर करेगें और जानेगें कि-

औली में बर्फबारी कब होती है?

औली उतराखंड का तापमान?

औली के दर्शनीय स्थल कौन कौन से है?

औली यात्रा पर कब जाए?

जोशी मठ औली रोपवे की लम्बाई कितनी है?

औली कैसे पहुंचे?

औली उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के विख्यात बद्रीनाथ धाम के निकट घने जंगल, पहाड व मखमली घास से भरपूर एक अत्यंत रमणीक स्थल है। यहा देश का सबसे नया व आधुनिक आइस स्काइंग केंद्र भी है। जहा स्कीइंग का भरपूर मजा लिया जा सकता है। समुद्र तल से इस स्थल की ऊंचाई 2519 मीटर से लेकर 3049 मीटर तक है। यहा से नंदा देवी, हाथी गौरी पर्वत, नीलकंठ व ऐरावत पर्वत का नजारा भी देखा जा सकता है। सन् 1994 में यहा जोशी मठ से औली तक 4 किलोमीटर लम्बे रोपवे का निर्माण किया गया था। 1927 मीटर से 3027 मीटर की ऊचांई तक यह रोपवे श्रेष्ठतम तकनीक से बना एशिया के सबसे ऊंचे रोपवे में से एक है। इसकी यात्रा पर्यटको को आनंद विभोर व रोमांचित कर देती है। इसलिए औली पर्यटन स्थल उत्तराखंड पर्यटन में अपना महत्तपूर्ण स्थान रखते है।

औली पर्यटन स्थल
औली पर्यटन स्थल

औली पर्यटन स्थल

जोशी मठ

जोशी मठ औली से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह मठो, मंदिरो और स्मारको के लिए दर्शनीय है। इसके अलावा आप यहा के पर्वतो की सैर भी कर सकते है। जोशी मठ को बद्रीनाथ और फूलो की घाटी का प्रवेशद्धार माना जाता है।

छत्रा कुंड

जंगल के बीच स्थित छत्रा कुंड सरोवर गुरसौं से एक किलोमीटर दूर है। यहा का दर्शनीय सरोवर पर्यटको का मन मोह लेता है।

क्वांरी बुग्याल

क्वारी बुग्याल समुंद्रतल से 3350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ट्रैकिंग करने वालो के लिए यह एक आदर्श स्थल है। यहा दूर दूर तक विस्तृत ढलानो की खूबसूरती देखते ही बनती है।

सेलधार तपोवन

यह स्थान औली पर्यटन में महत्तवपूर्ण स्थान रखता है। यहा गर्म पानी के झरने, सोते और फव्वारे देखने योग्य है।

गुरसौं बुग्याल

यह स्थान औली से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समुंद्र तल से गुरसौं बुग्याल की ऊंचाई 3056 मीटर है। खूबसूरत नजारो से भरपूर यह मैदान मीलो तक फैला हुआ है।

चिनाब झील

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह जगह चाई थेंग की दुर्गम चढाई के बाद सामने आती है। यहा पहुंचने के लिए कठिन चढाई चढनी पडती है।

वंशीनारायण कल्पेश्वर

इस स्थल तक पहुंचने के लिए पहले जोशी मठ से हेलंग चट्टी आना पडता है। जो कि औली से 12 किलोमीटर दूर है। हेलंग चट्टी से 10 किलोमीटर पैदल चलने के बाद कल्पेश्वर की घाटी आती है। वंशीनारायण मंदिर कल्पेश्वर से केवल 2 किलोमीटर दूर है।

औली का तापमान

औली ऊचाई पर स्थित होने के कारण यहा का मौसम अधिकतर ठंडा ही रहता है। औली जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम गर्मीयो का होता है गर्मीयो में औली का तापमान अधिकतम 15℃ से न्यूनतम 7℃ तक रहता है। अगर आप औली में बर्फबारी देखना चाहते है या आईस स्पोर्टस का आनंद उठाना चाहते है तो आप सर्दीयो के मौसम में भी जा सकते। सर्दीयो में औली का तापमान अधिकतम 4℃ से माइनस -8℃ तक रहता है। इस समय यहा चारो तरफ बर्फ की चादर ढकी होती है और ठंड अधिक होती है। छोटे बच्चो को साथ लेकर इस मौसम में औली की यात्रा बच्चो के लिए कष्टदायक हो सकती है। मानसून यानि बरसात के मौसम में यहा वर्षा औसत से कम होती है इस समय यहा का तापमान 12℃ तक रहता है जो वर्षा होने की स्थिति में और भी नीचे तक चला जाता है। इसलिए औली पर्यटन स्थल की यात्रा पर आने से पहले पेंकिग करते समय गर्म वस्त्र रखने न भूंले।

चमोली जिले के पर्यटन स्थल

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पौडी गढवाल जिले के पर्यटन स्थल

औली कैसे जाएं

औली के लिए रेल सेवाएं उपलब्ध नही है। रेल द्वारा आप ऋषिकेश या काठगोदाम तक ही पहुंच सकते है। यहा से आगे आपको सडक मार्ग द्वारा जाना पडेगा। ऋषिकेश से औली 253 किलोमीटर दूर है। ऋषिकेश से औली बस या कार द्वारा जोशी मठ होकर औली पहुंचा जा सकता है। या फिर काठगोदाम से पौडी श्रीनगर होते हुए जोशी मठ पहुचा जा सकता है। जोशी मठ से आप रोपवे का भी इस्तेमाल कर सकते है। जोशी मठ से औली रोपवे की दूरी 4 किलोमीटर है। औली में ठहरने के स्थान के लिए यहा गढवाल मंडल विकास निगम द्वारा फाइबर हट्स बनाई गई है। जहा रहने के अलावा खाने पीने की भी व्यवस्था भी है।

 

 

 

 

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