एरच का किला किसने बनवाया था – एरच के किले का इतिहास हिन्दी में

उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद में एरच एक छोटा सा कस्बा है। जो बेतवा नदी के तट पर बसा है, या स्थल झाँसी से 46 मील उत्तर पूर्व और गरौठा से 22 मील दूर है। यह स्थल गरौठा से पुन्छ मार्ग पर स्थित है यहाँ पर एक प्राचीन दुर्ग है जिसका पुरातात्कि महत्व है। जिसको एरच का किला के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में इस किले के भग्नावशेष ही देखने को मिलते है।

 

 

 

एरच का किला – एरच के किले का इतिहास हिन्दी में

 

स्थानीय परम्परा के अनुसार कहा जाता है कि यह स्थल हिरणाकश्यप के पुत्र प्रहलाद की जन्म स्थली है। अकबर के शासन काल में एरच को परगना का दर्जा प्राप्त था, तथा यह क्षेत्र आगरा सूबे के अन्तर्गत आता था। जहाँगीर के शासन काल में यह क्षेत्र बीर सिंह देव बुन्देला के अधिकार में था। कुछ समय तक यह इलाका बुन्देलखण्ड के शरी छत्रसाल के हाथ में रहा। सन्‌ 1712 में मुगल बादशाह फरूखाशियर ने यह क्षेत्र मुहम्मद खाँ बंगस को दे दिया था बाद में यह छत्रसाल के अधिकार में आ गया था छत्रशाल के उत्तराधिकारी हरिदास इस क्षेत्र को सुरक्षित नही रख सके कुछ साल बाद यह मराठा साम्राज्य का अंग बन गया उसके पश्चात यह अंग्रेजी के अधीन हो गया।

 

 

एरच का किला
एरच का किला

 

 

एरच का किला के खंड़हर बेतवा नदी के तट पर मिलते है। इस किले में प्रवेश करने के लिये चार प्रवेश द्वार है जिनके नाम (सक) हाओ द्वार, मीरा द्वार, ग्वाल द्वार, और राठ द्वार है। तथा दुर्ग के रास्ते में पश्चिम दिशा की ओर यही पर किले की दीवार में नदी से लगभग 60 मीटर की ऊँचाई में और किले की दीवार से लगभग 30 फूट ऊँची हनुमान जी की प्रतिमा उपलब्ध होती है।

 

 

यहां एक जामा मस्जिद भी है जिसके बारे में कहते है कि जामा मस्जिद का निर्माण तदयुगीन हिन्दू मन्दिरों को तोंड कर किया गया था। सन्‌ 1413 में गजी उद्धीन के भाई खान जुनैद ने अपने जागीरदारी के दौरान मस्जिद का निर्माण कराया था। इसके पश्चात मस्जिद का कुछ भाग औरंगजेब के शासनकाल में बना। इस मस्जिद की चारों दिशाओं में मीनारे और गुम्बद है, तथा इसमें लगे स्तम्भ हिन्दू मन्दिरों के है मस्जिद की दीवारे और फर्स ईटो और पत्थरों से निर्मित है। इनके रंग लाल नीले पीले और हरे है।

 

 

यहीं पर एक सती चौरा स्तम्भ भी मिलता है जिसमें सन्‌ 1642 का अभिलेख है इस स्थल पर अन्जनी माता के मन्दिर में दूसरे और छठवे दिन पूष माह में मेला लगता है यहाँ निम्नलिखित स्थल दर्शनीय है।

4. प्रवेश द्वार ( जिनकी संख्या चार है)
2. आवासीय स्थल
3. जलाशय
4. हिन्दू धर्म से सम्बन्ध स्थल
5. मुस्लिम धर्म से सम्बन्ध स्थल

 

 

हमारे यह लेख भी जरूर पढ़ें:—–

 

 

तालबहेट का किला
तालबहेट का किला ललितपुर जनपद मे है। यह स्थान झाँसी - सागर मार्ग पर स्थित है तथा झांसी से 34 मील
कुलपहाड़ का किला
कुलपहाड़ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के महोबा ज़िले में स्थित एक शहर है। यह बुंदेलखंड क्षेत्र का एक ऐतिहासिक
पथरीगढ़ का किला
पथरीगढ़ का किला चन्देलकालीन दुर्ग है यह दुर्ग फतहगंज से कुछ दूरी पर सतना जनपद में स्थित है इस दुर्ग के
धमौनी का किला
विशाल धमौनी का किला मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित है। यह 52 गढ़ों में से 29वां था। इस क्षेत्र
बिजावर का किला
बिजावर भारत के मध्यप्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में स्थित एक गांव है। यह गांव एक ऐतिहासिक गांव है। बिजावर का
बटियागढ़ का किला
बटियागढ़ का किला तुर्कों के युग में महत्वपूर्ण स्थान रखता था। यह किला छतरपुर से दमोह और जबलपुर जाने वाले मार्ग
राजनगर का किला
राजनगर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खुजराहों के विश्व धरोहर स्थल से केवल 3 किमी उत्तर में एक छोटा सा
पन्ना के दर्शनीय स्थल
पन्ना का किला भी भारतीय मध्यकालीन किलों की श्रेणी में आता है। महाराजा छत्रसाल ने विक्रमी संवत् 1738 में पन्‍ना
सिंगौरगढ़ का किला
मध्य भारत में मध्य प्रदेश राज्य के दमोह जिले में सिंगौरगढ़ का किला स्थित हैं, यह किला गढ़ा साम्राज्य का
छतरपुर का किला
छतरपुर का किला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में अठारहवीं शताब्दी का किला है। यह किला पहाड़ी की चोटी पर
चंदेरी का किला
भारत के मध्य प्रदेश राज्य के अशोकनगर जिले के चंदेरी में स्थित चंदेरी का किला शिवपुरी से 127 किमी और ललितपुर
ग्वालियर का किला
ग्वालियर का किला उत्तर प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। इस किले का अस्तित्व गुप्त साम्राज्य में भी था। दुर्ग
बड़ौनी का किला
बड़ौनी का किला,यह स्थान छोटी बड़ौनी के नाम जाना जाता है जो दतिया से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है।
दतिया महल या दतिया का किला
दतिया जनपद मध्य प्रदेश का एक सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक जिला है इसकी सीमाए उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद से मिलती है। यहां
कालपी का किला व चौरासी खंभा
कालपी का किला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अति प्राचीन स्थल है। यह झाँसी कानपुर मार्ग पर स्थित है उरई
उरई का किला और माहिल तालाब
उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद मे स्थित उरई नगर अति प्राचीन, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। यह झाँसी कानपुर
चिरगाँव का किला
चिरगाँव झाँसी जनपद का एक छोटा से कस्बा है। यह झाँसी से 48 मील दूर तथा मोड से 44 मील
गढ़कुंडार का किला
गढ़कुण्डार का किला मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में गढ़कुंडार नामक एक छोटे से गांव मे स्थित है। गढ़कुंडार का किला बीच
बरूआ सागर का किला
बरूआ सागर झाँसी जनपद का एक छोटा से कस्बा है। यह मानिकपुर झांसी मार्ग पर है। तथा दक्षिण पूर्व दिशा पर
मनियागढ़ का किला
मनियागढ़ का किला मध्यप्रदेश के छतरपुर जनपद मे स्थित है। सामरिक दृष्टि से इस दुर्ग का विशेष महत्व है। सुप्रसिद्ध ग्रन्थ
मंगलगढ़ का किला
मंगलगढ़ का किला चरखारी के एक पहाड़ी पर बना हुआ है। तथा इसके के आसपास अनेक ऐतिहासिक इमारते है। यह हमीरपुर
जैतपुर का किला या बेलाताल का किला
जैतपुर का किला उत्तर प्रदेश के महोबा हरपालपुर मार्ग पर कुलपहाड से 11 किलोमीटर दूर तथा महोबा से 32 किलोमीटर दूर
सिरसागढ़ का किला
सिरसागढ़ का किला कहाँ है? सिरसागढ़ का किला महोबा राठ मार्ग पर उरई के पास स्थित है। तथा किसी युग में
महोबा का किला
महोबा का किला महोबा जनपद में एक सुप्रसिद्ध दुर्ग है। यह दुर्ग चन्देल कालीन है इस दुर्ग में कई अभिलेख भी
कल्याणगढ़ का किला मंदिर व बावली
कल्याणगढ़ का किला, बुंदेलखंड में अनगिनत ऐसे ऐतिहासिक स्थल है। जिन्हें सहेजकर उन्हें पर्यटन की मुख्य धारा से जोडा जा
भूरागढ़ का किला
भूरागढ़ का किला बांदा शहर के केन नदी के तट पर स्थित है। पहले यह किला महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्थल था। वर्तमान
रनगढ़ दुर्ग या जल दुर्ग
रनगढ़ दुर्ग ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रतीत होता है। यद्यपि किसी भी ऐतिहासिक ग्रन्थ में इस दुर्ग
खत्री पहाड़ का दुर्ग व मंदिर
उत्तर प्रदेश राज्य के बांदा जिले में शेरपुर सेवड़ा नामक एक गांव है। यह गांव खत्री पहाड़ के नाम से विख्यात
मड़फा दुर्ग
मड़फा दुर्ग भी एक चन्देल कालीन किला है यह दुर्ग चित्रकूट के समीप चित्रकूट से 30 किलोमीटर की दूरी पर
रसिन का किला
रसिन का किला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले मे अतर्रा तहसील के रसिन गांव में स्थित है। यह जिला मुख्यालय बांदा

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *